छात्र और राजनीति पर निबंध-Essay on Student and Politics

छात्र और राजनीति पर निबंध

छात्र और राजनीति पर निबंध

छात्र जीवन मानव का स्वर्णिम काल है। इस काल में अर्जित ज्ञान और आचरण ही मनुष्य के भावी जीवन की आधारशिला होते हैं। छात्र जीवन में विद्यार्थी तरह-तरह की कल्पनाएं करते हैं, जबकि इच्छाओं को मूर्त रूप देने के लिए कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है। इसलिए जो भी तत्व विद्योपार्जन के मार्ग में बाधक हो, उससे विद्यार्थियों को दूर रहना चाहिए। जो व्यक्ति इस स्वर्णिम काल को ज्ञानार्जन में न लगाकर निरर्थक कार्यों में नष्ट करता है, उसे आजीवन दुख, अपमान एवं तिरस्कार के आंसू पीने पड़ते हैं। समय बीत जाने पर पश्चाताप करने से उसे कुछ नहीं प्राप्त होता- 

का बरखा जब कृषि सुखाने। 

समय चूकि पुनि का पछताने॥

किसी देश के छात्र ही उसके भावी कर्णधार हैं। वे राष्ट्र की आशाओं के सुमन होते हैं। आगे चलकर वही देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए छात्रों को राजनीति शास्त्र का भी ज्ञान होना चाहिए, अन्यथा स्वार्थी तत्वों द्वारा छात्र शक्ति के दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है। वस्तुतः राजनीति का अर्थ है राज संचालन की नीति! लेकिन वर्तमान में राजनीति सिर्फ राज है, उसमें नीति तो लेशमात्र भी नहीं है। आज राजनीति का उद्देश्य सिर्फ सत्ता हासिल करना, अधिक से अधिक धन कमाना तथा लंबे समय तक सत्ता से चिपके रहना है। ऐसे राजनीतिज्ञ विद्यार्थियों को सब्जबाग दिखाकर अपना उल्लू सीधा करते देखे गए हैं। इनके बहकावे में आकर विद्यार्थी स्कूलों, कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में हड़ताल तथा तोड़-फोड़ करते हैं। वे रात्रिकाल पढ़ने के बजाय दीवारों पर पोस्टर चिपकाते और नारे लिखते हैं। 

चुनाव के दिनों में इन मासूम छात्रों से बूथ कब्जा भी करवाया जाता है। राजनेता अपने लाभ के लिए छात्रों द्वारा बस, रेल एवं अन्य सरकारी संपत्तियों को भी नष्ट करवाते हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती है और उनमें अनुशासनहीनता की प्रवृत्ति बढ़ती है। साथ ही साथ राष्ट्र की संपत्ति का नुकसान भी होता है। आज राजनीति रूपी विष-वल्लरी इस प्रकार छात्रों के बीच फैल रही है कि अब तो महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में छात्र संघ का गठन भी दलगत राजनीति के आधार पर कराया जाता है। 

कहने का तात्पर्य यह है कि छात्र राजनीति से बिल्कुल अलग रहें। छात्रों के लिए राजनीति पूर्णतः वर्ण्य है-ऐसी बात नहीं है। छात्रों को राजनीति के व्यावहारिक पक्ष पर दृष्टि रखनी चाहिए, क्योंकि आज का भारत कल उन्हीं का है। छात्रों को विश्व मंच पर घटने वाली प्रमुख राजनीतिक घटनाओं तथा देश की राजनीति पर नजर रखनी चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम में देश के छात्र आगे थे। छात्रों में जोश होता है। जोश के कारण ही उनमें कुर्बानी का जज्बा पैदा होता है। आजादी की लड़ाई में अनेक लोग छात्र जीवन में ही क्रांतिकारी बने थे। 

छात्रों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर विश्लेषणात्मक दृष्टि रखनी चाहिए। उन्हें यह विश्लेषण करना चाहिए कि अमेरिका परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर हेतु भारत पर क्यों दबाव बनाए हुए है। बाबरी मस्जिद के ध्वस्त होने के कारणों और परिणामों का क्या प्रभाव पड़ा? इसके लिए समय निकालकर उन्हें स्तरीय पत्रिकाओं का अध्ययन करना चाहिए। लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह कार्य उनके मूल कार्य में बाधक न बन जाए। विद्यार्थियों को यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि उनका मूल कार्य विद्योपार्जन ही है। इतिहास गवाह है कि हमारे देश में जितने सफल राजनेता हुए हैं, वे सभी अपने छात्र जीवन में अध्ययन के प्रति सजग थे। अत: छात्रों द्वारा पढ़ाई-लिखाई के साथ साथ सकारात्मक राजनीति में हिस्सा लेना कोई बुरी बात नहीं है। 

विद्यार्थी वर्ग एक ऐसा वर्ग है, जो देश के अंदर किसी प्रकार की राजनीतिक हलचल का मूकदर्शक नहीं रह सकता। अस्तु छात्र राजनीतिक गतिविधियों में अवश्य भाग लें, लेकिन किसी दलगत राजनीति से प्रेरित होकर राजनीति में हिस्सा न लें। दलगत राजनीति से प्रेरित होने पर छात्र शक्ति का क्षरण होता है। छात्रों की राजनीति के मूल में तटस्थ भाव होना चाहिए। लोकहित के लिए छात्रों का संघर्षरत होना उचित है, लेकिन दलगत राजनीतिक मंत्र लेकर राजनीति करना छात्रों द्वारा छात्र शक्ति का दुरुपयोग करना है। अतः ध्यान रहे कि छात्र राजनीति से विमुख न हों, लेकिन राजनीति से प्रेरित भी न हों।

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