समाज में मीडिया की भूमिका पर निबंध | Essay on role of media in society

समाज में मीडिया की भूमिका पर निबंध

समाज में मीडिया की भूमिका पर निबंध essay on role of media in society |मीडिया और समाज 

इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारे देश में मीडिया और समाज का अटूट रिश्ता है। चूंकि हमारे यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था है, अतएव समाज के प्रति मीडिया की जवाबदेही भी ज्यादा है। यही कारण है कि उसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। मीडिया समाज का प्रहरी है और यह बात वह समय-समय पर साबित करता रहा है। चाहे वह आपातकाल का दौर रहा हो अथवा जनहित से जुड़ा कोई भी आन्दोलन, मीडिया ने समाज के बीच अपनी सार्थकता को स्थापित किया। यही कारण है कि मौजूदा दौर में समाज की अपेक्षाएं मीडिया से बढ़ी हैं और उसे नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले माध्यम के रूप में देखा जाता रहा है। 

मीडिया ने सदैव अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों को बखूबी निभाया। इसके लिए संघर्ष किया और कुर्बानियां भी दीं। मीडिया ने पत्रकारिता के मूलभूत आदर्शों व मूल्यों, निष्पक्षता एवं सच को निभाते हुए सत्ता और शासन के दबाव की परवाह नहीं की और पथभ्रष्ट सत्ता को आइना दिखाने का काम करते हुए वह समाज की कसौटी पर खरा उतरा। उसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को श्रेष्ठ आयाम दिए और यदि समाज दिग्भ्रमित हुआ, तो उसे भी दिशा-बोध कराने का काम किया। सामाजिक जागरूकता लाने में मीडिया का योगदान अतुलनीय है। 

“चूंकि हमारे यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था है, अतएव समाज के प्रति मीडिया की जवाबदेही भी ज्यादा है। यही कारण है कि उसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है।” 

मीडिया ने समय-समय पर स्वच्छ और निष्पक्ष पत्रकारिता की मिसालें पेश की हैं। यदि मीडिया सजग और चेतन न होता तथा सामाजिक सरोकारों से प्रतिबद्ध न होता, तो शायद बोफोर्स कांड और ताबूत घोटाला का सच सामने न आ पाता। सच को उजागर कर मीडिया ने सरकार को कार्यवाही के लिए विवश किया। आप शायद फेयर फैक्स प्रकरण, यूरिया खाद घोटाला, झामुमो रिश्वत प्रकरण तथा हर्षद मेहता कांड को भूले नहीं होंगे। इन सभी को सामने लाने में मीडिया की केंद्रीय भूमिका रही है। भ्रष्टाचार से जुड़ी वह फेहरिस्त बहुत लंबी है, जो मीडिया के प्रयासों से ही सामने आ सकी। सच को उजागर करने में तहलका और विकीलीक्स की भूमिका की अनदेखी नहीं कर सकते हैं। अकबर इलाहाबादी ने अकारण नहीं कहा था कि जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो। 

मीडिया ने सदैव समाज की ही तो लड़ाई लड़ी है। शुरुआत में इसका स्वरूप मिशनरी था और मकसद था भारतीय समाज को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करवाना। स्वतंत्रता की लड़ाई में अखबारों और उनके संपादकों की साहसिक भूमिका किसी से छिपी नहीं है। स्वतंत्रता मिलने के बाद भारतीय समाज में मीडिया की जिम्मेदारी और बढ़ गई, क्योंकि अब स्वाधीन भारतीय समाज के निर्माण का भी दायित्व भी उससे जुड़ गया। आजादी के बाद भ्रष्टाचार, लालफीताशाही, नौकरशाही एवं अराजकता के खिलाफ भारतीय मीडिया बराबर लड़ाई लड़ते हुए अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा है। 

“साहित्य, शिक्षा और संस्कृति के विकास तथा उन्नयन के लिए भी मीडिया के प्रयास श्लाघनीय हैं।” 

इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं नागरिक अधिकारों का हनन हुआ, तब-तब मीडिया न देश और समाज के हित में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। जनोन्मुखता भारतीय मीडिया की एक विशिष्ट पहचान रही है। जनहिता का पैरोकारी करते हुए भारतीय मीडिया ने कभी भी सरकारी दबाव का आड़े नहीं आने दिया। मीडिया की जनहितकारी भमिका का हा १० परिणाम है कि समाज जब-जब आहत होता है, संक्रमित हात तब-तब वह मीडिया की तरफ आशा भरी निगाहों से देखता है। 

मीडिया ने लोकतांत्रिक मूल्यों को बहाल रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लोकतंत्र की जड़ों को सींचा है इसके वृक्ष को छायादार बनाने का प्रयास किया है। यही कारण है कि आज मीडिया आम जनजीवन से अभिन्न रूप से जुड़ा है। समाचार पत्र मित्र की भूमिका में समाज के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। 

मीडिया यदि समाज की पहरेदारी न करे, तो विसंगतियों-विडंबनाओं की बाढ़ आ जाए, अन्यायी प्रवृत्तियां बढ़ने लगें और स्थिति ‘जंगलराज’ जैसी आ जाए। वह मीडिया ही है, जो सुशासन की राह दिखाता है, शासन-प्रशासन की कमियों को सामने लाकर सुधार के लिए प्रेरित करता है। इस तरह से देखा जाए तो सुशासन की स्थापना में मीडिया की भूमिका महत्त्वपूर्ण रहती है। अच्छा शासन भी तभी संभव है, जब मीडिया की भूमिका सकारात्मक हो तथा उसके प्रयास रचनात्मक हों। इस कसौटी पर भी भारतीय मीडिया सदैव खरा उतरा है। उसने सदैव समाज के उन्नयन एवं प्रगति में महत्त्वपूर्ण सहयोगी की भूमिका निभाकर अपनी रचनात्मक प्रवृत्ति का परिचय दिया है। 

सबसे अच्छी बात यह है कि भारतीय मीडिया अभी राजनीतिक दबाव से मुक्त है। यही वजह है कि वह आम आदमी की आवाज बनकर समाज से बेहतर तालमेल बनाए हए है। उसकी निष्पक्षता तटस्थता कायम है, जो कि समाज के हित में आवश्यक भी हैं | यह कम महत्त्वपूर्ण नहीं है कि देश से निकलने वाले छोटे-छोटे अखबार तक दबावमुक्त रहकर सच की नुमाइन्दगी करते हुए समाज के निर्माण में योगदान दे रहे हैं। मीडिया के नैतिक उद्यम ने सदैव अनैतिकता को पछाड़ते हुए एक परिष्कृत समाज के निर्माण की पहल की है। समाज के लिए मीडिया की क्या अहमीयत है, इसे जे. पार्टन के उस कथन से समझा जा सकता है, जिसमें उन्होंने समाचार पत्रों को ‘जनता के विश्वविद्यालय’ की संज्ञा दी है। मीडिया सिर्फ एक सामाजिक प्रहरी की ही भूमिका नहीं निभाता, बल्कि समाज को विखंडन से भी बचाता है। समाज की अखंडता एवं एकता को कायम रखने में मीडिया ने हमेशा सकारात्मक भूमिका निभाई। हमारे देश में साम्प्रदायिकता एक बड़ी समस्या है। साम्प्रदायिकता के कारण साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं होती रहती हैं। यह सच है कि हमारे देश में साम्प्रदायिकता की जड़े बहुत गहरी हैं, किन्तु मीडिया ने कभी इन जड़ों को सींचकर समाज को कलंकित करने का काम नहीं किया। मीडिया ने सदैव सामाजिक समरसता को बढ़ाने का काम किया। इस तरह देश और समाज की एकता और अखंडता को बनाए रखने, सामाजिक सौहार्द | को कायम रखने तथा भाई-चारा का माहौल बनाए रखने में मीडिया ने हमेशा सराहनीय योगदान दिया। भारतीय मीडिया ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ में निहित अवधारणा को साकार किया है। 

मीडिया भारतीय संस्कृति का संवाहक बन भारतीय समाज की | श्रेष्ठता को साबित कर रहा है। लोक संस्कृति, कला, नृत्य, गायन,  संगीत आदि के विकास में मीडिया ने अपने ढंग से सहयोग दिया और सामाजिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया, समाज को गतिशीलता दी। यह कहना गलत न होगा कि मीडिया ने हमेशा सामाजिक तमस के खिलाफ लड़ाई लड़कर समाज को उजियारे की सौगात दी है। मीडिया के जनहितकारी स्वरूप के कारण ही समाज की अपेक्षाएं निरंतर मीडिया से बढ़ रही हैं और वह समाज की कसौटी पर खरा भी उतर रहा है। यह जज्बा आगे भी बना रहना चाहिए। 

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