प्रवासी भारतीय पर निबंध Essay on Overseas Indian

प्रवासी भारतीय पर निबंध

प्रवासी भारतीय पर निबंध  Essay on Overseas Indian अथवा प्रवासी भारतीय और भारत का विकास
अथवाभारत के विकास में सहयोगी प्रवासी भारतीय

भारत के विकास में प्रवासी भारतीय महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं, क्योंकि उनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं और उनका भावनात्मक लगाव सदैव अपने देश के प्रति बना रहता है। प्रवासी भारतीयों से अभिप्राय उन भारतीयों या भारतवंशियों से है, जो जीविका, शिक्षा अथवा किसी अन्य कारण से विदेशों में गए और वहीं व्यवस्थित हो गए। आज दुनिया के विभिन्न मुल्कों में भारतीय मूल के लोग न सिर्फ प्रवास कर रहे हैं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से वे मजबूत स्थिति में भी हैं। जहां ट्रिनिदाद, मारीशस, सूरीनाम, जमैका, ग्रेनेडा, फिजी एवं गुयाना जैसे देशों में भारतीय मूल के लोग उच्च पदों पर आसीन हैं, वहीं अनेक अमेरिकी और यूरोपीय देशों में भारतवंशियों का बोलबाला है।

यह कहना असंगत न होगा कि समूचे विश्व में शिक्षा, उद्योग,आईटी, व्यवसाय तथा चिकित्सा के क्षेत्र में भारतीयों का बोलबाला है। सारी दुनिया में भारतीय श्रम एवं मेधा का परचम लहरा रहा है। विदेशों में रह रहे इन भारतीयों का भावनात्मक लगाव भारत से बना हुआ है, उनकी जड़ें भारत से जुड़ी हुई हैं, वे भारत के हित चिंतक भी हैं। ये प्रवासी भारतीय भारत को संवारने में अप्रतिम योगदान दे सकते हैं, बशर्ते इनके साथ सम्पर्कों को नई दिशा दी जाए तथा इनके साथ सहयोग और सहभागिता की पहलों को उच्च आयाम दिए जाएं।

आज विश्व के जिस देश में भी भारतीय मूल के लोग हैं, वहां की अर्थव्यवस्था में भारतवंशी कारोबारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं उद्योगपतियों आदि की भूमिका सराही जा रही है। इन प्रवासी भारतीयों की भारत के विकास में भी विभिन्न स्तरों पर भूमिका महत्त्वपूर्ण हो सकती है। ये विदेशों में रहते हुए भी भारत के विकास में अपना योगदान सुनिश्चित कर सकते हैं, तो स्वदेश लौटकरगए निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं। देश के आर्थिक विकास में तो प्रवासी भारतीया की भूमिका बहुत ही महत्त्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है। प्रवासी भारतीयों से हमें आर्थिक संबल मिल भी रहा है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में फैले भारतवंशी विदेशों से भारत धन भेजने में शीर्ष पर हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से यह धन कहीं अधिक होता है, जिससे भारत में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ता है। प्रवासी भारतीयों के योगदान को स्पष्ट करने के उद्देश्य से यह रेखांकित करना समीचीन रहेगा कि जब-जब देश का रुपया कमजोर हुआ, प्रवासी भारतीयों द्वारा स्वदेश भेजे गए धन से उसकी स्थिति स्थिर हुई। यदि यह निवेश और बढ़ जाए तो, भारत की अर्थव्यवस्था कितनी सुदृढ़ हो सकती है, समझा जा सकता है।

प्रवासी भारतीयों द्वारा भारत के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है, इस तथ्य को समझते हुए भारत की सरकार देश की विकास यात्रा से प्रवासी भारतीयों को यथासंभव जोड़ने के लिए प्रयत्नशील भी है। वह प्रवासियों को आकर्षित करने की अनेकानेक पहले कर रही है। उनके योगदान को ध्यान में रखकर कुछ सुचिंतित पहले भी की जा रही हैं। मसलन, कुछ समय पूर्व भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से हम ‘मेक इन इंडिया’ नामक फ्लैगशिप कार्यक्रम का आगाज कर चुके हैं। यह एक वृहद अभियान है, जिसके तहत भारत में निवेश के संवर्धन के साथ व्यवसाय करने की व्यवस्थाओं को सरल बनाने हेतु अनेक उपाय किए गए हैं। इसका एक मकसद प्रवासी भारतीयों को भारत केआर्थिक विकास से जोड़ना भी है। इसी प्रकार भारत के दूसरे फ्लैगशिप कार्यक्रमों यथा—’स्किल इंडिया’ एवं ‘डिजिटल इंडिया’ आदि में भी प्रवासी भारतीयों का योगदान निर्णायक सिद्ध हो सकता है और इसके लिए सरकार प्रयत्नशील भी है।

“जब-जब देश का रुपया कमजोर हुआ, प्रवासी भारतीयों द्वारा स्वदेश भेजे गए धन से उसकी स्थिति स्थिर हुई। यदि यह निवेश और बढ़ जाए तो, भारत की अर्थव्यवस्था कितनी सुदृढ़ हो सकती है, समझा जा सकता है।”

भारत के प्रति प्रवासी भारतीयों के लगाव, जुड़ाव एवं समर्पण को बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा वर्ष 2003 से ‘प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन’ का आयोजन किया जा रहा है, जो कि प्रतिवर्ष 9 जनवरी (इसी तिथि को वर्ष 1915 में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आए थे।) को आयोजित होता है। यहां यह रेखांकित करना समीचीन रहेगा कि भारत के उद्देश्यों तथा चिंताओं को विदेशों में सही ढंग से प्रस्तुत करने तथा भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले प्रवासी भारतीयों, संस्था अथवा संगठन को हम ‘प्रवासी भारतीय सम्मान’ पुरस्कार से सम्मानित भी करते हैं, जो कि ‘प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन’ का ही हिस्सा है। वर्ष 2019 में प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन 21 जनवरी से 23 जनवरी, 2019 के मध्य वाराणसी में आयोजित किया गया। इस वर्ष की थीम ‘नए भारत के निर्माण में प्रवासी भारतीयों की भूमिका’
रही। इस आयोजन के मख्य अतिथि मारीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ थे। ध्यातव्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर ‘प्रवासी भारतीय तीर्थ दर्शन’ योजना की भी शुरुआत की।

प्रवासी भारतीयों को आकर्षित करने के उद्देश्य से कुछ और पहले भी की गई हैं। जहां उन्हें वोट देने का अधिकार प्रदान किया जा चुका है, वहीं उनके लिए ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया’ (OCI)
की शुरुआत की जा चुकी है। इस योजना के तहत पाकिस्तान, । बांग्लादेश अथवा केंद्र सरकार द्वारा सरकारी राजपत्र में निर्दिष्ट किए जाने वाले देश को छोड़कर सभी देशों के भारतीय मूल के सभी व्यक्तियों, जो कि भारत के नागरिक थे, अथवा 26 जनवरी, 1950 या उसके बाद भारत का नागरिक बनने के लिए पात्र थे, को प्रवासी भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकरण कराने की सुविधा प्रदान की गई है। पंजीकृत प्रवासी भारतीयों को बहु-प्रवेश एवं बहुआयामी भारत भ्रमण के लिए आजीवन वीजा की पात्रता है। इतना ही नहीं, उसे अप्रवासी भारतीय नागरिक के समान ही आर्थिक, वित्तीय तथा शैक्षणिक क्षेत्रों में सभी सुविधाओं के उपभोग की पात्रता है। 18 से 26 आयु वर्ग के प्रवासी भारतीय युवकों को भारत के विविध क्षेत्रों से परिचित कराने के लिए जहां ‘भारत जानो कार्यक्रम’ की शुरुआत की गई है, वहीं भारत में उच्च शिक्षा को प्रवासी भारतीय बालकों की पहुंच में लाने तथा भारत को शिक्षा केंद्र के रूप में संवर्धित करने के उद्देश्य से प्रवासी भारतीय बालकों के लिए छात्रवृत्ति योजना का सूत्रपात किया गया है।

व्यक्ति कहीं भी रहे, अपनी जड़ों एवं पूर्वजों के बारे में जानने की जिज्ञासा उसमें बनी रहती है। इसी बात को ध्यान में रखकर प्रवासी भारतीयों के लिए भारत सरकार द्वारा ‘ट्रेसिंग द रूट’ नामक योजना शुरू की गई है। यह योजना प्रवासी भारतीयों को उनके पूर्वजों एवं निवास स्थान के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे उनका लगाव भारत भूमि के प्रति बढ़ता है। प्रवासी भारतीयों के हितों को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा ‘भारतीय समुदाय कल्याण कोष’ (ICWF) की स्थापना इस उद्देश्य से की गई है कि इसके जरिए प्रवासी भारतीय नागरिकों के कल्याण से संबंधित गतिविधियों पर किए जाने वाले आकस्मिक व्यय को पूरा किया जा सके। प्रवासी रोजगार संवर्धन के लिए जहां ‘भारतीय प्रवासी रोजगार परिषद’ की स्थापना की गई है, वहीं प्रवासी भारतीयों के निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘प्रवासी भारतीय सुविधा केंद्र’ की स्थापना की गई है। इसी क्रम में भारत से बाहर जाने वाले कामगारों एवं भारतीय कामगारों की नियुक्ति चाहने वाले नियोक्ताओं को सुविधा देने के उद्देश्य से ‘ई-माइग्रेट’ नामक सुविधा का सूत्रपात किया गया है, जिससे नियोक्ता देशों को भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी एवं तेज गति से काम करने की सुविधा मिली है। ‘महात्मा गांधी प्रवासी सुरक्षा योजना’ के तहत अकुशल एवं अर्धकुशल प्रवासी भारतीय कामगारों को जीवन बीमा कवर के दायरे में लाया गया है।

प्रवासी भारतीयों को भारत से जोड़ने तथा उनकी प्रतिभा व योग्यता को सम्मान देने के उद्देश्य से विविध क्षेत्रों के भारतीय मूल के विशेषज्ञों, विद्वानों एवं ख्यातनाम लोगों को जोड़कर ‘प्रधानमंत्री वैश्विकसलाहकार परिषद’ का गठन किया गया है, जो कि महत्त्वपूर्ण एवं संवेदनशील मुद्दों पर भारत के प्रधानमंत्री को सलाह देती है। दूसरी तरफ विविध विषयों पर भारतीय मूल के लोगों को जोड़ने के उद्देश्य से ‘ग्लोबल इंडियन नेटवर्क ऑफ नॉलेज’ नामक इलेक्ट्रॉनिक मंच की स्थापना की गई है। इन सारी पहलों के साथ-साथ यह भी एक शुभ संकेत है कि इस समय देश में स्थिर सरकार होने के कारण निवेश, निर्यात और विकास दर में इजाफा हुआ है, तो स्वदेश में उद्योग, कारोबार और रोजगार की नवीन संभावनाएं सृजित हुई हैं। इस सब से भी प्रवासी भारतीय आकर्षित हुए हैं। इसका एक लाभ इस रूप में भी मिला है कि हम ‘ब्रेन ड्रेन’ की समस्या से उबर कर ‘ब्रेन गेन’ की तरफ बढ़ रहे हैं। यानी विदेशों को गढ़ने वाले प्रवासी भारतीय स्वदेश की ओर उन्मुख हुए हैं। भारत के प्रति उनका भरोसा बढ़ा है। प्रसंगवश यहां यह रेखांकित करना समीचीन रहेगा कि पूर्व में हम देश से प्रतिभाओं के पलायन के कारण काफी क्षति उठा चुके हैं। सुखद यह है कि अब इस तस्वीर का रुख बदल रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं कि दुनिया के तमाम मुल्कों में विकास की उजली इबारत लिखने वाले प्रवासी भारतीयों का योगदान भारत की मिट्टी को सोना बना सकता है। न सिर्फ आर्थिक स्तर पर, बल्कि वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीय, चिकित्सकीय एवं विनिर्माण सहित अनेक स्तरों पर इनका लाभभारत को मिल सकता है।

“विदेशों में रह रहे भारतवंशियों का भरोसा न सिर्फ भारत के प्रति बढ़ा है, बल्कि उनका लगाव और जुड़ाव भी बढ़ा है। बढ़े भी क्यों न। भारत उनकी मातृ-भूमि, पितृ-भूमि और पुण्य-भूमि जो है।”

सारतः हम यह कह सकते हैं कि भारत के विकास के संदर्भ में प्रवासी भारतीयों के योगदान की दृष्टि से एक सकारात्मक माहौल बनता दिख रहा है। प्रवासी भारतीयों को भारत से जोड़ने की, उन्हें स्वदेश के प्रति आकर्षित करने की तथा उनका सहयोग और सहभागिता बढ़ाने की जो सरकारी पहलें हो रही हैं, उनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। विदेशों में रह रहे भारतवंशियों का भरोसा न सिर्फ भारत के प्रति बढ़ा है, बल्कि उनका लगाव और जुड़ाव भी बढ़ा है। बढ़े भी क्यों न। भारत उनकी मातृ-भूमि, पितृ-भूमि और पुण्य-भूमि जो है। इसी पुण्य भमि में उनकी जड़ें समाहित हैं। फिर हमारी सनातनी भारतीय संस्कृति देश के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता की रही है, जो कि ‘वयं राष्ट्र जागृयाम’ का उद्घोष करती है। हर भारतवंशी इस सनातनी संस्कृति का कायल है। वह कहीं भी रहे राष्ट्र के प्रति सदैव जागृत रहता है। विदेशों में प्रवास करते हुए भी वह भारत के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव रखता है और देश के प्रति अपना योगदान सुनिश्चित कर राष्ट्र-ऋण से उऋण होना चाहता है।

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