भुखमरी पर निबंध और भाषण – Essay and Speech on Starvation in Hindi

भुखमरी पर निबंध

भुखमरी पर निबंध और भाषण – Essay and Speech on Starvation in Hindi | शून्य भुखमरी (Zero Hunger) 

भूख और भुखमरी एक त्रासदी है और सभ्य समाज के माथे पर कलंक जैसी है। भूख से मरना भुखमरी है। लगातार भूख से जूझने के बाद भुखमरी की स्थिति जन्म लेती है, जिसमें लोग भूख से दम तोड़ने  लगते हैं। खाद्य सुरक्षा का अभाव, गरीबी, दुर्भिक्ष और प्राकृतिक आपदाएं आदि वे कारण हैं, जिनसे भूख और भुखमरी की समस्या भयावह और विकराल होती है। चिकित्सकीय संदर्भो में भूख के कारण (पर्याप्त भोजन न मिलने की स्थिति) विटामिन, पोषक तत्वों और ऊर्जा अंतर्ग्रहण की गंभीर कमी पैदा होती है। यह कुपोषण का सबसे चरम रूप होता है, जिससे होने वाली मौत को भुखमरी के रूप में अभिहित किया जाता है। 

चिकित्सकीय संदर्भो में भूख के कारण ( पर्याप्त भोजन न मिलने की स्थिति) विटामिन, पोषक तत्वों और ऊर्जा अंतर्ग्रहण की गंभीर कमी पैदा होती है। यह कुपोषण का सबसे चरम रूप होता है, जिससे होने वाली मौत को भुखमरी के रूप में अभिहित किया जाता है। 

भुखमरी एक वैश्विक समस्या है, यानी यह विश्वव्यापी समस्या है। दुनिया में हर व्यक्ति का पेट भरने लायक पर्याप्त भोजन मौजूद होने के बावजूद आज हर नौ में से एक व्यक्ति भूखा रहता है। इन लाचार लोगों में से दो-तिहाई एशिया में रहते हैं। यदि हम सही ढंग से खाद्यान्न सुरक्षा पर ध्यान न दे पाए तो वर्ष 2050 तक दुनिया भर में भूख के शिकार लोगों की संख्या दो अरब तक पहुँच जाएगी। वैश्विक भुखमरी सूचकांक, 2018 से पता चलता है कि दक्षिण एशिया और सहारा दक्षिण अफ्रीका में भुखमरी का स्तर गंभीर बना हुआ है। 

भूख की विकरालता दक्षिण एशिया में कुछ ज्यादा ही है। यहाँ के 28.1 करोड़ अल्पपोषित लोगों में भारत की 40% आबादी शामिल है। इस संदर्भ में वैश्विक भुखमरी सूचकांक, 2018 पर नजर डाल लेना उचित होगा, जिसमें दुनिया के 119 देशों में भारत 103वें स्थान पर है। भारत दुनिया के उन 45 देशों में शामिल है, जहाँ भुखमरी काफी गंभीर स्तर पर है। वर्ष 2017 में इस सूचकांक में भारत का स्थान 100वां था, जबकि वर्ष 2018 में वह और नीचे 113वें पायदान पर पहुँच गया। इस सूचकांक में भारत का स्थान अपने कई पड़ोसी देशों से भी नीचे है। इस भूखमरी सूचकांक में जहां चीन 25वें स्थान पर है, वहीं नेपाल 72वें, म्यांमार 68वें, श्रीलंका 67वें और बांग्लादेश 86वें स्थान पर हैं, जबकि पाकिस्तान भारत से तीन पायदान नीचे 106वें स्थान पर है। 

भूख की विकरालता दक्षिण एशिया में कुछ ज्यादा ही है। यहाँ के 28.1 करोड़ अल्पपोषित लोगों में भारत की 40% आबादी शामिल है। इस संदर्भ में वैश्विक भुखमरी सूचकांक, 2018 पर नजर डाल लेना उचित होगा, जिसमें दुनिया के 119 देशों में भारत 103वें स्थान पर है। 

भूखमरी की विश्वव्यापी समस्या को ध्यान में रखकर ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस दिशा में पहल की गई है, ताकि दुनिया से भूख और भूखमरी के कलंक को मिटाया जा सके। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास एजेंडे के लक्ष्य-2 के रूप में की गई है। ‘शून्य भुखमरी लक्ष्य’ वैश्विक रूप से स्वीकृत संयुक्त राष्ट्र के 17 समावेशी लक्ष्यों में से दूसरा है। इन लक्ष्यों की घोषणा वर्ष 2015 में की गई तथा इन्हें वर्ष 2030 तक प्राप्त किया जाना है। शून्य भुखमरी लक्ष्य के तहत जहाँ दुनिया से भुखमरी को मिटाया जाना है, वहीं खाद्य सुरक्षा में सवार लाया जाना उमरी की समस्या को लक्ष्य और यह काम के लक्ष्य-2 शून्य भुखमरी वर्ष 2030 तक भुखमरी को सनिश्चित करना है। इसके तहत पोषण स्तर में सुधार – है, तो समावेशी कृषि को प्रोत्साहित करना है। भुखमरी की सा शून्य के स्तर पर लाने का उपक्रम है शून्य भुखमरी लक्ष्य और वर्ष 2030 तक पूरा करना है। 

संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास एजेंडे के लक्ष्य-2 शन्य के उद्देश्य बहुत व्यापक हैं। इसके तहत वर्ष 2030 तक मिटाकर सभी लोगों, विशेषकर गरीबों और शिशुओं सहित की स्थिति में जी रहे लोगों के लिये पूरे वर्ष सुरक्षित, पौष्टिक पर्याप्त भोजन सुलभ कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी है। 2030 तक कुपोषण के हर रूप को मिटाना है, जिसमें 5 वर्ष से कोई बच्चों में बौनेपन और क्षीणता के बारे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सदा लक्ष्य वर्ष 2025 तक हासिल करना शामिल है। इसके अलावा किशोरियों, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं तथा वद्धजनों की पोषाहार जरूरतों को पूरा किया जाना है।

इस लक्ष्य के तहत जहाँ कृषि उत्पादकता को दोगुना किया जाना है, वहीं उत्पादन करने वालों की आमदनी को भी दोगुना किया जाना है। इसके तहत वर्ष 2030 तक जहाँ टिकाऊ खाद्यान्न उत्पादन प्रणालियाँ सुनिश्चित की जानी हैं, वहीं खेती की ऐसी प्रभावी विधियाँ अपनाई जानी हैं, जिनसे उत्पादकता और पैदावार बढ़े, पारिस्थितिक प्रणालियों के संरक्षण में मदद मिले। ये वे विधियाँ होंगी, जिनमें जलवायु परिवर्तन, कठोर मौसम, सूखा, बाढ़ एवं अन्य आपदाओं के अनुरूप ढालने की क्षमता मौजूद होगी। मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार लाना भी इसमें शामिल है। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का पहले से अधिक बढ़ाते हुए ग्रामीण बुनियादी ढाँचागत सुविधाआ, कृषि अनुसंधान व विस्तार सेवाओं, प्रौदयोगिकी विकास तथा पाच और मवेशी जोन बैंकों में निवेश को बढ़ाया जाना है, जिससे विकासशाल देशों, विशेषकर कम विकसित देशों में कृषि उत्पादकता क्षमता बन सके। इस लक्ष्य के तहत कृषि बाजारों में व्यापार प्रतिबंधों और विकृतियों को सुधारना और रोकना भी शामिल है। इसमें दोहा में हुई सहमति के अनुरूप सभी प्रकार की कृषि निर्यात सब्सिडी और उनके बराबर प्रभाव वाले सभी निर्यात उपायों को समानान्तर रूप से समाप्त करना शामिल है। इस लक्ष्य के तहत खाद्य जिन्स बाजारों और उनके व्युत्पन्नों (Derivatives) के सही ढंग से संचालन के उपाय अपनाना और सुरक्षित खाद्य भण्डार सहित बाजार की जानकारी समय से सुलभ कराना शामिल है, ताकि खाद्य वस्तुओं के मूल्यों में आने वाले बहुत अधिक उतार-चढ़ाव को सीमित करने में मदद मिल सके। 

स्पष्ट है कि भुखमरी को शून्य के स्तर पर लाने के ये उद्देश्य व्यापक और सुचिंतित हैं तथा लक्ष्य प्राप्ति में अत्यंत सहायक हैं। इनमें दुनिया से भूख को मिटाने की क्षमता और सामर्थ्य है। 

भारत उन समावेशी विकास लक्ष्यों का हिस्सा है, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किया गया है। ऐसे में भारत का भी यह दायित्व बनता है कि वह भूख और भुखमरी का सफाया करे। भारत इस दिशा में तत्पर भी दिख रहा है। 16 अक्टूबर, 2017 (अंतर्राष्ट्रीय खाद्य दिवस) के अवसर पर भारत के तीन जिलों-गोरखपुर (उ. प्र.), कोरापुट (ओडिशा) एवं थाणे (महाराष्ट्र) में ‘जीरो हंगर प्रोग्राम शुरु किया गया। ये जिले – गया। ये जिले शून्य भूख लक्ष्य (Zero Hunger Goal) को करने के लिए एक मॉडल की तरह होंगे। इस कार्यक्रम से देश के अन्य जिलों को भी जोड़ा जाना है। यह कार्यकारी धान परिषद् द्वारा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद्, एम. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन तथा जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान यता परिषद् के सहयोग से शुरू किया गया है। कार्यक्रम का उदेश्य 2022 तक भारत का कुपोषण से मुक्त कराना है। 

भारत उन समावेशी विकास लक्ष्यों का हिस्सा है, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किया गया है। ऐसे में भारत का भी यह दायित्व बनता है कि वह भूख और भुखमरी का सफाया करे। भारत इस दिशा में तत्पर भी दिख रहा है। 16 अक्टूबर, 2017 ( अंतर्राष्ट्रीय खाद्य दिवस) के अवसर पर भारत के तीन जिलों गोरखपुर ( उ. प्र.), कोरापुट (ओडिशा) एवं थाणे (महाराष्ट्र) में ‘जीरो हंगर प्रोग्राम’ शुरू किया गया। 

खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से हमारा ‘राष्ट्रीय पोषण मिशन’ (Na tional Nutrition Mission) भी महत्त्वपूर्ण है, जिसकी शुरूआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 8 मार्च, 2018 को राजस्थान के झुंझनू से की गई। इसके लिए 9046.17 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। यह मिशन एक शीर्षस्थ निकाय के रूप में मंत्रालयों के पोषण सम्बन्धी हस्तक्षेपों की निगरानी, पर्यवेक्षण, लक्ष्य निर्धारित करने तथा मार्ग दर्शन करने का काम करेगा। राष्ट्रीय पोषण मिशन का लक्ष्य ठिंगनापन (stunting). अल्पपोषण (under-nutrition), रक्ताल्पता (Anemia) तथा अल्पवजनी बच्चों में कमी लाना है। इसके तहत जहाँ पोषण सम्बन्धी गतिविधियों में लोगों को एक जनान्दोलन के रूप में सम्मिलित किया जाएगा, वहीं पोषण संसाधन कन्द्रा की स्थापना की जाएगी। यह मिशन जहाँ कुपोषण का समाधान करन के लिए विभिन्न योजनाओं के योगदान का प्रतिचित्रण करेगा, वहीं अत्यधिक मजबूत अभिसरण तंत्र (Convergence Mecha nism) प्रारंभ करेगा। 

भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 10 सितंबर, 2013 को ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’ आधसूचित किया गया, जिसका उद्देश्य एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए लोगों को वहनीय मूल्यों पर अच्छी गुणवत्ता के खाद्यान्न की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध कराते हुए उन्हें खाद्य और पौषणिक सुरक्षा प्रदान करना है। इस अधिनियम में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के अंतर्गत राज्य सहायता प्राप्त खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए 75% ग्रामीण आबादी और 50% शहरी आबादी को आच्छादित करने का प्रावधान है। इस प्रकार लगभग दो-तिहाई आबादी कवर की गई है। इसमें महिलाओं और बच्चों के लिए पौषणिक सहायता पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें जहाँ गर्भवती महिला और स्तनपान कराने वाली माताएं गर्भावस्था के दौरान तथा बच्चों के जन्म के 6 माह बाद तक भोजन के अलावा कम-से-कम 6000 रुपये का मातृत्व लाभ प्राप्त करने की हकदार हैं, वहीं 14 वर्ष तक की आयु के बच्चे भी निर्धारित पोषण मानकों के अनुरूप भोजन प्राप्त करने के हकदार हैं। खाद्यान्न अथवा भोजन की आपूर्ति नहीं किए जाने की दशा में लाभार्थी खाद्य सुरक्षा प्राप्त करने के हकदार हैं। मौजूदा समय में यह अधिनियम देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में प्रभावी है और प्रावधानों के अनुरूप इसे क्रियान्वित किया जा रहा है। हमारी सरकार ने खाद्य सुरक्षा बढ़ाने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं और हम मजबूत कदमों से खाद्य सुरक्षा की तरफ बढ़ रहे हैं। ये कदम संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास एजेंडे के लक्ष्य-2 का संधान करेंगे, ऐसी उम्मीद है। 

भूख और भुखमरी दुनिया के लिए अभिशाप जैसे हैं। ये सभ्य समाज के माथे पर कलंक की तरह हैं, तो मानव गरिमा को भी प्रभावित करते हैं। यह सुखद है कि संयुक्त राष्ट्र ने अपने सतत् विकास एजेंडा के लक्ष्य-2 के रूप में भूख और भुखमरी से मुक्त दुनिया का सपना देखा है, जिसे वैश्विक सहयोग और समर्थन मिल रहा है। भारत भी इस मुहिम में शामिल है। भूख और भुखमरी से मुक्त दुनिया एक सुन्दरतम और संवरी हुई दुनिया होगी और हमने इस दुनिया के स्वरूप को गढ़ना शुरू कर दिया है। 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

four + 19 =