ऑपरेशन विजय पर निबंध |Essay on Operation Vijay

ऑपरेशन विजय पर निबंध

ऑपरेशन विजय पर निबंध |Essay on Operation Vijay

जम्मू-कश्मीर राज्य में देश की नियंत्रण रेखा के निकट स्थित कारगिल एक सुरम्य और बर्फीला स्थान है, जिसकी ऊंचाई लगभग 15,000 फीट है। इस क्षेत्र में कई दुर्गम स्थान हैं, जहां की ऊंची-ऊंची चोटियां प्रत्येक मौसम में बर्फ से ढकी रहती हैं। वहां की प्रमुख चोटियां द्रास, बटालिक और टाइगर हिल हैं। पाकिस्तान ने आतंकवादियों तथा सेना के नौजवानों को घुसपैठियों की संज्ञा देकर भारतीय नियंत्रण रेखा का अतिक्रमण करवाकर भारतीय सीमा में गुप्त रूप से प्रवेश कराना प्रारंभ किया। फिर शनैः-शनैः अन्न और अस्त्र-शस्त्र एकत्र कर युद्ध मोर्चों के लिए बंकर बनाने लगे। तत्पश्चात इन्हीं ऊंचे-ऊंचे शिखरों पर पैर फैलाने प्रारंभ कर दिए। स्थान-स्थान पर चौकियां स्थापित कर लीं तथा उन स्थानों पर आधिपत्य दर्शाने लगे। यही कारगिल युद्ध का कारण बना। 

भारतीय सेना जाड़े के दिनों में पहाड़ों से वापस लौट आती थी। इसी का लाभ उठाकर कपट नीति से पाक सैनिकों एवं घुसपैठियों ने भारतीय सेना के बंकरों पर कब्जा कर लिया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने मोर्चे भी तैयार कर लिए थे। इस प्रकार पाकिस्तान ने युद्ध की पूरी तैयारी कर ली। मई, 1999 के प्रथम सप्ताह में कश्मीर में श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर पाकिस्तान की ओर से अचानक गोलीबारी शुरू हुई। हमारी सेना के एक बजरंग दल ने 8 मई को पाक सैनिकों के अनाधिकार चेष्टा की सूचना सैनिक मुख्यालय को दी। तत्काल दूसरी टुकड़ी भेजी गई। इससे स्पष्ट हो गया कि हमारी सीमा पर विस्तृत रूप से पाक की सेना फैल गई है। यह अविश्वसनीय आश्चर्य है कि यह लड़ाई उस समय शुरू हुई, जब भारत-पाक के बीच ‘लाहौर बस सेवा’ के अवसर पर हाथ मिलाए जा रहे थे। अर्थात पाकिस्तान ने भारतीयों के साथ धोखा किया। 

कारगिल युद्ध दो माह से अधिक दिनों तक चला। यह युद्ध 26 मई, 1999 को कारगिल सेक्टर में प्रारंभ हुआ, जो भारतीय सेना द्वारा लड़ा गया कठिनतम युद्ध था। कारगिल संघर्षों का प्रारंभ मुजाहिदीनों, तालिबानियों तथा पाकिस्तानी सैनिकों से हुआ। 26 मई और 27 मई को एकाइड लीडर अजय आहूजा तथा लेफ्टीनेंट नचिकेता के मिग-21 विमान को पाक सेना ने मार गिराया। इसके बाद भारतीय सैनिकों का खून खौल उठा। वे पूरी वीरता से लड़े और 11 जून को हमारी सेना ने बटालिक टॉप पर पुनः अपना अधिकार जमा लिया। 9 जुलाई को वायुसेना की सहायता से बटालिक और द्रास सेक्टर को पूर्णतः घुसपैठियों से मुक्त करा लिया गया। भारतीय सेना नियंत्रण रेखा पर पहुंच गई। 

इसके पश्चात द्रास, बटालिक, काकसर आदि सभी सेक्टरों पर भारतीय सेना ने अत्यधिक गोलाबारी करनी प्रारंभ कर दी। इसी प्रकार मुशकोह घाटी पर भी गोलाबारी की और प्वॉइंट 5601 एवं 5663 पर शीघ्र ही विजय प्राप्त कर ली। 15 जुलाई को भारतीय सेना ने प्वॉइंट 4575 की चोटी पर भारतीय तिरंगा फहरा दिया। इस प्रकार संपूर्ण कारगिल पर हमारे वीरों ने आधिपत्य स्थापित कर लिया। वास्तव में कारगिल में भारतीय सेना ने एक इतिहास रच डाला। 

कारगिल युद्ध का मुख्य कारण हमारे देश की रक्षा व्यवस्था एवं खुफिया एजेंसी में उचित तालमेल का अभाव था। इसी वजह से प्रारंभिक स्थिति में इसका पता नहीं चल सका। इस युद्ध में काफी क्षति हुई। हमारे देश के 23 अधिकारी समेत 398 सैनिक मरे तथा 600 घायल हुए। 

इस युद्ध के पश्चात हमारे सैनिक अधिक सतर्क और सजग रहने लगे हैं। यदि सेना को घुसपैठियों की सूचना यथासमय मिल जाती, तो उसे इतनी कठिनाई नहीं उठानी पड़ती। भारतीय सेना को इन दुर्गम क्षेत्रों में भी युद्ध का अनुभव प्राप्त हुआ। भारत सरकार को चाहिए कि वह सैनिकों को आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराए एवं रक्षा कोश की राशि अधिक से अधिक बढ़ाए। 

कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों के बलिदान से देशभक्ति का उबाल आया और बच्चा-बच्चा सैनिक बन गया। अतएव हम भारतीयों का कर्तव्य है कि मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों तक को न्योछावर करने के लिए सदैव तत्पर रहें। ऐसा करना ही उन शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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