आतंकवाद पर निबंध-Essay on Terrorism in Hindi

आतंकवाद पर निबंध

आतंकवाद पर निबंध

आतंकवाद एक गंभीर वैश्विक समस्या है। पूरी दुनिया इसके प्रभाव क्षेत्र के अंतर्गत है। चाहे ओसामा बिन लादेन हों या परवेज मुशर्रफ-वे किसी न किसी रूप में आतंकवाद से जुड़े रहे हैं। आतंकवादी गतिविधियां विश्व में कब और कहां अपने अंजाम से मानव को मौत देंगी, यह कहना मुश्किल है। 

अब यहां यह प्रश्न उठता है कि आखिर आतंकवाद का जन्म क्यों होता है? ऐसे कौन-कौन से कारक हैं, जिनके चलते आतंकवाद का प्रसार होता है? 19वीं शताब्दी के मध्य तक आतंकवाद को प्रश्रय देने वाले प्रायः वे लोग होते थे, जिनके हाथों में सत्ता की नकेल होती थी। लेकिन 20वीं शताब्दी के आगमन के साथ-साथ आतंकवाद में बदलाव दिखाई पड़ने लगा।। 

सांप्रदायिकता, जातीय वैमनस्य, क्षेत्रीयता और आर्थिक वैषम्य से उत्पन्न वर्ग-संघर्ष की भावना से बुरी तरह प्रभावित तथा बिकाऊ निष्ठा वाले अपने ही देश के कुछ व्यक्ति आतंकवादी संस्थाओं का गठन करके अपने ही राष्ट्र को विखंडित करने का प्रयास करते हैं। भारतीय संघ के अनेक मुस्लिम संगठन, सिक्खों के विभिन्न आतंकवादी दल तथा मिजोरम, नगालैंड, असम, त्रिपुरा एवं अरुणाचल प्रदेश के ईसाइयत से प्रभावित अनेक उग्रवादी संगठन इनमें प्रमुख हैं। विदेशी शासन से मुक्ति की कामना करने वाले राष्ट्र के कुछ नवयुवक भी आतंकवाद का उपयोग कारगर हथियार के रूप में करते हैं। आतंकवादी किसी देश की सीमाओं पर अधिकार करने अथवा व्यक्तिगत शत्रुता के चलते किसी व्यक्ति विशेष की हत्या में रुचि नहीं दिखाते। उनके द्वारा की जाने वाली हत्याओं, अपहरण एवं तोड़-फोड़ आदि का उद्देश्य तथाकथित विरोधी राष्ट्र सरकार, समाज या जाति के मन में दहशत पैदा करना होता है। 

भारत में आतंकवादी शस्त्र का उपयोग सर्वप्रथम सन 1905 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान किया गया। उस समय इस आंदोलन का लक्ष्य था–विदेशी शासन से मुक्ति तथा भारत की अखंडता, सम्मान और मर्यादा की रक्षा। उस युग में आतंकवादियों की दृष्टि में भारत ही भगवान था। उसके मुक्ति यज्ञ में अपनी कुर्बानी देना ही उनका सबसे बड़ा कर्म और धर्म था। 

लेकिन दुर्भाग्य से स्वाधीनता प्राप्ति के बाद जो आतंकवादी आंदोलन उठ खड़े हुए, उनमें से अधिकांश का उद्देश्य भारत को विखंडित करके इसे बाल्कन प्रदेश बनाना था। उनके संचालक ऐसे लोग रहे, जो भारत की प्रगति से जलने वाले, घोषित शत्रुओं द्वारा गुमराह किए गए, सांप्रदायिकता एवं क्षेत्रीयता की भावना से बुरी तरह ग्रस्त, संकुचित दृष्टि वाले तथा अदूरदर्शी व्यक्ति रहे हैं। 

सन 1947 को भारत विखंडित हुआ और स्वाधीन भारत में 1950-51 से ही पूर्वोत्तर प्रदेश की अनेक ईसाई बहुल आदिवासी जातियों ने स्वतंत्र राष्ट्र की मांग लेकर आतंकवादी संगठन बना लिया। लगभग 40 वर्षों की अवधि में वहां कई बार सैनिक कार्यवाही हुई। अंतत: स्थानीय जनता की मांगों की तुष्टि के लिए भारत सरकार ने नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश राज्य का गठन करके आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सफलता प्राप्त कर ली। लेकिन त्रिपुरा के ए.टी.टी.एफ. और असम के उल्फा जैसे अनेक आतंकवादी संगठन विदेशी सहायता के बल पर वहां आज भी कहर ढा रहे हैं। पूर्वांचल में व्याप्त आतंकवाद के मूल में क्षेत्रीय जनता की निर्धनता का भी हाथ है। लेकिन पश्चिमोत्तर भारत को हिंसा के तांडव का रंगमंच बनाने वाले आतंकवाद की आधारशिला विखंडित सांप्रदायिकता और विदेशी षड्यंत्र है। 

पाकिस्तान का जन्म हिंदू बहुल भारत के प्रति घृणा और वैमनस्य के कारण हुआ था, अत: यह अपने जन्मकाल से ही भारत को दुर्बल बनाने का हर संभव प्रयास करता रहा है। तीन युद्ध में भारत से बुरी तरह हार जाने और पूर्वी पाकिस्तान के बांग्लादेश में परिवर्तित हो जाने के बाद भी उसकी समझ में यह बात नहीं आई कि युद्ध भूमि में वह भारत का कुछ नहीं बिगाड़ सकता। 

भारत सरकार ने पश्चिमी क्षेत्र से आतंकवाद मिटाने के लिए जो पुलिस और सैनिक अभियान चलाया है, उसके चलते आतंकवादियों को गहरी क्षति उठानी पड़ी है। उनके अधिकांश नेता मारे जा चुके हैं। उनका मनोबल टूट चुका है, फिर भी पाकिस्तानी दबाव के कारण वे बाज नहीं आ रहे हैं। 

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