सुनामी पर निबंध – Essay on Tsunami in Hindi

सुनामी पर निबंध

सुनामी पर निबंध – Tsunami Essay in Hindi

‘सुनामी’ जापानी भाषा का शब्द है, जिसका तात्पर्य हैसमुद्री तूफानी लहरें। यह तूफान समुद्र के गर्भ में ज्वालामुखी फटने या भूकंप आने के कारण उत्पन्न होता है। 26 दिसंबर, 2004 को इंडोनेशिया के सुमाया द्वीप के तट के पास एक प्रलयंकारी भूकंप आया, जिसने दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री तटवर्ती इलाकों का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया। हजारों प्राणियों की जान लेने वाले इस हादसे ने समुद्र के बारे में लोगों की धारणा ही बदल दी। 

भूकंप और उसके झटके से समुद्र में ऐसी भयावह लहरें उठीं, जो 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इंडोनेशिया से आगे उत्तर और पश्चिम की ओर बढ़ती गईं। रास्ते में उनकी ताकत और गति में भी तेजी आ गई। एक घंटे के भीतर प्रचंड लहरों ने सिंगापुर और मलेशिया पर धावा बोल दिया। सुनामी से दक्षिण थाईलैंड में भीषण तबाही हुई। इसके बाद समुद्री लहरों ने भारत, श्रीलंका, म्यांमार और बांग्लादेश में भी तबाही मचा दी। 

सुनामी लहरों ने ज्यादातर ऐसे देशों और उन राज्यों को प्रभावित किया, जहां पर्यटन उद्योग अच्छी तरह फल-फूल रहा था। सुनामी लहरों ने इन देशों में आए पर्यटकों के साथ जो सलूक किया, उससे भविष्य में आने वाले पर्यटकों को कई बार सोचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यह भी एक इत्तफाक है कि इन सुनामी लहरों ने क्रिसमस और नये वर्ष के बीच अपना कहर बरपाया। सुनामी लहरों ने भारत के दक्षिणी राज्यों-तमिलनाडु, केरल, पांडिचेरी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारी तबाही मचाई। सुनामी लहरों से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में हुई मौतों के मुकाबले भारत में कम नुकसान हुआ। भारत में विदेशी पर्यटकों की तबाही अन्य देशों की तुलना में कम हुई। फिर भी कुछ देशों ने अपने नागरिकों को इन देशों में जाने से रोक दिया। 

सुनामी लहरों के तकरीबन दो घंटे पहले भारी तबाही वाला भूकंप आया था। भूकंप के दो घंटे बाद 400 मील की रफ्तार से आई काफी ऊंची सुनामी लहरों ने चेन्नई और तमिलनाडु के समुद्री तट पर अपना तांडव किया। सबसे अधिक तबाही मछुआरों की हुई। मछुआरों का सब कुछ मलबा बन गया। 

प्रशांत महासागर में सुनामी का खतरा आम बात है, जहां इसकी निगरानी और चेतावनी के तकनीकी क्षेत्र में जापान, अमेरिका और आस्ट्रेलिया जैसे देशों ने एक सहयोग व्यवस्था वर्षों से बनी रखी है। भारत ने पहले कभी इस दिशा में सहयोग लेने की कोई पहल नहीं की। गुजरात भूकंप के कटु अनुभव के बाद केंद्र सरकार ने आपदा चेतावनी और प्रबंधन के लिए एक केंद्रीय तंत्र गठित करने की घोषणा की थी, लेकिन इतने दिनों तक उसे भी सक्रिय नहीं किया गया। दरअसल आपदा प्रबंधन के लिए केंद्रीय स्तर से लेकर निचले पंचायत स्तर तक एक सक्रिय तंत्र की आवश्यकता स्वयं सिद्ध है। 

सुनामी लहरों से आई आपदा न तो पहली है और न ही अंतिम-इस बात पर विशेषज्ञ एक मत नहीं हैं। लेकिन उनके अनुसार इसकी आशंका लगातार बढ़ती जा रही है। भारत में आपदा प्रबंधन की स्थिति मजबूत नहीं है। हर बड़ी आपदा की सूचना पहले नहीं मिल सकी है, जिसके कारण आपदा आने पर राहत कार्यों में काफी परेशानी उठानी पड़ती है।

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