युवा असंतोष पर निबंध | Essay on Young Discontent in Hindi

युवा असंतोष पर निबंध

युवा असंतोष पर निबंध | Essay on Young Discontent in Hindi

युवा शक्ति ही किसी राष्ट्र की प्रमुख शक्ति होती है। जिस देश में युवा शक्ति रचनात्मक कार्यों में लग जाएगी, उस देश का कायाकल्प सुनिश्चित हो जाता है। इसके ठीक विपरीत जिस देश में युवा शक्ति विध्वंसकारी गतिविधियों में लग जाएगी, उस राष्ट्र का पतन अवश्यंभावी है। अतः प्रत्येक राष्ट्र को सचेष्ट रहना चाहिए कि युवा शक्ति भटकने न पाए। युवा शक्ति के भटक जाने का मुख्य कारण प्रायः युवा असंतोष ही होता है। 

भारत की नई पीढ़ी, चाहे वह विद्यालय में हो या सचिवालय में, राजनीति में हो या साहित्य में, दफ्तरों में हो या सड़कों पर सभी में असंतोष है। इसी के कारण सर्वत्र अराजकता है। विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय, जो अनुशासन सीखने के स्थान माने जाते हैं, वहां आज अनुशासनहीनता का तांडव हो रहा है। विश्वविद्यालयों में तोड़-फोड़ की जा रही है। शिक्षक पीटे जा रहे हैं। परीक्षाओं में कदाचार खुले रूप में हो रहा है। आज कोई भी सभ्य आदमी परिवार के साथ छात्रावास के समीप मकान बनवाकर रहना पसंद नहीं करता। 

एक समय था, जब शिक्षक के संकेत मात्र से छात्र मर-मिटने को तैयार हो जाते थे, लेकिन आज यह भावना पूर्णतया ध्वस्त हो चुकी है। आज उदंड छात्रों के इशारे पर शिक्षक कठपुतली बने हुए हैं। इसका कारण यह है कि आज भ्रष्टाचार विकराल रूप में शिक्षण संस्थाओं में भी प्रवेश कर गया है। छात्रों के मार्गदर्शक अब उसके आचार्य न होकर राजनीतिज्ञ हो गए हैं। विश्वविद्यालयों में छात्रों का प्रवेश सिफारिश, भाई-भतीजावाद, जातिवाद और रिश्वत के आधार पर हो रहा है। यही नहीं, पैरवी कराने वाले छात्र उच्च श्रेणी प्राप्त कर रहे हैं। इन्हीं कारणवश युवा छात्रों में असंतोष फैला हुआ है। 

छात्रों एवं युवाओं में फैले असंतोष के कई अन्य कारण हैं। छात्र जानते हैं कि विश्वविद्यालयों में अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी उन्हें धूल ही छाननी है, क्योंकि नौकरी तो प्रतिभा के बजाय घूसखोरी और जातिवाद से मिलती है। इससे युवाओं में निराशा एवं अशांति व्याप्त हो रही है। आज युवक राष्ट्रहित में 

न लगकर आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त हो रहे हैं। इस प्रकार युवा शक्ति जो राष्ट्र का निर्माण करती है, आज राष्ट्र के लिए ही अहितकर बन गई है। वह बेरोजगारी के कारण गुमराह हो गई है। 

कल-कारखानों या अन्य संस्थानों में कार्यरत युवाओं में भी असंतोष व्याप्त है। युवा कर्मचारी खून-पसीना एक करके काम करते हैं, फिर भी उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिलता। इनके बच्चों के लिए अच्छे भोजन और अच्छी पढ़ाई की व्यवस्था नहीं हो पाती। उन्हीं मजदूरों का शोषण करके कल-कारखाने के मालिक मौज-मस्ती में जीते हैं। गरीब-अमीर का फर्क सब जगह स्पष्ट दिखाई पड़ता है। ऐसे में भेदभाव से कर्मचारियों में भी असंतोष व्याप्त हो गया है। ये कर्मचारी कारखानों में ताले लगाकर व्यवस्था के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त करते हैं। फलतः अधिकांश कारखाने बंद पड़े हैं या बंद होने के कगार पर हैं। 

सारांशत: बेरोजगारी, महंगाई, भाई-भतीजावाद, गरीबी, जात-पांत, घूसखोरी आदि युवाओं में व्याप्त असंतोष के कारण हैं। लेकिन राजनीतिक भ्रष्टाचार युवा असंतोष का सबसे बड़ा कारण है। सत्तासीन भ्रष्ट नेताओं ने तो आज मेधा और प्रतिभा के लिए नौकरी के दरवाजे ही बंद कर दिए हैं। एक ओर भ्रष्ट व्यापारी, पदाधिकारी एवं तस्कर फल-फूल रहे हैं, तो दूसरी ओर ईमानदार, कर्मठ और चरित्रवान लोग सड़कों पर धूल छान रहे हैं। 

ऐसी परिस्थिति में युवाओं में असंतोष उपजना स्वाभाविक है। इस असंतोष को दूर करने के लिए ऐसी शिक्षण-व्यवस्था लागू करनी होगी, जिससे प्रत्येक युवा को काम मिल सके तथा मालिकों द्वारा मजदूरों का शोषण बंद हो सके। इसके अलावा समाज में व्याप्त जात-पांत, ऊंच-नीच तथा अमीर-गरीब की खाई को भरना होगा। मनुष्य की उन्नति तथा प्रतिष्ठा का मापदंड पैसा और पैरवी न मानकर मेधा को मानना होगा, तभी युवाओं में व्याप्त असंतोष दूर किया जा सकता है, अन्यथा युवा असंतोष की ज्वालामुखी भभकती रहेगी। 

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