वर्षा ऋतु पर निबंध – Essay on Rainy Season in Hindi

Essay on Rainy Season in Hindi

वर्षा ऋतु पर निबंध – Essay on Rainy Season in Hindi

वर्षा ऋतु भी चार महीने की होती है। अंग्रेजी महीने के अनुसार यह 15 जून से शुरू होकर 15 अक्टूबर तक रहती है। इस ऋतु में प्राय: वर्षा होती रहती है। वर्षा ऋतु से हमें काफी लाभ होता है। इन महीनों में अनेक फसलों को पानी की आवश्यकता होती है। यदि वर्षा न हो, तो फसलें सूख जाती हैं। 

वर्षा ऋतु की रात बड़ी भयावह होती है। आकाश काले-काले बादलों से घिरा रहता है। कभी जोरों से तो कभी रिमझिम-रिमझिम वर्षा होती है। रात्रि में मेघ के गर्जन से दुर्बलों का दिल दहल उठता है। छोटे-छोटे बच्चे तो अपनी मां के सीने से चिपक जाते हैं। चारों ओर अंधेरा छाया रहता है। ऐसे समय में अगर किसी अत्यावश्यक कार्य से बाहर निकलना पड़े, तो सामने मुसीबत का पहाड़ दिखाई देता है। परिचित स्थान भी प्रकाश के अभाव में अनजान सा मालूम पड़ता है। सड़कें बिल्कुल सुनसान रहती हैं। रास्तों पर सांप, बिच्छू आदि का भय बना रहता है। आने-जाने के लिए वाहनों का कहीं कोई अता-पता नहीं रहता। लाचार होकर पैदल चलने पर भी आगे का रास्ता नहीं दिखाई पड़ता। लेकिन कभी-कभी बिजली की चमक आगे का रास्ता दिखा देती है। 

किसानों की वर्षा ऋतु अलग ढंग से व्यतीत होती है। अच्छी बारिश होने पर वे सोचते हैं कि इस वर्ष अच्छी फसल होगी, सारे कर्ज चुका दिए जाएंगे, त्योहारों में खूब खुशियां मनाई जाएंगी, बिटिया के हाथ पीले कर देंगे, अपने बेटे को शहर में पढ़ने भेजेंगे आदि। लेकिन जब दिन-रात वर्षा होने लगती है, तब किसानों की सोच बदल जाती है। वे सोचने लगते हैं कि अगर बाढ़ आ गई, तो फसल नष्ट हो जाएगी और हम भिखारी के भिखारी ही रह जाएंगे। 

अगर बरसात में गरीबों का छप्पर टपक रहा हो, तो उन्हें ऐसा लगता है कि उनका भाग्य बह रहा है। क्योंकि तेज वर्षा में मिट्टी के मकान गिर जाते हैं। कभी-कभी मकान के मलबे के नीचे उनके बच्चे, पशु आदि दब जाते हैं। 

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