सोनपुर-मेला पर निबंध।Essay on Sonpur-Mela In Hindi

सोनपुर-मेला पर निबंध

सोनपुर-मेला पर निबंध

मेले कई प्रकार के होते हैं; यथा धार्मिक, व्यावसायिक, औद्योगिक एवं वैज्ञानिक। प्रयाग के संगम तट पर लगने वाला माघ का मेला, देवघर का श्रावणी मेला आदि धार्मिक मेलों के उदाहरण हैं। दिल्ली में एशिया-72 आयोजित हुआ था। यह एक औद्योगिक मेला था। इसी प्रकार विज्ञान के इस युग में विज्ञान मेले भी आयोजित हो रहे हैं, जिनमें वैज्ञानिक प्रगति की झलकियां प्रस्तुत की जाती हैं। छोटे-बड़े व्यावसायिक मेले तो गांवों एवं शहरों में प्रायः लगा करते हैं, जिनमें दैनिक उपयोग की चीजों की खरीद-बिक्री होती है। बिहार में हरिहर क्षेत्र का मेला ऐतिहासिक, धार्मिक एवं व्यावसायिक तीनों का मिश्रण है। 

 सोनपुर-मेला (हरिहर क्षेत्र का मेला )एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। यह बिहार प्रांत के सारण जिले के सोनपुर में गंगा और गंडक के  संगम तट पर प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन लगता है, जो एक माह तक चलता है। सोनपुर-मेला के नामकरण के संबंध में एक कथा प्रचलित है। 

प्राचीन काल में हिंदू धर्म के दोनों मतावलंबियों-वैष्णव एवं शैव में झगड़े हुआ करते थे। कहा जाता है कि ऐसी स्थिति में दोनों मतों के धर्माचार्यों ने मिलकर इसी क्षेत्र में एक धर्मसभा की थी। इस धर्मसभा ने काफी विचार विमर्श के बाद यह निर्णय सुनाया कि हरि और हर अर्थात विष्णु एवं शिव में कोई भेद नहीं है। दोनों सर्वेश्वर भगवान के रूप हैं । इस प्रकार दोनों मतावलंबियों में समन्वय स्थापित किया गया। इस समन्वय को मूर्तरूप देने के लिए इसी स्थान पर एक साथ हरि और हर अर्थात हरिहर नाथ का मंदिर बनवाया गया। इस कारण इस स्थान का नाम हरिहर क्षेत्र पड़ा। 

सोनपुर-मेला  के इस मेले में हाथी जैसे विशालकाय पशु से लेकर खरगोश जैसे लघुकाय जंतु भी बिक्री के लिए आते हैं। सरकार की ओर से यहां विभिन्न प्रकार की प्रदर्शनियां लगाई जाती हैं; यथा-कृषि प्रदर्शनी, खादी वस्त्रों की प्रदर्शनी एवं पुस्तकों की प्रदर्शनी इत्यादि। इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां सभी दुकानें एक क्रम में सजी रहती हैं। मेले में आए हुए व्यक्तियों के मनोरंजन के लिए नाटकों एवं नौटंकियों के मंचन होते रहते हैं। मेले में साधु संतों का भी जमावड़ा होता है, जिनके द्वारा एक माह तक धार्मिक प्रवचन चलता रहता है। यहां बच्चों के मनोरंजन के लिए झूला, मदारी का नाच, बाइस्कोप एवं अन्य कार्यक्रम होते रहते हैं। राज्य सरकार की ओर से इस मेले में विद्युत, पेयजल, सफाई एवं चिकित्सा आदि की समुचित व्यवस्था की जाती है। 

विश्वविख्यात हरिहर क्षेत्र के मेले पर प्रत्येक बिहारवासी को गर्व है। 

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