स्मार्ट सिटी योजना पर निबंध | Essay on Smart City in Hindi

स्मार्ट सिटी योजना पर निबंध

स्मार्ट सिटी योजना पर निबंध |Essay on Smart City in Hindi            

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत ने हर क्षेत्र में उन्नति की है और इसी का नतीजा है कि आज हमने न सिर्फ वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सफलता प्राप्त की है, बल्कि हमारा देश तेजी से विकसित देशों की श्रेणी में आने को आतुर है। ऐसे में दुनिया के चंद विकसित देशों की तरह यहां भी ऐसे शहरों का होना आवश्यक हो जाता, जहां रहने वाले तमाम लोगों की सभी जरूरतें स्मार्ट तरीके से पूर्ण की जा सकें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2014) के अवसर पर लाल किले से अपने पहले भाषण में देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की थी। 

वर्तमान संदर्भो में एक ‘स्मार्ट शहर’ से तात्पर्य उस शहर में नगरीय सेवाओं की गुणवत्ता एवं निष्पादन के उन्नयन, बेहतर बुनियादी सेवाओं एवं अवसंरचना की उपलब्धता, स्वच्छ और संपोषणीय पर्यावरण तथा सरकारी सेवाओं, परिवहन एवं यातायात प्रबंधन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, जलापूर्ति, अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिकों के लिए वहनीय आवास, सुरक्षा आदि हेतु सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों सहित स्मार्ट समाधानों के व्यापक प्रयोग से है। साथ ही इसमें आर्थिक गतिविधियों के संदर्भ में संपोषणीयता तथा निवासियों के बड़े भाग हेतु समुचित रोजगार की व्यवस्था होना भी शामिल है। 

प्रधानमंत्री की इस परियोजना हेतु 27 अगस्त, 2015 को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी किए गए कांसेप्ट नोट में 27 अगस्त, 2015 को इस मिशन हेतु 98 शहरों एवं कस्बों की सूची जारी की गई। इनमें 24 राज्य राजधानियां, 18 सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थल, 5 बंदरगाह शहर तथा 64 छोटे एवं मध्यम श्रेणी के शहर शामिल हैं। इनमें शामिल उत्तर प्रदेश के 12 शहर हैं इलाहाबाद, अलीगढ़, आगरा, बरेली, गाजियाबाद, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मुरादाबाद, रामपुर, सहारनपुर एवं वाराणसी। अभी उत्तर प्रदेश के एक अन्य शहर (जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा रायबेरली एवं मेरठ के नाम भेजे गए हैं) तथा जम्मू एवं कश्मीर के एक शहर (श्रीनगर या जम्मू) को इस सूची में शामिल होना है। 

स्मार्ट सिटी बनने की दौड़ में शामिल शहरों में 19 जनवरी, 2018 को 10 और शहर शामिल हो गए। हालांकि इनमें से 9 शहरों का नाम ही घोषित किया गया है। घोषित 9 शहरों में सबसे अधिक 3 शहर यूपी से हैं, जबकि एक शहर बिहार का है। इन शहरों के लिए लगभग 13 हजार करोड़ रुपये के निवेश की परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा गया है। सत्ता में आने के बाद पहली बार स्मार्ट सिटी के लिए शहरों की चयन प्रक्रिया जनवरी, 2016 में शुरू की गई थी और पहले चरण में 20 शहरों को चुना गया। उसके बाद अलग-अलग चरणों में अब तक 90 शहरों का चयन हो चुका था। अब 10 और शहरों को चुन लिया गया है जिससे अब स्मार्ट सिटी के लिए चयनित शहरों की कुल संख्या 100 हो गई है। 100वां एवं अंतिम चयनित शहर मेघालय राज्य का शिलांग (Shillong) है। इन 100 चयनित शहरों के विकास पर 2,05,018 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वर्ष 2019-20 के आम बजट में इस मिशन के लिए 6450 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, 2018 19 के बजट में 6169 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। 

प्रधानमंत्री का विजन बड़े शहरों के नजदीक स्थित छोटे शहरों एवं मौजूदा शहरों में आधुनिक सुविधाएं स्थापित कर उन्हें स्मार्ट सिटीज के रूप में विकसित करने का है। स्मार्ट शहर मिशन का उद्देश्य उपलब्ध परिसंपत्तियों, संसाधनों एवं बुनियादी ढांचे के कारगर इस्तेमाल हेतु स्मार्ट प्राविधियां अपनाने को प्रोत्साहित करना है, ताकि शहरी जीवन की गणवत्ता बेहतर हो सके और स्वच्छ एवं सतत पर्यावरण सुलभ हो सके। इसके तहत शहरी नियोजन पहलों में नागरिकों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जाएगा। 

इस पहल के तहत बुनियादी अवसंरचना सुविधाओं पर विशेष | ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें पर्याप्त एवं स्वच्छ जलापूर्ति, | साफ-सफाई, ठोस कचरे का प्रबंधन, शहरी आवागमन और सार्वजनिक । परिवहन की प्रभावी व्यवस्था, निर्धनों के लिए वहनीय आवास, विद्युत आपूर्ति, बेहतर आईटी कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेस और नागरिकों की भागीदारी युक्त गवर्नेस, नागरिकों की सुरक्षा एवं संरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत शहरी पर्यावरण शामिल हैं। स्मार्ट शहर से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु विशेष प्रयोज्य वाहन (SPV) स्थापित किए जाएंगे जिसमें राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों की 50 : 50 अंशधारिता होगी। 

परियोजनाओं के संदर्भ में न्यूनतम क्षेत्र मानक रेट्रोफिटिंग (कमियों वाले स्थान पर जोड़े जाने वाले भाग) के लिए 500 एकड़, पुनर्विकास हेतु 50 एकड़ तथा हरित क्षेत्र (ग्रीनफील्ड) परियोजनाओं के लिए 250 एकड़ निर्धारित किया गया है। यह पूर्वोत्तर और हिमालय क्षेत्र के राज्यों के संदर्भ में 50 प्रतिशत होगा। हासिल किए जाने वाले बेंचमार्कों में शामिल हैं—ऊर्जा आवश्यकताओं का 10 प्रतिशत नवीकरणीय स्रोतों से पूरा किया जाएगा, भवन निर्माण का 80 प्रतिशत हरित क्षेत्र होगा तथा नई (हरित क्षेत्र) परियोजनाओं में 35 प्रतिशत आवास आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गों के लिए होंगे। 

भौतिक बुनियादी ढांचे, सामाजिक सेवाएं और प्रशासन, यह स्मार्ट सिटी के तीन आधारभूत स्तंभ माने जाते हैं। स्मार्ट सिटीवासियों की छोटी-बड़ी सभी आवश्यकता को समुचित रूप से पूर्ण करने के लिए जन केंद्रित इन तीन स्तंभों का होना बहुत आवश्यक है, किंतु इसके साथ-साथ स्मार्ट सिटीज में मांग प्रबंधन, वित्तीय टिकाऊपन, ऊर्जा कुशलता, सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रभावी व्यवस्था सहित न्यूनतम कचरा उत्पादन जैसी विशेषताओं का होना भी आवश्यक 

देश में बड़ी संख्या में स्मार्ट सिटी स्थापित करने से निःसंदेह भारत को विकसित देशों की ओर अग्रसर होने में मदद मिलेगी और देश में नए सिरे से रोजगार के अवसर भी खुलेंगे, पर हमारे देश में इस परियोजनाओं को मुख्य रूप देने में कई चुनौतियां भी हैं, जिनका सामना किए बिना सपनों के शहर बसाना आसान नहीं है। निर्माण से जुड़े कई विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे देश में स्मार्ट सिटीज हेतु कानून में परिवर्तन के साथ-साथ तकनीकी संबंधी सभी क्षेत्रों में भी काफी परिवर्तन व सुधार लाने की आवश्यकता है। इतना ही नहीं, ऊर्जा प्रबंधन, कचरा प्रबंधन जैसे विषयों पर भी गंभीरतापूर्वक कार्य करना आवश्यक होगा। इंटरनेट के माध्यम से की जाने वाली सूचनाओं के आदान-प्रदान का दुरुपयोग न हो, ऐसी व्यवस्था बनानी होगी। ध्यातव्य है कि भारत की वर्तमान जनसंख्या का लगभग 31% शहरों में बसता है और इनका सकल घरेलू उत्पाद में 63% (वर्ष 2011 की जगनणना के अनुसार) का योगदान है। ऐसी उम्मीद है कि वर्ष 2030 तक शहरी क्षेत्रों में भारत की आबादी का 40% रहेगा और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान 75% का होगा। इसके लिए भौतिक, संस्थागत, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के व्यापक विकास की आवश्यकता है। ये सभी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने, निवेश को आकर्षित करने तथा विकास व प्रगति के एक गुणी चक्र की स्थापना करने में महत्त्वपूर्ण हैं। स्मार्ट शहरों का विकास इसी दिशा में एक सुचिंतित कदम है। 

स्मार्ट सिटी में रहने के लिए देशवासियों को भी हर स्तर पर | खुद को स्मार्ट बनाना होगा। इन सब चुनौतियों का सामना कर और | सभी बाधाओं को दूर कर स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को पूर्ण करने में | भारत पूर्णतः सक्षम है। यदि देश का प्रत्येक नागरिक, सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग दें तो निश्चित ही अगले दो दशकों में देश में सबसे अधिक स्मार्ट सिटीज़ होंगी और भारत विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आ जाएगा। 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

nine − five =