पेट्रोल की बढ़ती कीमत पर निबंध-Essay on Rising Price of Petrol

पेट्रोल की बढ़ती कीमत पर निबंध

पेट्रोल की बढ़ती कीमत पर निबंध-Essay on Rising Price of Petrol

सभी व्यक्तियों की चाहत होती है कि उनके पास भी अपना वाहन हो। मेरे परिवार में चार सदस्य हैं। जब कहीं भी आना-जाना पड़ता था, तो हमें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता था। पत्नी और बच्चों की जिद के कारण मुझे भी वाहन की आवश्यकता महसूस होने लगी। मेरी आमदनी इतनी नहीं थी कि मैं नई कार खरीद सकू, इसलिए मैंने पुरानी मारुति-800 खरीदने का निश्चय किया। मैंने किसी तरह पचास हजार रुपये इकट्ठे किए और गाड़ी अपने घर ले आया। परंतु अब गाड़ी चलाने के लिए पेट्रोल चाहिए। अतएव गाड़ी में पेट्रोल भरवाने हेतु मेरी तनख्वाह का एक बड़ा हिस्सा खर्च होने लगा। 

पेट्रोल की कीमतें दिनो-दिन बढ़ती ही जा रही हैं। ऐसी स्थिति में कार रखना मुश्किल पड़ रहा था। यदि मैं वाहन का उपयोग करूं, तो घर के अन्य खर्च पूरे नहीं होते। ऐसी स्थिति में मैं त्रिशंकु हो गया था। अगर अब गाड़ी खड़ी करके पैदल चलता हूं, तो जग-हंसाई होती है। बच्चों की पढ़ाई में बाधा अलग पड़ रही थी। ऐसी स्थिति में मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। 

महंगाई के दौर में आम आदमी का जीवन एकदम दूभर हो गया है। कार के पेट्रोल का खर्च निकालने के लिए मुझे खाने-पीने तक में कटौती करनी पड़ी। खाने-पीने में कटौती कब तक चल सकती थी। फलत: मेरी समझ में आ गया कि हमें सबसे पहले अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए, उसके बाद ही कोई अन्य बात सोचनी चाहिए, अन्यथा मेरी तरह सभी लोगों को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ेगी। इस संबंध में किसी ने ठीक ही कहा है 

तेते पांव पसारिये जेती लांबी सौर।

दूसरे शब्दों में, हमें अन्य लोगों को देखकर नहीं चलना चाहिए। हमें सबसे पहले अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए। उसके बाद ही अपने अन्य शौक पूरे करने चाहिए। यदि हम कर्ज लेकर वाहन में पेट्रोल भराएं, तो एक दिन वाहन बिकेगा ही, साथ में जग-हंसाई भी होगी। 

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