ट्‌वेण्टी- 20 क्रिकेट पर निबंध | Essay on T-20 Cricket in Hindi

Essay on T-20 Cricket in Hindi

ट्‌वेण्टी- 20 क्रिकेट पर निबंध |Essay on T-20 Cricket in Hindi

समय के साथ-साथ खेल में भी परिवर्तन आता जा रहा है। किसी जमाने में टेस्ट मैचों की लोकप्रियता चरम पर थी। छह दिनों तक खेल चलता रहता था। फिर साठ-साठ ओवरों का खेल प्रारंभ हुआ। इसके बाद इसको पचास पचास ओवर कर दिया गया। सन 2008 क्रिकेट के इतिहास में बहुत रोमांच का वर्ष रहा है। इस वर्ष बीस-बीस ओवरों का खेल प्रारंभ हुआ। 

बीस-बीस ओवरों के खेल के कारण क्रिकेट के क्षेत्र में मानो क्रांति आ गई। गत वर्ष बीस-बीस ओवरों का विश्व कप महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने जीता। यह खेल बहुत रोमांचक और संघर्षपूर्ण रहा। 

भारत में क्रिकेट को बढ़ावा देने का काम जितना कपिल देव ने किया, उतना काम शायद ही किसी ने किया हो। कपिल देव ने सन 2008 में इंडियन क्रिकेट लीग (आई.सी.एल.) का गठन किया। एक उद्योगपति सुभाष चंद्रा ने इस कंपनी में पैसा लगाया। इंडियन क्रिकेट लीग में उन सभी खिलाड़ियों को खेलने का अवसर दिया गया, जो भाई-भतीजावाद के कारण भारतीय टीम में चयनित नहीं हो पाते थे। कपिल देव के इस कदम का जहां क्रिकेट जगत ने स्वागत किया, वहीं बोर्ड ऑफ क्रिकेट कंट्रोल इंडिया (बी.सी.सी.आई.) ने उनको नेशनल क्रिकेट अकादमी से हटा दिया तथा उनकी पेंशन भी बंद कर दी। उसे यह लगा कि कपिल देव उसके वजूद को चुनौती दे रहा है, जबकि कपिल देव ने क्रिकेट और क्रिकेटरों का भला ही किया था। 

आई.सी.एल. की देखा-देखी बी.सी.सी.आई. ने भी इंडियन प्रीमियर लीग (आई.पी.एल.) की शुरुआत की। बी.सी.सी.आई. ने बीस-बीस ओवरों के क्रिकेट के लिए भारत में आठ टीमों का गठन किया। इन टीमों में देशी विदेशी सभी खिलाड़ी थे। पैंतालिस दिनों तक मैच होते रहे। बीस-बीस ओवर का रोमांच अपने शिखर पर था। खिलाड़ियों को ऊंची बोली देकर खरीदा गया था। शेनवार्न की कप्तानी में ‘राजस्थान रॉयल्स’, महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में ‘चेन्नई सुपर’, वीरेंद्र सहवाग की कप्तानी में ‘दिल्ली डेयर डेविल्स’ तथा युवराज की कप्तानी में ‘किंग्स इलेवन पंजाब’ सेमी फाइनल में पहुंची। दिल्ली एवं पंजाब की टीमें सेमी फाइनल में हार गईं। फाइनल ‘राजस्थान रॉयल्स’ तथा ‘चेन्नई सुपर’ के बीच हुआ। सबसे कमजोर समझी जाने वाली टीम ‘राजस्थान रॉयल्स’ ने ‘चेन्नई सुपर’ को रोमांचक मुकाबले में हराकर फाइनल जीत लिया। 

बीस-बीस ओवरों वाले रोमांचकारी मैच में प्रत्येक बॉलर को अधिक से अधिक चार-चार ओवर करने पड़ते हैं। इस खेल में धीमी गति से खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए कोई जगह नहीं है। यह खेल केवल 90-90 मिनट का होता है। इसमें संभलने के लिए खिलाड़ी के पास समय नहीं होता। बस, करो या मरो की स्थिति होती है। यह खेल भले ही बीस-बीस ओवरों का है, परंतु इसने खिलाड़ियों को थका दिया है। यह खेल क्रिकेट की मूल भावना के साथ एक खिलवाड़ सा लगता है। इसमें पैसा और शोहरत बहुत है, परंतु क्रिकेट का असली खेल न जाने कहां दबकर रह गया है? 

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