ग्रीष्मावकाश का सदुपयोग पर निबंध | Essay on Utilizing Summer Vacation

ग्रीष्मावकाश का सदुपयोग पर निबंध

ग्रीष्मावकाश का सदुपयोग पर निबंध 

विद्यार्थियों के लिए अवकाश का विशेष महत्व है, इसीलिए प्रायः शिक्षण संस्थाओं में एक-दो दिन की छुट्टियां हुआ करती हैं। लेकिन होली, दीवाली, दशहरा तथा गरमी और सर्दी के दिनों में लंबी छुट्टियां मिलती हैं। यदि इन छुट्टियों का आकलन किया जाए, तो शिक्षण संस्थाओं में वर्ष के आधे दिन अवकाश ही रहते हैं। जो विद्यार्थी इन अवकाशों का सदुपयोग नहीं करते, वे अपने-आपको धोखा देते हैं। विद्यार्थियों को नीतिकारों की यह उक्ति हमेशा याद रखनी चाहिए, “क्षण-क्षण का उपयोग करने से मनुष्य विद्वान बनता है और कण-कण को संजोकर रखने से धनवान हो जाता है।” 

अवकाश के दिनों में विद्यार्थी यह सोचते हैं कि स्कूल बंद तो पढाई बंद अर्थात स्कूल से छुट्टी और किताबों से छुटकारा। ग्रीष्मावकाश में तो उनकी दिनचर्या ही बदल जाती है। वे आठ बजे सोकर उठते हैं। घर में छोटे भाई बहनों से लड़ना, दोस्तों के साथ गप्पें मारना तथा मुहल्ले के लोगों को परेशान करना—यही उनका दिनभर का कार्यक्रम रहता है। न धूप, न वर्षा और न आंधी का भय-दिन भर आम्रकुंजों में उधम मचाना मानो ग्रीष्मावकाश के उनके अधिकृत कार्य हों। उनकी इन्हीं गंदी आदतों से तंग आकर माता-पिता प्रायः कहा करते हैं कि कब विद्यालय खुले और इनकी शैतानियों से मुक्ति मिले। 

अवकाश में ऐसे विद्यार्थियों की पुस्तकें अलमारी में पड़ी रहती हैं और उन पर धूल जम जाती है। पढ़ने को कौन कहे, उन्हें तो झाड़ने-पोंछने का भी मौका नहीं मिलता। ऐसे विद्यार्थी यह सोचते हैं कि छुट्टी मौज-मस्ती के लिए मिली है, पढ़ने के लिए नहीं। लेकिन ग्रीष्मावकाश के बाद जब पढ़ाई शुरू होती है, तो वे अपनी स्थिति जानकर रो पड़ते हैं। उन्हें शिक्षकों एवं माता-पिता की डांट खानी पड़ती है तथा मित्रों और मुहल्ले वालों से उपेक्षित होना पड़ता है। उनके आंसू पोंछने वाला भी कोई नहीं होता। ऐसे ही विद्यार्थियों के लिए कहा गया है-अब पछताये होत क्या, जब चिड़ियां चुग गईं खेत। 

आदर्श विद्यार्थी को चाहिए कि ग्रीष्मावकाश के दिनों में नियमित रूप से पढ़ाई करता रहे। सर्वप्रथम अध्यापक द्वारा छुट्टी में दिए गए गृहकार्य को पूरा कर लेना चाहिए। इसके बाद वह जिस विषय में कमजोर है, अवकाश के दिनों में उसका गहन अध्ययन करना चाहिए। समय मिलने पर पाठ्य पुस्तकों के अलावा अन्य अच्छी पुस्तकों का भी अध्ययन करना चाहिए। ग्रीष्मावकाश के दिनों में प्रतिदिन कुछ समय निकालकर विद्यार्थी को माता-पिता के कामों में हाथ बंटाना चाहिए। यदि पिता कृषक हों, तो गांव जाकर उनके कार्यों में मदद करनी चाहिए। इसी प्रकार यदि पिता व्यापारी हों, तो व्यापार में उनका हाथ बंटाकर व्यापार संचालन को समझना चाहिए। ये सभी व्यावहारिक ज्ञान छात्रों के भविष्य के लिए बड़े काम की चीज होती है। ऐसे छात्रों को व्यावहारिक जीवन में उतरने पर इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता। 

जिन छात्रों के अभिभावकों की आर्थिक स्थिति अच्छी हो, उन्हें देशाटन शिक्षा का अनुभव लेना चाहिए। इससे ज्ञान, बुद्धि और कुशलता में वृद्धि होती है। दर्शनीय स्थलों का भ्रमण उनमें उमंग लाता है। ग्रीष्मावकाश की छुट्टी का उपयोग विद्यार्थियों को समाज सेवा में भी करना चाहिए। समाज सेवा से छात्रों में दया, परोपकार, त्याग आदि मानवीय गुणों का विकास होता है। 

इतना सब कहने का अर्थ यह नहीं कि अवकाश में मनोरंजन पर ध्यान नहीं देना चाहिए। विद्यार्थियों के लिए खेल और मनोरंजन आवश्यक है। उन्हें आलस्य का त्याग करना चाहिए और अच्छी किताबों का अध्ययन, देशाटन एवं समाज सेवा में हाथ बंटाकर ग्रीष्मावकाश का सदुपयोग करना चाहिए।

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