संयुक्त राष्ट्र संघ पर निबंध | Essay on United Nation Organisation (UNO) in Hindi

संयुक्त राष्ट्र संघ पर निबंध

संयुक्त राष्ट्र संघ पर निबंध | Essay on United Nation Organisation (UNO) in Hindi

विश्व के प्राय: सभी राष्ट्रों के सम्मिलित संघ को संयुक्त राष्ट्र संघ’ कहा जाता है। यह एक ऐसी संस्था है, जिसमें विश्व की समस्त अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं और पारस्परिक विवादों का समाधान शांतिपूर्ण वार्तालाप द्वारा किया जाता है। 

दूसरे विश्व युद्ध के मध्य संसार में हुए नरसंहार और विनाश को देखकर लोगों के दिल दहल गए थे। भविष्य में ऐसे युद्धों की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से विश्व की अनेक शक्तियों ने प्रयास आरंभ कर दिए। इसी उद्देश्य से प्रेरित होकर विश्व के 50 देशों के प्रतिनिधियों ने 26 जून, 1945 को सैन-फ्रांसिस्को नगर में संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर पर हस्ताक्षर किए तथा औपचारिक तरीके से 24 अक्टूबर, 1945 को ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ की स्थापना हुई। विश्व के 50 से अधिक देशों ने इस संघ की सदस्यता ग्रहण की। आज इसमें 191 देश सदस्य हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य कार्यालय संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयार्क नगर में स्थित है। इसके कुछ प्रमुख अंग हैं—महासभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक एवं सामाजिक परिषद, न्याय परिषद, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय तथा सचिवालय। 

इन सभी अंगों में महासभा शक्तिशाली और प्रभुत्व संपन्न है। यह सभी विषय पर मतदान द्वारा निर्णय लेती है। इसका दूसरा खास अंग सुरक्षा परिषद है। इसका काम विश्व में शांति बनाए रखना है। इसके सदस्यों की संख्या 15 है। इनके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र संघ की अनेक महत्वपूर्ण शाखाएं हैं, जिसमें विश्व बैंक, स्वास्थ्य संगठन, अन्न एवं कृषि संगठन; संयुक्त राष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन आदि प्रमुख हैं। विश्व बैंक पिछड़े राष्ट्रों को आर्थिक सहायता ऋण के रूप में प्रदान करता है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय विश्व के आपसी झगड़ों को निपटाने के लिए निर्णय देता है। 

संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के कई उद्देश्य हैं। इसका प्रथम उद्देश्य है वह विश्व में शांति बनाए रखने, युद्ध को रोकने तथा आक्रमण का विरोध करके उसे बंद कराने का प्रयास करता है। यदि किसी क्षेत्र में अशांति बनी रहती है, तो वह शांति स्थापित करने तथा युद्ध विराम सुनिश्चित करने हेतु वहां अपनी शांति सेना भेजता है। इनके अतिरिक्त वह प्रत्येक व्यक्ति को मानव अधिकार एवं स्वतंत्रता दिलाने तथा उनके सामाजिक और आर्थिक कल्याण हेतु प्रयत्न करता है। इसका द्वितीय उद्देश्य है-संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व में विकास कार्यों को प्रोत्साहन देता है। उसकी कुछ एजेंसियां सूखा, बाढ़, भूकंप तथा अन्य प्राकृतिक विपदाओं से पीड़ित जनता को राहत और सहायता पहुंचाती हैं। वे एजेंसियां विभिन्न खाद्य पदार्थों का उत्पादन बढ़ाने, नई औषधियों की खोज करने तथा उन्हें जरूरतमंदों तक पहुंचाने का भी कार्य करती हैं। 

संयुक्त राष्ट्र संघ ने अब तक अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उसने दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया के बंधन से मुक्त कराया। इसके द्वारा डच, इंडोनेशिया, अरब, यहूदियों तथा मिस्र के झगड़ों का बड़ी सफलतापूर्वक निर्णय किया गया। दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के प्रति दुर्व्यवहार भी इसके द्वारा समाप्त कराया गया। इनके अतिरिक्त 1964 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपनी शांति सेना साइप्रस भेजी। सन 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध रोकने में संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रेक्षकों का योगदान भी काफी महत्वपूर्ण है। सन 1988 में इसके प्रयासों से आठ वर्षों से चल रहे ईरान-इराक युद्ध में विराम हो सका। 

इस प्रकार संयुक्त राष्ट्र संघ का कार्य निःसंदेह सराहनीय है, परंतु कुछ विषयों पर इसका पक्षपातपूर्ण रवैया इसकी विश्वसनीयता को धूमिल करता है। संयुक्त राष्ट्र संघ की संरचना जिस पावन उद्देश्य को लेकर की गई थी, उसके विपरीत यह कुछ देशों की कठपुतली बनकर रह गया है। अनेक देशों की समस्याएं अभी मंझधार में पड़ी हैं। फिर भी इसका अपना महत्व है। आशा है, आने वाले समय में यह अपनी मंजिल तक अवश्य पहुंचेगा।

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