प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर निबंध अथवा स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन | Essay on Pradhan Mantri Ujjwala Yojana

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर निबंध

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर निबंध अथवा स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन | Essay on Pradhan Mantri Ujjwala Yojana

भारत में आज भी विपन्न वर्ग एवं ग्रामीण क्षेत्र की अधिसंख्य महिलाओं को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन उपलब्ध नहीं है और उन्हें खाना पकाने के लिए अस्वच्छ ईंधन जैसे-लकड़ी, केरोसीन, कोयला और उपलों आदि पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर खराब प्रभाव पड़ता है। अस्वच्छ ईंधनों के इस्तेमाल से भारत में प्रति वर्ष लगभग पांच लाख लोग घर के अंदर होने वाले वायु प्रदूषण (IndoorAirPollution) से पैदा होने वाली बीमारियों के कारण मारे जाते हैं। इससे होने वाली कुल मृत्युओं में आधी संख्या बच्चों की होती है, जिन्हें सांस जनित बीमारियां हो जाती हैं। खाना पकाने का अस्वच्छ ईंधन पर्यावरण के लिए अहितकर होता है। जानकारों के अनुसार परम्परागत ईंधनों वाले चूल्हे से प्रति घंटा 400 सिगरेटों को जलाने जितना वायु प्रदूषण होता है। 

अस्वच्छ ईंधनों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संबंधी दुष्परिणामों को ध्यान में रखकर ही भारत सरकार ने स्वच्छ ईंधन की ओर एक कदम बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की है। 1 मई, 2016 को ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलिया (उ. प्र.) के मालदेपुर से बीपीएल परिवारों की 10 महिलाओं को निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन प्रदान कर ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ का शुभारंभ किया, जिसका लक्ष्य भारत में खाना पकाने के लिए प्रयुक्त होने वाले अस्वच्छ ईंधनों (लकड़ी, केरोसीन, कोयला, उपले आदि) को स्वच्छ और अधिक दक्ष ईंधन एलपीजी से प्रतिस्थापित करना है। इस योजना की टैगलाइन है—‘स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन’। 

निर्धनता रेखा से नीचे (BPL) के परिवारों की महिलाओं को निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने हेतु प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) को आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा 10 मार्च, 2016 को स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस योजना के तहत 2016-19 अवधि (3 वर्षों) में 5 करोड़ बीपीएल परिवारों को निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे तथा इस हेतु 8,000 करोड़ रु. के परिव्यय का प्रावधान किया गया है। ध्यातव्य है कि वर्ष 2018-19 के बजट में उज्ज्वला योजना का लक्ष्य पांच करोड़ से बढ़ाकर आठ करोड़ कर दिया गया है। यानी अब देश के आठ करोड़ बीपीएल परिवार इस योजना से लाभान्वित होंगे।

पीएमयूवाई योजना में बीपीएल परिवारों की महिला प्रमुख के नाम निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन दिए जाएंगे जिसमें एक सिलेंडर और प्रेशर रेगुलेटर प्रदान किया जाएगा जबकि गैस चूल्हा परिवार को खुद खरीदना होगा। इस योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को 1,600 रु. की सब्सिडी (जिसमें खाली सिलेंडर, प्रेशर रेगुलेटर, सेफ्टी होज एवं डीजीसीसी बुक की लागत तथा प्रशासनिक लागतें शामिल हैं) दी जाएगी तथा गैस चूल्हे ओर रीफिल की लागत हेतु ईएमआई सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। ध्यातव्य है कि वर्ष 2015 में केंद्र सरकार द्वारा गरीब परिवारों का नि:शुल्क एलपीजी कनेक्शन योजना को पायलट आधार पर शुरू किया गया था। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जटली ने 29 फरवरी, 2016 को अपने बजट भाषण में वर्ष 2016-17 में 1.5 करोड़ बीपीएल परिवारों की महिलाओं को निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने हेतु 2,000 करोड़ रु. के बजटीय आवंटन की घोषणा की थी और साथ ही इस योजना को आगे न्यूनतम 2 वर्ष तक जारी रखकर कुल 5 करोड़ बीपीएल परिवारों को इसमें शामिल करने का लक्ष्य रखा था। इसी के अनुसरण में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना प्रारंभ की गई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का क्रियान्वयन केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है तथा इस मंत्रालय द्वारा चलाया जाने वाला यह पहला वृहद स्तरीय कल्याणकारी कार्यक्रम है। 20 अप्रैल, 2018 को केंद्रीय पेटोलियम मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत दिये जाने वाले मुफ्त घरेलू कनेक्शन का दायरा बढ़ाते हुए विस्तारित उज्ज्वला योजना की शुरुआत की गई। विस्तारित उज्ज्वला योजना में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), 

अंत्योदय अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थी, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (एमबीसी). वन्य ग्रामवासी, चाय बागान में काम करने वाले तथा नदी द्वीप वासियों को शामिल किया गया है। इस योजना का लक्ष्य 2022 तक लाभार्थियों की संख्या 8 करोड़ करना है। 

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लिए देश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पात्र बीपीएल परिवारों की पहचान राज्यों/संघीय क्षेत्रों से सलाह करके की जाएगी। यह योजना वस्तुतः सरकार के ‘गिव बैक अभियान’ का ही संरचित रूप है जिसके लिए ‘गिव इट अप अभियान’ के माध्यम से लोगों द्वारा छोड़ी गई एलपीजी सब्सिडी राशि का उपयोग किया जाएगा। 

भारत में रसोई गैस का कनेक्शन देने की शुरुआत वर्ष 1955 में हुई थी। 60 वर्ष में हम 13 करोड़ परिवारों को ही गैस कनेक्शन उपलब्ध करवा पाए। निर्धनता रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले विपन्नता के कारण स्वच्छ एवं दक्ष ईंधन के इस माध्यम से वंचित रह गए और अस्वच्छ ईंधनों पर उन्हें निर्भर रहना पड़ा। अब इस योजना से गरीब तबका लाभान्वित होगा और वह बेहतर जीवन की तरफ बढ़ सकेगा। 

इस योजना के उद्देश्य बहुत अच्छे हैं। इस योजना के जरिए जहां महिलाओं के सशक्तीकरण एवं उनके स्वास्थ्य संरक्षण के उपाय सुनिश्चित किए गए हैं, वहीं खाना पकाने के अस्वच्छ ईंधनों के कारण भारत में होने वाली मृत्युओं की संख्या में कमी लाना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है। इसके अन्य प्रमुख उद्देश्य हैं—परम्परागत जीवाश्म ईंधनों के प्रयोग से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने में सहायता करना एवं ऐसे ईंधनों से खाना पकाने से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य खतरों को कम करना तथा ऐसे ईंधनों को जलाने से घर के भीतर उत्पन्न | वायु प्रदूषण से बच्चों में होने वाले गंभीर श्वसन रोगों की रोकथाम। 

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उद्देश्य अत्यंत पवित्र हैं। यह | एक ऐसी पहल है, जो कि मानव जीवन को तो बेहतर बनाएगी ही, पर्यावरण को भी लाभ पहुंचाएगी। इससे निर्धनों का जीवन संवरेगा और वे बेहतर भविष्य की ओर बढ़ेंगे। इसे हम सामाजिक न्याय की एक अच्छी पहल के रूप में भी देख सकते हैं। 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

7 + 15 =