सतत विकास लक्ष्य पर निबंध | Essay on Sustainable Development Goals

सतत विकास लक्ष्य पर निबंध

सतत विकास लक्ष्य पर निबंध | Essay on Sustainable Development Goals अथवा  सतत विकास लक्ष्य (SDGs), 2015-2030 

“इस महत्त्वपूर्ण सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के सभी 1193 सदस्य देशों में से 150 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों शासनाध्यक्षों तथा शेष देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया।” 

25-27 सितंबर, 2015 के मध्य संयुक्त राष्ट्र महासभा के 70वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सतत विकास सम्मेलन (UN Sustainable Development Summit), 2015′ का आयोजन किया गया। इस महत्त्वपूर्ण सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों में से 150 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों/ शासनाध्यक्षों तथा शेष देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। संयुक्त राष्ट्र के इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय (Theme) था-2015 : टाइम फॉर ग्लोबल एक्शन फॉर पीपुल एंड प्लैनेट।’ 

“संयुक्त राष्ट्र सतत विकास सम्मेलन, 2015 के दौरान 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के सभी सदस्यों द्वारा अगले 15 वर्षों के लिए सतत विकास हेतु एजेंडे ‘ट्रांसफॉर्मिंग ऑवर वर्ल्ड : दि 2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (Transforming Our World : The 2030 Agenda for Sustainable Development) ont औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया।” 

संयुक्त राष्ट्र सतत विकास सम्मेलन, 2015 के दौरान 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के सभी सदस्यों द्वारा अगले 15 वर्षों के लिए सतत विकास हेतु एजेंडे ‘ट्रांसफॉर्मिंग ऑवर वर्ल्ड : दि 2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (Transforming Our World : The 2030 Agenda for Sustainable Development) को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया। इसके तहत वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र सहस्त्राब्दी सम्मेलन में निर्धारित ‘सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों’ (MDGs : Millennium Development Goals: जिनकी अवधि वर्ष 2015 तक निर्धारित थी) के स्थान पर 2015-2030 अवधि के लिए नए ‘सतत विकास लक्ष्य’ (SDGs : Sustainable Development Goals) निर्धारित किए गए हैं। 

“‘ट्रांसफॉर्मिंग ऑवर वर्ल्ड’ शीर्षक वाले इस सतत विकास एजेंडे के तहत कुल 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को शामिल किया गया है जिन्हें वर्ष 2015 से 2030 की अवधि में प्राप्त किया जाना है।” 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 पश्चात विकास एजेंडे या सतत विकास लक्ष्यों पर सर्वप्रथम जून, 2012 में रियो डि जेनेरियो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सतत विकास सम्मेलन (Rio + 20; जो कि 1992 में रियो में ही संपन्न ‘पृथ्वी सम्मेलन’ के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुआ था) में औपचारिक चर्चा हुई थी तथा इस पर अंतर्सरकारी वार्ताएं जनवरी, 2015 में प्रारंभ हुईं और अंततः 2 अगस्त, 2015 को संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों द्वारा सतत विकास के अगले 15 वर्षों के एजेंडे पर सहमति हुई जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा के 70वें सत्र के दौरान संपन्न सम्मेलन में औपचारिक रूप से अपनाया गया है। 

‘ट्रांसफॉर्मिंग ऑवर वर्ल्ड’ शीर्षक वाले इस सतत विकास एजेंडे के तहत कुल 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को शामिल किया गया है जिन्हें वर्ष 2015 से 2030 की अवधि में प्राप्त किया जाना है। इन 17 सतत विकास लक्ष्यों के तहत 169 विभिन्न लक्ष्य और 304 तत्संबंधी संकेतकों को भी शामिल किया गया है। 

इस बार के सम्मेलन में सतत विकास लक्ष्य (SDGs) निर्धारित किए गए जिनका विषयवार स्पष्टीकरण इस प्रकार है 

1.निर्धनता : सभी स्थानों से सभी प्रकार की निर्धनता को समाप्त करना।

2. भूख एवं खाद्य सुरक्षा : भूख (Hunger) की समाप्ति, खाद्य सुरक्षा एवं बेहतर पोषण प्राप्त करना तथा सतत कृषि को बढ़ावा देना।

3. स्वास्थ्य : स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करना तथा सभी लोगों के लिए हर आयु में अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देना।

4. शिक्षा : समावेशी और समुचित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना और सभी के लिए आजीवन अधिगम (Learning) अवसरों को बढ़ावा देना।

5.लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तिकरण : लैंगिक समानता हासिल करना तथा सभी महिलाओं एवं लड़कियों का 

सशक्तिकरण।

6. जल एवं स्वच्छता : सभी के लिए जल एवं स्वच्छता (Sanitation) का सतत प्रबंधन और उपलब्धता सुनिश्चित करना।

7. ऊर्जा : सभी के लिए वहनीय, विश्वसनीय, सतत और आधुनिक ऊर्जा तक पहुंच सुनिश्चित करना।

8. आर्थिक संवृद्धि : सभी के लिए पूर्ण एवं उत्पादक रोजगार और समुचित कार्य सहित निरंतर, समावेशी और सतत 

आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देना।

9. अवसंरचना, औद्योगीकरण : प्रत्यास्थी (Resilient) अवसंरचना का निर्माण करना, समावेशी और सतत औद्योगीकरण को बढ़ावा देना तथा नवप्रवर्तन को प्रोत्साहित करना।

10. असमानता : राष्ट्रों के बीच और उनके भीतर असमानता (Inequality) में कमी लाना। 

11.शहर : शहरों और मानव बस्तियों को समावेशी, सरक्षित प्रत्यास्थी एवं सतत बनाना।

12. सतत उपभोग एवं उत्पादन : सतत उपभोग एवं उत्पादन प्रतिमान (Pattems) सुनिश्चित करना।

13. जलवायु परिवर्तन : जलवायु परिवर्तन और इसके दुष्छाभावों से निपटने हेतु अविलंब कदम उठाना।

14. महासागर : सतत विकास के लिए महासागरों, सागरों एवं सामुद्रिक संसाधनों का संपोषणीय उपयोग एवं संरक्षण करना।

15. जैव विविधता, वन, मरुस्थलीकरण : पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण, पुनर्स्थापना और संपोषणीय उपयोग को बढ़ावा देना, वनों का सतत रूप से प्रबंधन, मरुस्थलीकरण से निपटना, भूक्षरण को रोकना तथा इसका व्युत्क्रमण और जैव विविधता हानियों पर रोक लगाना।

16. शांति एवं न्याय : सतत विकास हेतु शांतिपूर्ण एवं समावेशी समाजों को बढ़ावा देना, सभी के लिए न्याय तक पहुंच उपलब्ध कराना तथा सभी स्तरों पर प्रभावी, उत्तरदायी एवं समावेशी संस्थाओं का निर्माण करना।

17. भागीदारियां : सतत विकास हेतु वैश्विक भागीदारी का पुनरुद्धार और क्रियान्वयन के तरीकों को सुदृढ़ करना।

इसके पूर्व सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य (MDGs) निर्धारित किए गए थे जो कि आठ अंतर्राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों का समूह है जिन्हें वर्ष 2000 के संयुक्त राष्ट्र सहस्त्राब्दि सम्मेलन में तत्कालीन सभी 189 सदस्य राष्ट्रों द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसके तहत वर्ष 2015 तक निम्नलिखित अंतर्राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को प्राप्त किए जाने पर सहमति हुई थी। इन आठ लक्ष्यों में-1. अतिशय निर्धनता और भूख का उन्मूलन, 2. सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा की उपलब्धि, 3. लैंगिक समानता को संवर्धित करना, 4. बाल मृत्यु दर को कम करना, 5. मातृत्व स्वास्थ्य में सुधार करना, 6. एचआईवी/एड्स, मलेरिया और अन्य रोगों का मुकाबला करना, 7. पर्यावरणीय सततता सुनिश्चित करना, 8. विकास हेतु एक वैश्विक भागीदारी विकसित करना शामिल है। 

विदित है कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा हाल हा अंगीकृत वर्ष 2030 तक के लिए सतत विकास लक्ष्यों (SDUR) में उपर्युक्त आठों सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्यों को शामिल किया था। 

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