भारत में पर्यटन पर निबंध | Essay On Tourism In India In Hindi

भारत में पर्यटन पर निबंध

भारत में पर्यटन  पर निबंध  अथवा चिकित्सीय अथवा ग्रामीण पर्यटन |Essay On Tourism In India In Hindi

मैक्स मुलर ने कहा है- “यदि हमें संपूर्ण विश्व में किसी ऐसे देश की खोज करनी हो, जिसमें प्रकृति की सर्वाधिक संपदा, शक्ति व सौंदर्य निहित हो, तो मैं भारत का नाम लूंगा।” निःसंदेह भारत अतुल्य है। अपार सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता वाले इस देश में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। भारत का वैविध्य आज से नहीं, बल्कि प्राचीनकाल से ही लोगों को आकर्षित करता रहा है। आज पर्यटन और स्वास्थ्यप्रद पर्यटन मुहैया कराने की दृष्टि भारत का विश्व में 7वां स्थान है, जो कि इसकी मजबूत वैश्विक स्थिति का द्योतक है। विश्व पर्यटन के दृष्टिकोण से भारत एक निरापद सुरक्षित सरल राष्ट्र तो है ही, साथ ही साथ भारतवर्ष की संस्कृति का पिछले | 5000 वर्षों का प्रमाणिक इतिहास भी है, जो इसे श्रेष्ठ पर्यटन स्थल की श्रेणी में ला खड़ा करता है। हमारे देश में पर्यटन, उद्योग के रूप | में फल-फूल रहा है और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है। 

आज पर्यटन और स्वास्थ्यप्रद पर्यटन मुहैया कराने की दृष्टि भारत का विश्व में 7वां स्थान है, जो कि इसकी मजबूत वैश्विक स्थिति का  द्योतक है। 

भारत परंपरागत पर्यटन की दृष्टि से तो सरमब्ज देश है ही, बदलते दौर में यहां चिकित्सा पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन की भी संभावनाएं बढ़ी हैं। चिकित्सा पर्यटन जहां चिकित्सकीय लाभ पाने के निमित्त किया जाता है, वहीं ग्रामीण पर्यटन के तहत शहर की आपाधापी और मशीनी जिंदगी से उकताए शहरियों को गांवों की खुली आबोहवा, हरियाली और मिट्टी की सोंधी महक सुकून और आनंद प्रदान करती है। सामान्य पर्यटन से चिकित्सकीय पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन कुछ अलग अवश्य है, किंतु इनका उल्लेख किए बगैर पर्यटन पर चर्चा समग्रता नहीं प्राप्त कर सकती है। पहले हम सामान्य पर्यटन की बात करते हैं।

विश्व में भारत ही वह देश है जो अतुल्य है तथा जहां अतिथि को देवतुल्य (अतिथि देवो भवः) मानने की रवायत है। भारत में सरकारी स्तर पर पर्यटन को विकसित करने की पहलें बढ़-चढ़कर हो रही हैं। यह सुखद है कि भारत सदैव अपनी विशिष्टताओं के कारण वैश्विक समुदाय के आकर्षण का केंद्र रहा है। यह सौभाग्य का विषय है कि जिज्ञासाओं के संदर्भ में पर्यटकों का विशेष आकर्षण भारत के प्रति है। इस आकर्षण को और बढ़ाने के लिए जहां ‘अतुल्य भारत’ की अवधारणा को सार्थक बनाने पर बल दिया जा रहा है, वहीं पर्यटकों की सुविधाओं और सहूलियतों पर भी खास तरजीह दी जा रही है। पर्यटन के महत्त्व को समझते हुए इसके विकास के प्रयास काफी पहले शुरू कर दिये गये थे। वर्ष 1966 में भारतीय पर्यटन विकास निगम का गठन इसी ध्येय से किया गया कि देश में पर्यटन की प्रगति हो। वर्ष 1967 में विधिवत पर्यटन एवं नागरिक उड्यन मंत्रालय की स्थापना की गई और इसी के साथ इस उद्योग को ऊंचाई देने के प्रयास शुरू हुए। यह संगठित गतिविधि की श्रेणी में आ गया। वर्ष 1991 पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इस वर्ष विदेशी निवेश के लिए पर्यटन को प्राथमिकता का क्षेत्र घोषित – किया गया। इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 1992 में पर्यटन के चहुंमुखी विकास तथा इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा अधिकाधिक विदेशी मुद्रा के अर्जन के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार की गई। 

वर्ष 2002 भी पर्यटन की दृष्टि से विशेष महत्त्व का रहा। संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन वर्ष घोषित किया, तो भारत ने पर्यटन उद्योग को स्थापित करने तथा बढ़ावा देने के लिए नई राष्ट्रीय पर्यटन नीति की घोषणा की। इस नीति का उद्देश्य देश के आर्थिक विकास की गति में तेजी लाने के लिए पर्यटन उद्योग की हिस्सेदारी को बढ़ाना, इस क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा रोजगार सृजित करना तथा आर्थिक विकास के क्षेत्र में इसके गुणात्मक प्रभावों का भरपूर इस्तेमाल करना था। इस नीति के तहत पर्यटन के फलक को भी विस्तार देने का काम किया गया। इस सिलसिले को और आगे बढ़ाते हुए 1 मई, 2015 को केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2002 की राष्ट्रीय पर्यटन नीति के स्थान पर ‘नई राष्ट्रीय पर्यटन नीति, 2015’ का मसौदा जारी किया गया। यह मसौदा पर्यटन क्षेत्र में हितधारकों, विदेशी टूर ऑपरेटरों, महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों व विशेषज्ञों एवं विभिन्न राज्य सरकारों और संघीय क्षेत्र प्रशासनों से प्राप्त सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। वर्ष 2015 की इस नई नीति में जहां राष्ट्रीय पर्यटन नीति 2002 पर पुन: ध्यान देते हुए ठोस कार्य योजना के साथ सशक्त एवं उत्तरदायित्वा रुप से पर्यटन के विकास पर बल दिया गया है, वहीं पर्यटन विकार में सामदायिक भागीदारी और रोजगार सृजन पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। यह नीति भारत का ‘अवश्य अनुभव करें। (Must Experience) और ‘अवश्य पुनः आएं’ (Must Re-Visit स्थान के रूप में विकसित एवं स्थापित करने के दृष्टिकोण का अपनाती है। इस नीति की सबसे खास बात यह है कि इसके तहत एक ‘राष्टीय पर्यटन सलाहकार बोर्ड’ (National TourismAdvi sory Board : NTAB) का गठन प्रस्तावित है। इसी क्रम में भारत सरकार ने पर्यटन को सुलभ बनाने के लए अगस्त, 2019 में एक नई ई-टूरिस्ट प्रणाली की घोषणा की है जिसमें पर्यटकों की संख्या के आधार पर वीजा शुल्क लिया जाएगा। 

पर्यटन उद्योग के ढांचागत विकास के लिए भी सरकार प्रयत्नशील है। महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले मार्गों के रख-रखाव और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘बौद्ध परिपथ’ एवं ‘ब्रज पर्यटन परिपथ’ सहित अन्य अनेक परिपथों की शुरुआत की गई है। हाल ही में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘स्वदेश दर्शन योजना शुरू की गई है। पर्यटन को प्रोत्साहन देने तथा एक रोजगारपरक उद्योग की तरह इसमें रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाने की गरज से पर्यटन को बाकायदा एक विषय के रूप में विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। भारत में पर्यटन की जड़ें गहरी और मजबूत हों, इस बात को ध्यान में रखकर प्रचार-प्रसार में भी कोताही नहीं बरती जा रही है। वर्ष 2014 में विदेशी पर्यटकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा आगमन पर पर्यटक वीजा’ (Toursit Visa on Arrival) योजना का सूत्रपात किया गया। इलेक्ट्रॉनिक यात्रा अनुज्ञप्ति आधारित इस योजना को वर्ष 2015 में नया नाम ‘ई-पर्यटक वीजा (e-Tourist visa) दिया गया। इस योजना के तहत वर्तमान में ई. पर्यटक वीजा की सुविधा से आच्छादित देशों की संख्या 150 है, जबकि इस सुविधा की उपलब्धता वाले देश के हवाई अड्डों की संख्या अब 16 हो गई है। ई-पर्यटक वीजा सुविधाओं का लाभ उठाने वाले देशों की सूची में पहले, दूसरे और तीसरे पायदान पर क्रमशः ब्रिटेन (12.1%), अमेरिका (10.2%) तथा चीन (6.3%) हैं। इस तरह की योजनाओं के सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं। भारत में पर्यटन के उद्देश्य से विदेशियों की आमद बढ़ रही है। 

भारत में विदेशी पर्यटकों के आगमन की बढ़ती संख्या को हम इन आंकड़ों से समझ सकते हैं। जहां वर्ष 2017 में 10.04 लाख विदेशी पर्यटक भारत आए, वहीं वर्ष 2018 में भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 10.56 लाख रही, जो कि अच्छी बढ़त को दर्शा रही है। भारत में सर्वाधिक विदेशी पर्यटक बांग्लादेश से (21.65%) आते हैं। दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें पायदानों पर क्रमशः अमेरिका (13.24%), ब्रिटेन (9.04%), कनाडा (3.34%) तथा ऑस्ट्रेलिया (3.23%) है। जैसे-जैसे भारत में विदेशी पर्यटकों को आगमन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे हमारी विदेशी मुद्रा के अर्जन | (Foreign Exchange Earnings) में भी इजाफा हो रहा है। इस पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों से समझा जा सकता है। पर्यटन से होने वाला विदेशी मुद्रा का अर्जन जहां वर्ष 2015 में 134844 करोड़ रुपये रहा, वहीं वर्ष 2016 में यह बढ़कर 154146 करोड़ रुपये हो गया। यह बढ़त बनी रही और वर्ष 2017 में विदेशी मुद्रा का अर्जन बढ़कर 177874 करोड़ रुपये हो गया। जबकि वर्ष 2018 में यह आंकड़ा लगभग 2 लाख 2 हजार करोड़ रुपए पहुंच गया। वर्ष 2018 में भारत में 25 लाख पर्यटक ई-वीजा पर भारत आये जो कि 2016 की संख्या 0.69 लाख के मुकाबले काफी अधिक है। जाहिर है, इससे हमारी अर्थव्यवस्था को बल मिल रहा है। 

धीरे-धीरे भारत में चिकित्सा पर्यटन ने भी जड़ें जमानी शुरू कर दी हैं, जिससे हम लाभान्वित हो रहे हैं। भारत में चिकित्सा पर्यटन में अकारण वृद्धि नहीं हो रही है। भारत अपनी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के लिए विश्व में विख्यात है। आधुनिक चिकित्सा में भी भारत में अच्छी प्रगति की है। भारत में अनेक प्रकार के इलाज होते हैं, जो विदेशों की अपेक्षा सस्ते भी पड़ते हैं केरल प्रांत की पंचकर्म चिकित्सा पद्धति काफी मशहूर है। कुछ समय पहले पर्यटन मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर इस पद्धति का विदेशों में प्रचार शुरू किया, जिसके अच्छे परिणाम सामने आए। आज लगभग ढाई लाख से भी अधिक विदेशी पर्यटक प्रतिवर्ष इस पद्धति से लाभान्वित होने के लिए भारत आ रहे हैं। 

वर्ष 1967 में विधिवत पर्यटन एवं नागरिक उदयन मंत्रालय की स्थापना की गई और इसी के साथ इस उद्योग को ऊंचाई देने के प्रयास शुरू हुए। यह संगठित गतिविधि की श्रेणी में आ गया। वर्ष 1991 पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इस वर्ष विदेशी निवेश के लिए पर्यटन को प्राथमिकता का क्षेत्र घोषित किया गया। 

आयुर्वेद के द्वारा कायाकल्प और पुनविन प्राप्ति को लेकर देशी-विदेशी पर्यटकों में पिछले कुछ समय से बढ़ रही रुचि को देखते हए इस प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को पर्यटन का बहुत बड़ा आकर्षण माना जा रहा है। क्रूज कंपनियों से कहा गया है कि वे अपने पोतों को इस सुविधा से लैस करें। कोच्चि बंदरगाह सहित मुंबई, न्यू मंगलौर और मर्मागांव बंदरगाह न्यास संयुक्त रूप से इस अभिनव योजना को साकार रूप दे रहे हैं। इन बंदरगाहों के मध्य ऐसे पर्यटन पोत चलाए जा रहे हैं जिनमें आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवा के द्वारा कायाकल्प और यौवन प्राप्ति के लिए सुयोग्य वैद्य, मालिश करने वाले युवक-युवतियां, औषधियां तथा आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता रहती है। 

चिकित्सा पर्यटन में विदेशियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसे ध्यान में रखकर सरकार प्रयासरत है। जहां चिकित्सा पैकेजों का जमकर विदेशों में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, वहीं चिकित्सा वीजा उदार शर्तों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार द्वारा ई चिकित्सा वीजा (e-Medical Visa) सुविधा शुरू किए जाने के बाद से भारत में चिकित्सा पर्यटन की दृष्टि से आने वालों का सिलसिला और तेज हआ है। यह एक अच्छा संकेत है कि वर्तमान में वैश्विक चिकित्सा पर्यटन बाजार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है। वर्ष 2020 तक इसके 20 प्रतिशत तक पहुंचने का \अनुमान है और तब भारत में चिकित्सा पर्यटन का यह बाजार बिलियन डॉलर का होगा। 

भारत गांवों का देश है और यहां ग्रामीण पर्यटन की संभावनाए अच्छी होना स्वाभाविक है। आज की तनावपूर्ण जिंदगी में गांव में गुजारे पल अनूठी शांति प्रदान करते हैं। यही कारण है कि ग्रामीण पर्यटन के प्रति धीरे-धीरे रुझान बढ़ रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था-‘भारत की आत्मा गांवों में बसती है।’ भारत की इस आत्मा को देखने-समझने तथा यहां की सांस्कृतिक विरासत को साझा करने के लिए भी गांवों की तरफ लौटना जरूरी है और पर्यटन के स्तर पर ऐसा हो भी रहा है। ग्रामीण पर्यटन हमें प्रकृति के करीब भी लाता है। शहरी शोरगुल से अलग हरे-भरे वृक्ष, फसलों से लदे खेत और फलों से भरे वृक्ष, झुंडों में विचरते गाय, भैंस, बकरियों आदि के झुंड, मिट्टी के घरौंदे और छप्पर-छावनी यकीनन कुछ देर के लिए ही सही, हमें शहरी जीवन से दूर ले जाते हैं और शांति का सुखद और मीठा संस्पर्श करवाते हैं। यही बातें पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। भारत में ग्रामीण पर्यटन का श्रीगणेश सर्वप्रथम राजस्थान में हआ। वहां का ‘मांडवा’ नामक गांव, जो कि रेगिस्तानी क्षेत्र में स्थित है, भारत में ग्रामीण पर्यटन का पहला गांव है। इसे राजस्थान की ‘खुली हवा की गली’ भी कहते हैं। अब देशभर में ऐसे कई गांव है, जो देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। भारत में ग्रामीण पर्यटन की अच्छी संभावनाओं को देखते हुए सरकार ने इस तरफ ध्यान देना शुरू किया है। इसके लिए सरकार ने जिलाधिकारियों के नेतृत्व में समितियों का गठन किया है। ये समितियां ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहन की दृष्टि से वातावरण में सुधार, साधनों के विकास और सफाई व स्वच्छता पर विशेष ध्यान दे रही हैं। ये समितियां गांवों की पहचान पर भी विशेष रूप से अपना ध्यान केन्द्रित कर रही हैं। हर राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश से यह कहा गया है कि वे अपने यहां के कार्यक्रमों को बनाते समय एक योजना का निर्धारण ग्रामीण पर्यटन के लिए अवश्य करें। इसमें गांवों की विशेषता को ध्यान में रखकर संयुक्त निरीक्षण के आधार पर पर्यटन विभाग और राज्य केन्द्रशासित सरकारें परियोजनाएं बनाकर उन्हें शुरू कराएं। इसके लिए अधिकतम 50 लाख का बजट स्वीकृत किए जाने की व्यवस्था भी है। साथ ही कुछ शर्ते जुड़ी हैं, जिनके अनुसार गांव व उसके आस-पास के क्षेत्र के विकास के लिए लैंडस्केपिंग, पार्को, चारदीवारी, सड़कों आदि का विकास तथा विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने का प्रावधान है। मैले के निस्तारण, रास्ते में सुविधाओं की व्यवस्था करना तथा पर्यटन के लिए आवश्यक उपकरणों, मसलन, वाटर स्पोर्ट्स व एडवेंचर स्पोर्ट्स से जुड़े खेल उपकरण आदि की खरीदारी करना भी इसमें शामिल है। इन शर्तों के तहत इको फ्रेंडली यातायात साधनों को उपलब्ध करवाना, स्मारकों की देख-रेख किया जाना, स्वागतकक्ष केंद्रों का निर्माण एवं पर्यटकों के रहने-ठहरने आदि की व्यवस्था किया जाना भी शामिल है। 

भारत की इस आत्मा को देखने-समझने तथा यहां की सांस्कृतिक विरासत को साझा करने के लिए भी गांवों की तरफ लौटना जरूरी है और पर्यटन के स्तर पर ऐसा हो भी रहा है। 

देश की पर्यटन नीतियों के तहत ग्रामीण पर्यटन को विशेष रूप से तरजीह दी जा रही है। इस बाबत राष्ट्रीय पर्यटन सलाहकार परिषद ने नीतियों का प्रारूप तैयार किया है। इसमें ग्रामीण क्लस्टरों की पहचान हेतु सलाहकार भी नियुक्त किए गये हैं। इन नीतियों के तहत ‘अतिथि देवो भव’ की भारतीय परंपरा एवं सांस्कृतिक विशिष्टता को प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा इसके लिए जन-जागृति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ढांचागत विकास के अन्तर्गत ग्रामीण पर्यटन के लिए तैयार की गई रणनीति में पर्यटन उत्पादों के रूप में विकास हेतु 5 से 7 गांवों के क्लस्टरों में स्थानीय शिल्प की पहचान करना शामिल है, ताकि उस क्लस्टर में लोगों में पर्यटन के बारे में जागरूकता बढ़े। इसमें दस्तकारी बाजार एवं हाट के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की बिक्री करना भी शामिल है। बुनियादी ढांचे एवं स्वच्छता के विकास में सहायता तथा आवासीय सुविधाएं विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारत में ग्रामीण पर्यटन की पहुंच को बढ़ाने के लिए ग्रामीण विकास के विभागों तथा केंद्र व राज्य सरकारों के बीच समन्वय भी बढ़ाया जा रहा है, जो कि आवश्यक भी हैं|

भारत में पर्यटन को क्षति पहुंचाने वाले कुछ नकारात्मक पहल भी हैं। भारत में पनपे आतंकवाद-नक्सलवाद, यहां की अस्वास्थ्यकर स्थितियों, आम जन-जीवन में व्याप्त अराजकता और भ्रष्टाचार की लूज-पूंज कानून-व्यवस्था ने पर्यटकों का मोह भंग किया है। भारत को लेकर विदेशी पर्यटकों में एक तरह की असुरक्षा की भावना देखने को मिलती है। भारत में धार्मिक पर्यटन स्थलों की दशा बहत अच्छी नहीं है। अंध आस्था और पाखंड के कारण अक्सर यहां आने वाले पर्यटकों को बहुत कड़वे अनुभव होते हैं। धार्मिक पर्यटन स्थलों पर देखी जाने वाली भिखारियों की फौज जहां विदेशियों के बीच हमारे देश की छवि को नकारात्मक बनाती हैं, वहीं ये भिखारी देशी-विदेशी पर्यटकों को तंग करने में भी पीछे नहीं रहते हैं। इस तरह की समस्याएं भारतीय पर्यटन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं, जिन्हें दूर किए जाने की आवश्यकता है। 

इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत में पर्यटन ने एक महत्त्वपूर्ण उद्योग के रूप में अपने पांव जमा लिए हैं, तथापि अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। भारत में ‘पर्यटकों का स्वर्ग’ बनने की व्यापक क्षमताएं और विशिष्टताएं हैं। पर्यटन उद्योग को और व्यवस्थित स्वरूप देकर तथा पर्यटन से जुड़ी आदर्श स्थितियां निर्मित कर हम भारत को पर्यटकों का स्वर्ग बना सकते हैं। यह काम सिर्फ सरकारी स्तर पर संभव नहीं है, स्थानीय सहयोग के साथ व्यावहारिक एवं भावनात्मक शुचिता भी नितांत आवश्यक है। 

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