Essay topics for IAS exam in hindi-अच्छा आतंकवाद बनाम बुरा आतंकवाद अथवा क्या आतंकवाद भी अच्छा-बुरा हो सकता है?

Essay topics for IAS exam in hindi

Essay topics for IAS exam in hindi-अच्छा आतंकवाद बनाम बुरा आतंकवाद अथवा क्या आतंकवाद भी अच्छा-बुरा हो सकता है?

आजकल आतंकवाद को भी खाँचों में बाँटा जा रहा है। आतंकवाद को ‘अच्छे आतंकवाद’ और ‘बुरे आतंकवाद’ के रूप में अभिहित किया जा रहा है और यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर बहस तलब होता जा रहा है। आतंकवाद तो आतंकवाद ही होता है, जिसमें शामिल है दहशत और वहशत, डर और धमकियाँ, खून और सिसकियां। ऐसे में इसे अच्छा आतंकवाद (Good Terrorism) या बुरा आतंकवाद (Bad Terrorism) कहना समझ से परे है। आतंकवाद तो एक ही है, सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद। विषय पर चर्चा को आगे बढ़ाने से पूर्व यह जाना लेना समीचीन रहेगा कि आतंकवाद कहते किसे हैं। 

आतंकवाद का अर्थ है हिंसा की धमकी अथवा हिंसा के कार्य अथवा भय पैदा करना और मांगें मनवाना। यदि कोई व्यक्ति या व्यक्ति समूह, सरकार या संगठनों की वांछित नीति के क्रियान्वयन में बाधा डालते हैं, तो उनके इस कृत्य के लिए ‘आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इसके रूप होते हैं वैयक्तिक क्षति, खून खराबा तथा सम्पत्ति का विनाश आदि। कभी-कभी आतंकवाद के वातावरण का निर्माण धमकियों और डराने-धमकाने से भी हो जाता है। यद्यपि आतंकवाद किसी भी समाज में संभव हो सकता है, लेकिन वह विशेष रूप से अस्थिर और लोकतंत्र विरोधी शासन व्यवस्थाओं में पाया जाता है। वर्ष 2019 में भारत में हुआ पुलवामा हमला, श्रीलंका का आतंकवादी विस्फोट तथा न्यूजीलैंड में हुए आतंकी हमलों से यह सिद्ध कर दिया है कि आज भी आतंकवाद एक वैश्विक त्रासदी है। 

आतंकवाद का अर्थ है हिंसा की धमकी अथवा हिंसा के कार्य अथवा भय पैदा करना और मांगें मनवाना। यदि कोई व्यक्ति या व्यक्ति समूह, सरकार या संगठनों की वांछित नीति के क्रियान्वयन में बाधा डालते हैं, तो उनके इस कृत्य के लिए ‘आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। 

आज आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है, यह वैश्विक समस्या बन चुका है। जहाँ भारत जैसा विशाल लोकतांत्रिक देश आतंकवाद से प्रभावित है, वहीं अमेरिका जैसा सशक्त देश भी इससे प्रभावित है। आतंकवाद की भयावहता और विकरालता को इसी से समझा जा सकता है कि प्रायः सभी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों और गोष्ठियों में आतंकवाद का मुद्दा छाया रहता है और इसे एक वैश्विक चुनौती के रूप में अभिहित किया जाता है। इससे निपटने के लिए जहाँ पारस्परिक सहयोग का आह्वान किया जाता है, वहीं राष्ट्रों के प्रमुख नेताओं द्वारा आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा की जाती है। ऐसे में अच्छे-बुरे आतंकवाद की दलीलें सामने आना हास्यास्पद सा लगता है। 

अच्छे और बुरे आतंकवाद की सतही और खोखली अवधारणा पर प्रहार करने का श्रेय सर्वप्रथम भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है। कुछ समय पहले मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में न सिर्फ आतंकवाद और उसके पोषक देशों की तीव्र भर्त्सना की, बल्कि बड़े साफ लहजे में अच्छे-बुरे आतंकवाद पर भी प्रहार करते हुए कहा कि अच्छा आतंकवाद और बुरा आतंकवाद क्या होता है, आतंकवाद तो आतंकवाद ही है। अपनी बेबाक बयानी से मोदी ने इस सतही और खोखली अवधारणा को प्रश्नगत कर दिया। 

आज विश्व के अनेक देश ऐसे हैं, जो आतंकवाद के पोषक के रूप में पहचाने जाते हैं। आतंकवाद को इनकी सरकारों द्वारा समर्थन दिया जाता है। यानी सरकारों द्वारा समर्थित आतंकवाद इन देशों की पहचान बन गया है। ये वे देश हैं जिनमें संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित ‘वैश्विक आतंकवादी’ खुलेआम घूमते हैं, भाषण देते हैं, हथियारों के जखीरे जुटाते हैं और बेरोक-टोक आतंकी गतिविधियों का संचालन करते हैं। इसे ये बड़ी बेहयाई से ‘अच्छे आतंकवाद’ के रूप में अभिहित करते हैं। इस तस्वीर का दूसरा रूख यह है कि जब इन देशों में कोई आतंकवादी घटना होती है और ये आतंकवादियों का शिकार बनते हैं तो इसे ये बुरा आतंकवाद (Bad Terrorism) कहत हैं। इस अच्छे और बुरे आतंकवाद पर यह कहना सही होगा कि पाव जब तक अपनी दुम पर नहीं पड़ता है, तब तक आतंकवाद अच्छा है और जब पांव अपनी ही दुम पर पड़ जाता है, तब आतंकवाद बुरा है। 

अच्छे और बुरे आतंकवाद की सतही और खोखली अवधारणा पर प्रहार करने का श्रेय सर्वप्रथम भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है। कुछ समय पहले मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में न सिर्फ आतंकवाद और उसके पोषक देशों की तीव्र भर्त्सना की, बल्कि बड़े साफ लहजे में अच्छे-बुरे आतंकवाद पर भी प्रहार करते हुए कहा कि अच्छा आतंकवाद और बुरा आतंकवाद क्या होता है, आतंकवाद तो आतंकवाद ही है। 

वैश्विक स्तर पर हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान आतंकवाद को लेकर सुर्ख नाम है। आतंकवाद के इस ‘महापोषक देश’ के हवाले से हम अच्छे आतंकवाद और बुरे आतंकवाद को ज्यादा बेहतर ढंग से सुस्पष्ट कर सकते हैं। बात कुछ समय पहले की है। ‘म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन’ में पाकिस्तान की सेना के प्रमुख जनरल जावेद बाजवा ने अपने भाषण में कहा कि जहाँ तक उनके देश, सेना और आई एस आई का सवाल है, तो वे आतंकवाद को दो श्रेणियों में रखते हैं ‘अच्छा आतंकवाद’ और ‘बुरा आतंकवाद’। उन्होंने अफगानिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि पाकिस्तान खुद बुरे आतंकवाद का शिकार है। इशारा अफगानिस्तान से उभर रहे आतंकवाद की ओर था। भारत का नाम लिए बगैर उन्होंने ‘अच्छे आतंकवाद’ को इंगित करते हुए कहा कि इस्लामाबाद ‘अच्छे आतंकवाद’ को समर्थन देता है, यदि वह किसी दमनकारी देश के खिलाफ है। इशारों-इशारों में जनरल बाजवा ने इस वैश्विक सम्मेलन को यह संदेश देना चाहा कि कश्मीर में भारत की दमनकारी भूमिका है तथा वहाँ जो आतंकवाद है, वह ‘अच्छा आतंकवाद’ है। कैसी कुटिल मानसिकता है। दूसरे के घर में आग लगाना अच्छा है और चिंगारी यदि अपने घर में पड़ जाए तो यह बुरा है। 

एक वैश्विक स्तर के सम्मेलन में पाकिस्तान के सेना प्रमुख के भाषण से यह ध्वनित होता है कि उनका देश ‘अच्छे बनाम बुरे आतंकवाद’ की नीति पर आगे बढ़ रहा है। यह अधिकृत तौर पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने तथा विशेष रूप से भारत और अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकवादी समूहों को सहयोग एवं समर्थन देने की स्वीकारोक्ति भी है। पाकिस्तान की सेना के प्रमुख के इस द्विअर्थी भाषण के बाद अमन पसंद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का गुस्सा फूटा। पाकिस्तान को ‘फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स’ (FATF) द्वारा आतंक की फंडिंग रोक पाने में विफल रहने की वजह से ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया गया। पाकिस्तान को इससे पहले भी वर्ष 2012 से 2015 तक एवं फिर 2018 में इस सूची में डाला गया था। किसी भी देश को इस लिस्ट में डाले जाने के बाद उस देश को अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से कर्ज मिलने में कठिनाई आती है, क्योंकि यह ‘संदिग्धों की सूची’ होती है। इसमें जाने के बाद वैश्विक स्तर की रेटिंग एजेंसियाँ सम्बन्धित देश की रेटिंग को डाउनग्रेड कर देती हैं। यहाँ यह जान लेना समीचीन रहेगा कि ‘फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स’ (FATF) है क्या? एफ एटी एफ एक अंतरसरकारी संगठन है। इसे जी-7 देशों की पहल पर 1989 में गठित किया गया था। गठन के समय इसके सदस्य देशों की संख्या 16 थी, जो कि वर्ष 2019 में बढ़कर 39 हो गई। इस निकाय का एक सदस्य भारत भी है। यह निकाय आतंकी संगठनों के वित्त पोषण की निगरानी करता है 

इसे विडंबना ही कहेंगे कि अच्छे आतंकवाद बनाम बुरे आतंकवाद के पैरोकार घृणित आतंकी कृत्यों को धर्म से जोड़ने तक से बाज नहीं आ रहे हैं। युवकों को गुमराह कर उन्हें आतंकवादी बनाया जाता है और यह आतंक फैलाने को ‘जेहाद’ (धर्मयुद्ध) बताया जाता है। यह कहा जाता है कि उसमें मर गए तो जन्नत (स्वर्ग) नसीब होगी। यह अधर्म और अत्याचार नहीं तो और क्या है कि आतंकी संगठनों के वित्त पोषण के लिए जकात (दान) लिया जाता है, ताकि अच्छे आतंकवाद के पैर ढंग से जमाए जा सकें। ‘अच्छे आतंकवाद’ के पोषक पहले तो सांप को दूध पिलाते हैं और यही सांप जब उन्हें डसता है, तो आतंकवाद बुरा हो जाता है। 

यदि हम चाहते हैं कि दुनिया अहिंसा के रास्ते पर चले, अमन-चैन बना रहे और विश्व बंधुत्व कायम रहे तो यह आवश्यक है कि अच्छे और बुरे आतंकवाद की दोहरी चाल चलने वाले आतंकवाद के पोषकों पर लगाम कसी जाए। 

यदि हम चाहते हैं कि दुनिया अहिंसा के रास्ते पर चले, अमन चैन बना रहे और विश्व बंधुत्व कायम रहे तो यह आवश्यक है कि अच्छे और बुरे आतंकवाद की दोहरी चाल चलने वाले आतंकवाद के पोषकों पर लगाम कसी जाए। यह काम अकेले भारत के बूते का नहीं है। आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए साझा प्रयासों की जरूरत है, जिसके लिए विश्व के अमन पसंद देशों को आगे आना होगा। वैश्विक प्रयास होते भी दिख रहे हैं। वैश्विक निकाय एफ ए टी एफ आतंकी संगठनों के वित्त पोषण की निगरानी के साथ निरोधात्मक कदम उठा रहा है। अमेरिका भी प्रयत्नशील है। उसने जनवरी, 2018 में पाकिस्तान को मिलने वाली लगभग सवा मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद रोक दी थी, क्योंकि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने में वह नाकाम रहा था। अप्रैल, 2018 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ ने जो नई टेरर लिस्ट जारी की थी, उसमें पाकिस्तान | से 139 एंट्री थीं। इसमें हाफिज सईद को इंटरपोल का मोस्ट वांडेट | बताया गया है। सितंबर, 2017 में ब्रिक्स देशों के घोषणा-पत्र में पहली बार लश्कर-ए-तैयबा’ और ‘जैश-ए-मोहम्मद’ जैसे पाकिस्तानी संगठनों का नाम शामिल किया गया। ये अच्छे संकेत हैं। 

दुनिया में शांति और बंधुत्व की स्थापना करने के लिए हमें ‘अच्छे आतंकवाद’ और ‘बुरे आतंकवाद’ की दोहरी चाल चलने वालों पर लगाम कसनी होगी और आतंकवाद के सभी स्वरूपों का प्रतिकार करना होगा। ऐसा करते हुए यह बात ध्यान में रखनी होगी कि आतंकवाद सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद होता है और कुछ नहीं। 

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