लोक प्रशासन में पारदर्शिता की आवश्यकता पर निबंध |Essay on the need for transparency in public administration

लोक प्रशासन में पारदर्शिता की आवश्यकता पर निबंध |Essay on the need for transparency in public administration

लोक प्रशासन में पारदर्शिता की आवश्यकता पर निबंध |Essay on the need for transparency in public administration

प्रस्तावना 

देश में लोक प्रशासन पर मुख्य रूप से सरकार की नीतियों के कार्यान्वयन एवं समाज में कानून तथा व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व रहा है, किन्तु आज लोक प्रशासकों की उत्तरदायित्वहीनता एवं उसके भ्रष्ट आचरण के कारण सम्पूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता एवं योग्यता पर प्रश्न-चिह्न लग चुका है. इन परिस्थितियों में लोक प्रशासन में पारदर्शिता का मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है.

लोक प्रशासन एवं उसमें पारदर्शिता का अर्थ 

लोक प्रशासन दो शब्दों ‘लोक’ और ‘प्रशासन’ से मिलकर बना है. जहाँ ‘लोक’ शब्द का अर्थ है-समस्त जनता. यहाँ ‘लोक’ शब्द का विश्लेषण इसे सरकारी कार्यों तक सीमित कर देता है और निजी संस्थाओं के वैयक्तिक प्रशासन से अलग कर देता है. चूँकि सरकारी कार्य लोकहित को ध्यान में रखकर किए जाते हैं, अतः सरकारी कार्यों के प्रशासन को लोक प्रशासन कहा जाता है. इस रूप में ग्राम पंचायत, ग्राम सभा, जिला परिषद् आदि सभी संस्थाएँ लोक प्रशासन के विभिन्न अंग हैं. 

देश में लोक प्रशासन सम्पूर्ण प्रशास-निक व्यवस्था की रीढ़ है. साथ ही, आज सामाजिक-आर्थिक न्याय एवं परिवर्तन का मुख्य साधन है. 

लोक प्रशासन में पारदर्शिता का अर्थ प्रशासनिक प्रक्रियाओं के विधिसम्मत, भ्रष्टाचार रहित एवं लोकतांत्रिक होने से है.

लोक प्रशासन में पारदर्शिता की आवश्यकता क्यों? 

आज देश में निम्नलिखित कारणों से लोक प्रशासन में पारदर्शिता की आवश्यकता 

(i) लोक प्रशासन को अधिक-से-अधिक उत्तरदायी बनाने के लिए- आज देश में आम आदमी और लोक प्रशासकों के बीच संवादहीनता की स्थिति व्याप्त है. आम आदमी की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है. लोक प्रशासक उनकी समस्याओं को सुलझाने के बजाए उन्हें दबाने का प्रयास अधिक करते हैं. उदाहरणार्थ-किसी बलात्कार, डकैती के सम्बन्ध में थाना में FIR दर्ज करवाना हो, जिलाधिकारी से मिलना हो, तो यह सब सरल नहीं होता है. विशेषकर तब, जब इन घटनाओं में किसी प्रभावशाली व्यक्ति, नेता आदि का हाथ हो. ऐसे में, आम जनता को मजबूरन घेराव, जुलूस आदि का मार्ग अपनाना पड़ता है. आज लोक प्रशासकों का मुख्य कार्य राजनेताओं, उनके सम्बन्धियों, आदि की सुरक्षा एवं उनके आराम का ध्यान रखना मात्र रह गया है. फलस्वरूप आज सम्पूर्ण प्रशासन से जनता का विश्वास उठ चुका है. 

अतः आवश्यकता है लोक प्रशासन को अधिक-से-अधिक पारदर्शी बनाने की, जिससे प्रशासन की कार्य-प्रणाली दोषरहित हो सके और लोक प्रशासक प्रशासन एवं जनता के प्रति जवाबदेह बन सकें और उसका विश्वास अर्जित कर सकें. 

(ii) भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए- आज लोक प्रशासन में सर्वत्र भ्रष्टाचार व्याप्त है. सरकारी कार्यालयों में बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं होता है. उदाहरणार्थ यदि स्वरोजगार के लिए ऋण लेना हो तो उसमें कमीशन देना अनिवार्य है. यदि गाड़ी का लाइसेंस बनवाना हो, तो बिना रिश्वत दिए काम नहीं होगा. आदि. 

इसके अलावा मंत्रीगण अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी खजानों को लूट रहे हैं. गाँवों में पंचायत के अधिकारीगण वहाँ की गरीब एवं निरक्षर जनता के विकास कार्यों के पैसों का, ऊपर के प्रशासन से मिलकर, गबन कर जाते हैं. 

अतः आज लोक प्रशासन में वित्तीय लेन-देन के मामलों में विशेष पारदर्शिता की आवश्यकता है. इससे प्रशासन में भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा. साथ-ही स्वच्छ कार्य संस्कृति का विकास होगा और विकास कार्यों का लाभ जनता को मिल सकेगा. 

(ii) सरकारी कार्यों के शीघ्र निष्पादन के लिए- देश में सरकारी दफ्तरों में काम करने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल एवं विलम्बकारी होती है. यहाँ इतने नियमों एवं 

औपचारिकताओं का जाल बिछा हुआ है कि कोई भी कार्य शीघ्रता से नहीं होता है. इस ‘लालफीताशाही के कारण जहाँ लोगों में सन्देह बढ़ता है वहीं भ्रष्टाचार की सम्भावना भी बढ़ जाती है. 

अतः सरकारी कार्यों के तीव्रगति से निष्पादन हेतु लोक प्रशासन में पारदर्शिता आवश्यक है.

वर्तमान व्यवस्था 

वर्तमान में देश में प्रशासन को पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार रहित बनाए रखने के लिए न्यायपालिका के अलावा सी.बी.आई. सतर्कता आयोग जैसी विभिन्न एजेंसियाँ कार्यरत हैं, किन्तु देश में न्यायिक प्रक्रिया इतनी जटिल, खर्चीली एवं विलम्बकारी है कि आम आदमी अपनी शिकायतों को लेकर न्यायालय में नहीं जाता है. वहीं विभिन्न सरकारी एजेंसियों के कार्यों को सम्बन्धित मंत्री प्रभावित करते हैं. अतः इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है. वर्तमान में केन्द्र में स्थित भाजपा की गठबंधन सरकार लोकपाल की नियुक्ति एवं उसके अधिकार क्षेत्र में प्रधानमंत्री को शामिल करने की वकालत कर रही है, जो बिल्कुल सही है. इससे प्रशासन में पारदर्शिता आएगी. 

उपाय 

लोक प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए निम्नलिखित उपाय सुझाए जा सकते हैं 

(i) देश में प्रशासन को प्रत्येक स्तर पर अधिक-से-अधिक विकेन्द्रित किया जाना चाहिए. 

(ii) लोक प्रशासन को विभिन्न स्तरों पर नियमित रूप से जनता की इच्छाओं एवं समस्याओं का पता लगाते रहना चाहिए. 

(iii) सरकारी दफ्तरों में जारी ‘लाल-फीताशाही’ को न्यूनतम किया जाना चाहिए. 

(iv) प्रत्येक मंत्री एवं सरकारी दफ्तरों में कार्यरत् अधिकारियों को अपनी आय एवं सम्पत्ति का वार्षिक विवरण सार्वजनिक करना चाहिए. 

(v) भ्रष्ट एवं अनुत्तरदायी अधिकारियों, मंत्रियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए तथा गबन किए गए धन की वसूली के लिए आवश्यक कानून बनाए जाने चाहिए. 

(vi) भ्रष्टाचार की जाँच करने वाली विभिन्न सरकारी एजेंसियों को मंत्रियों के नियंत्रण से मुक्त कर स्वायत्त संस्था का रूप प्रदान किया जाना चाहिए. साथ ही, देश में न्यायिक प्रक्रिया को सरल एवं मितव्ययी बनाया जाना चाहिए.

उपसंहार 

यदि देश में लोक प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए प्रभावी कदम तुरन्त न उठाए गए, तो सम्पूर्ण प्रशासन के प्रति जनता में व्याप्त असंतोष समाज में अराजकता की स्थिति पैदा कर देगा. 

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