सोशल मीडिया पर निबंध | Essay on Social Media in Hindi अथवा सोशल नेटवर्किंग का महत्त्व

Essay on Social Media in Hindi

सोशल मीडिया पर निबंध | Essay on Social Media in Hindi अथवा सोशल नेटवर्किंग का महत्त्व  (यूपीपीसीएस मुख्य परीक्षा, 2012) 

सोशल मीडिया, मीडिया का एक नया चेहरा, जिसे समाज द्वारा गढ़ा गया है। मीडिया का यह नया चेहरा इस समय समाज में न सिर्फ अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, बल्कि इसने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत स्थिति दर्ज करवाई है। सबसे खास बात यह है कि सोशल मीडिया ने जन-जागरूकता को तो बढ़ाया ही है, सामाजिक स्तर पर इसने लोगों को सक्रिय भी बनाया है। यही कारण है कि सामाजिक सरोकारों के प्रति लोगों में सामाजिक एकजुटता बढ़ी | है। जनआंदोलनों को सफल बनाने में भी सोशल मीडिया केन्द्रीय भूमिका निभा रहा है। ऐसा सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि समूचे विश्व में देखने को मिल रहा है, फिर चाहे वह भारत में जनलोकपाल के लिए छेड़ा गया अन्ना हजारे का आंदोलन हो अथवा ट्यूनीशिया की क्रांति, सभी में सोशल मीडिया की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही। सूचना और संचार के नये दौर में सोशल मीडिया, अभिव्यक्ति के एक सशक्त माध्यम के रूप में उभर कर सामने आया है। 

“सूचना और संचार के नये दौर में सोशल मीडिया, अभिव्यक्ति के एक सशक्त माध्यम के रूप में उभर कर सामने आया है।” 

सोशल मीडिया का फलक बहुत विस्तृत है, जिसमें निरंतर इजाफा हो रहा है। सोशल साइट्स की भूमिका बहुआयामी है। इनके जरिये आप विश्वभर में दोस्त बना सकते हैं. दोस्तों की गतिविधिय को अपडेट रख सकते हैं, दोस्तों का ग्रुप व कम्युनिटी बना सकते हैं, पलभर में संदेशों का आदान-प्रदान कर सकते हैं, दुनियाभर से प्राप्त होने वाले संदेशों या ज्वलंत मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे सकते हैं। इन सब के अलावा न सिर्फ आप ऑनलाइन चैटिंग कर सकते हैं, बल्कि ऑनलाइन अनेक गेम्स खेल सकते हैं। कितना व्यापक है, सोशल साइट्स का फलक। 

सोशल मीडिया की वजह से आज सूचनाएं पंख लगाकर उड़ रही हैं। पूरे विश्व में ये इतराती-इठलाती घूम रही हैं। लोगों की सूचनाओं की भूख को मिटाने का काम ये बड़ी शिद्दत से कर रही हैं। लोग इन सूचनाओं के पीछे भाग रहे हैं। मीडिया का यह नया चेहरा जनमत संग्रह का काम भी बखूबी कर रहा है। सोशल मीडिया की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके जरिये संदेशों और सूचनाओं के आदान-प्रदान से बहुत कम समय में त्वरित भीड़ (Flash Mob) एकत्र हो जाती है। अक्सर इसके स्वरूप अलग होते हैं। कभी यह ‘फ्लैश मॉब’ नाचने-गाने के लिए एकत्र हो सकता है, तो कभी किसी सामाजिक मुद्दे के विरोध के लिए। इस विरोध के लिए इन्हें लाठियां भी खानी पड़ सकती हैं। इसके लिए सोशल मीडिया द्वारा समय और जगह तय की जाती है और देखते-ही-देखते वहां आंदोलनकारियों का रेला पहुंच जाता है। यह सोशल मीडिया की एक बड़ी देन है। कहना गलत न होगा कि सोशल मीडिया समाज का एक नया चेहरा गढ़ने में लगा है। साथ ही इसने न सिर्फ लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती प्रदान की है, वहीं सूचनाओं के लोकतांत्रिक संसार की भी रचना की है। नए क्रांतिकारी नागरिकों की एकजुटता का आधार संवेदनशील और जिंदगी से जुड़े मुद्दे बन गए हैं। सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति के आनंद को भी बढ़ाया है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने दुनिया को दीवाना बना रखा है। चूंकि सोशल नेटवर्किंग ‘रियल टाइम एलोकेशन बेस्ड’ तथा ‘लाइव फीड’ पर आधारित हैं, अतः इनमें सजीवता भी है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर पूरी जीवंतता के साथ अभिव्यक्ति और विचारों का आदान-प्रदान संभव है। 

सोशल मीडिया को एक पुख्ता आधार सोशल साइट्स ने प्रदान किया है। इस समय विश्व की कुछ प्रमुख साइटें अपनी कामयाबी के परचम लहरा रही हैं। यहां इनका जिक्र जरूरी है। फसबुक ने वैश्विक स्तर पर अपनी कामयाबी के झंडे गाड़े हैं। यह 

वर्ल्ड वाइड वेब पर उपलब्ध दुनिया की सबसे बड़ी नेटवर्किंग साइट है। इसके संस्थापक मार्क जुकरबर्ग हैं, जिन्होंने वर्ष 2004 में इसकी शुरुआत की थी। इसी क्रम में ट्विटर (Twitter) भी एक महत्त्वपूर्ण सोशल साइट है। इसे माइक्रो ब्लॉगिंग (Micro Blogging) भी कहा जाता है। इस साइट पर भेजे जाने वाले संदेश ट्वीट (Tweet) कहलाते हैं। ट्विटर वेब साइट की शुरुआत वर्ष 2006 में जैक डोर्सी (Jack Dorsey) द्वारा की गई थी। इसी क्रम में गूगल इंक कंपनी द्वारा संचालित वीडियो शेयरिंग वेबसाइट ने खासी लोकप्रियता अर्जित की है। वर्ष 2005 में चॉड ही, स्टीव चेन तथा जावेद करीम द्वारा इसकी शुरुआत की गई थी, जो कि ‘पे पाल’ कंपनी से संबद्ध हैं। अब तो वेब साइट्स का एक लंबा संजाल तैयार हो चुका है |

सोशल मीडिया अब व्यापारिक लाभ का भी बायस बन गया है। कारण, विज्ञापन के परंपरागत माध्यमों के मुकाबले सोशल मीडिया कहीं अधिक प्रभावी साबित हो रहा है। सोशल मीडिया के तमाम तरह के कारोबारी फायदे हैं। एक तरफ जहां इसके कारण बिक्री में बढ़ोत्तरी होती है, वहीं दूसरी तरफ इसके माध्यम से प्रतिस्पर्धी कंपनियों की खूबियों खामियों का भी पता लगाया जाता है। प्रोडक्ट्स के बारे में जहां लोगों का रुझान पता चलता है, वहीं बाजार की मानसिकता के अनुरूप खुद को तैयार करने में मदद मिलती है। मुंबई, बंग्लुरू व चेन्नई जैसे महानगरों में कंपनियां अब सोशल मीडिया से जुड़े पदों के लिए विज्ञापन निकालते हैं। इस प्रकार इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं। 

“सोशल मीडिया के माध्यम से उन्मुक्त व अमर्यादित अभिव्यक्ति बढ़ी है।” 

फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स खबर देने और पाने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। इसके साथ ही, सोशल मीडिया के मंच, पारंपरिक मीडिया संस्थानों के लिए लोगों की प्रतिक्रिया जानने, रायशुमारी करने, अपनी ब्रांडिंग करने तथा फंड एकत्र करने का जरिया भी बन गए हैं। ट्विटर और फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स समाचार पत्रों और टीवी चैनल्स की न्यूज साइट्स को बड़ा ट्रैफिक मुहैया करवा रहीं हैं। 

सोशल मीडिया के जहां अनेक लाभ हैं, वहीं खतरे भी कम नहीं हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्मुक्त व अमर्यादित अभिव्यक्ति बढ़ी है। कुछ लोग विचार रखते हुए अपना संयम खो देते हैं। अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। इन्हीं वजहों से सोशल नेटवर्किंग पर सेंसरशिप की बात उठी है। यह उचित नहीं है कि सोशल मीडिया का लाभ उठाकर कुछ भी टिप्पणी कर दी जाए या इसकी आड़ में अश्लीलता और अभद्रता को बढ़ावा दिया जाए। ऐसी बातों से माहौल बिगड़ता है। इससे विश्वसनीयता का भी संकट बढ़ा है। यही कारण है कि सोशल मीडिया विवादास्पद भी हो रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से बढ़ती ऐसी प्रवृत्तियों पर अंकुश तो जरूरी है, लेकिन इसके लिए सोशल मीडिया को सेंसरशिप के दायरे में लाया जाना अभिव्यक्ति की उस स्वतंत्रता का हनन होगा, जो हमें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) द्वारा प्रदान की गई है। विदित हो कि कुछ समय पूर्व धर्म व राजनीति से जुड़ी कुछ आपत्तिजनक बातें व चित्र आदि सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित हुए थे और उसके बाद भारत सरकार द्वारा सोशल नेटवर्किंग को सेंसरशिप के दायरे में लाने की बात कही गई थी। इस पर तीव्र विरोधी प्रतिक्रियाएं भी सामने आई थीं। 

सोशल मीडिया की अनेक उपयोगिताएं हैं। नये दौर में इसने | अपनी उपादेयता को साबित भी किया है। ऐसे में प्रबुद्ध वर्ग व सोशल साइट्स के उपभोक्ताओं का यह दायित्व बनता है कि वे मिलकर ऐसे प्रयास करें कि इसमें विकृतियां न आवें और यह अपने निर्मल स्वरूप में सामाजिक सरोकारों का चितेरा बने।मा 

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