नॉस्टैल्जिया एक व्यापार पर निबंध |Essay on Nostalgia a Business

नॉस्टैल्जिया पर निबंध

नॉस्टैल्जिया : एक व्यापार 

व्यापार के क्षेत्र में ‘नॉस्टैल्जिया’ एक बिल्कुल नया आविष्कार है। जिसने भी इसे व्यापार का विषय बनाया, निश्चय ही उसने व्यापार के क्षेत्र में महारत हासिल की। वस्तुओं का व्यापार लोग जानते-समझते हैं, लेकिन शायद ही उन्होंने नॉस्टैल्जिया के व्यापार की कल्पना की होगी। नॉस्टैल्जिया भावना का व्यापार है। मनुष्य की भावना उसकी पसंद और रुझान पर करोड़ों रुपयों की लागत लगाने का जोखिम उठाना आसान काम नहीं है, लेकिन आजकल हर जगह नॉस्टैल्जिया का व्यापार किया जा रहा है। 

‘सारेगामा’ नामक एक संगीत कंपनी ने ‘फ्लैशबैक’ नाम से एक एलबम के लिए 21 हिट गीतों का चयन किया। यह कंपनी तीसरे-चौथे दशक से संगीत का व्यापार कर रही है और इसके संग्रह में ऐसी धुनें हैं, जिनसे लगभग प्रत्येक पीढ़ी की भावनाएं गहराई से जुड़ी हुई हैं। वस्तुतः इस कंपनी ने कई युग पहले नॉस्टैल्जिया को कमाऊ गरिमा बना लिया था। हम जानते हैं कि खुशबू के बाद संगीत ही आपको तत्काल अतीत में ले जा सकता है। प्रत्येक पीढ़ी के लोगों में आयु बढ़ने के साथ-साथ अपनी घड़ी को पीछे ले जाने और अतीत के सुखद समय में लौटने की चाह बढ़ती जाती है। व्यापारियों ने इसे समझ लिया और अब वे इसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहे हैं। 

वर्तमान समय में बॉलीवुड में रीमेक और रिमिक्सेज की बहार आ गई है। दुनिया भर में ‘मुगले-आजम’ की सफलता से यह स्पष्ट है कि जितनी तेजी से हम इस सहस्राब्दी में आगे बढ़ रहे हैं, उतनी ही तेजी से एक पीढ़ी को वापस पीछे देखने की इच्छा भी है। नॉस्टैल्जिया तनाव के क्षणों में राहत देता है। यह लोगों को बढ़ती उम्र, मृत्यु और सतत परिवर्तन की चिंता से लड़ने की शक्ति भी देता है। उच्च गति वाले मॉडल टी.वी. तथा चौबीसों घंटे चलने वाले 200 चैनलों के प्रहार से भारतवासी घिरे हुए हैं। भारत की लगभग आधी आबादी युवा है, जो इस नई सुबह का स्वागत कर रही है और डिजिटल युग से लाभ कमा रही है। लेकिन अनेक लोग ऐसे हैं, जो इस संस्कृति के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पा रहे हैं, क्योंकि वे अपनी जमीन से नहीं उठ पाए हैं। 

इन लोगों को अपने अतीत की कुछ ऐसी कोमल चीजें चाहिए, जो उन्हें सुकून दे सकें। विश्व की सबसे बड़ी मार्केटिंग कंपनियों के लिए काम करने वाले एक विशेषज्ञ के अनुसार इन दिनों हम अपनी आधुनिक सुविधाओं की पैकेजिंग पुरानी शैली में कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि इससे उम्रदराज लोगों की अतीत की स्मृतियां जागेंगी। उनकी जेब में पैसे हैं, वे हमारे उत्पाद खरीदेंगे। 

स्वर्णिम स्मृतियों का बाजार दुनिया भर में लाभ का धंधा बन गया है। अमेरिका में समय-समय पर पुराने गानों की सी.डी., पुरानी तस्वीरों की पुस्तकें अथवा बचपन की याद दिलाने वाले लेखों की पुनः पैकेजिंग कर उन्हें जारी किया जाता है। दुनिया भर के लोग किशोरों पर आधारित पॉप संस्कृति को खारिज कर रहे हैं। ऐसे में व्यापार के व्यापक अवसर पर मार्केटिंग विशेषज्ञों की नजर है। इस प्रवाह के अनुकूल तथा उपभोक्ताओं की नॉस्टैल्जिया से भरी भावनाओं के अनुरूप व्यापारी एक के बाद एक ऐसे उत्पादों की लहर पैदा कर रहे हैं, जो इस समूह की युवावस्था के दौरान लोकप्रिय थे। 

अब भारतवर्ष भी नॉस्टैल्जिया की प्रवृत्ति पर नजर डाल रहा है। मजबूत अर्थव्यवस्था तथा पिछले कुछ वर्षों में अचानक आई समृद्धि के बावजूद सच्चाई यह है कि भारत के लोगों को इसे आत्मसात् करने में अभी थोड़ा समय लगेगा। जीवन में आए नाटकीय परिवर्तनों के कारण हमारी इच्छा अब मित्रों और परिवार के साथ सहज बातचीत करने तथा जीवन पर छा गए ब्रांडों एवं गति से मुक्त ठेठ देहाती जीवन जीने की होती है। 

भारतीय लोग अपनी परंपरा के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं और अतीत की स्मृतियां उन्हें धराशायी कर देती हैं। उदीयमान नॉस्ट्रैल्यिा के व्यापार से उन्हें इस कमजोरी से मुक्ति मिलती है। युवा भारत आज जहां दीप्त भविष्य के सपने देख रहा है, वहीं उम्रदराज लोग स्मृतियों के सहारे जी रहे हैं।

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