समाचार पत्र पर निबंध |Essay on Newspaper in Hindi

समाचार पत्र पर निबंध

समाचार पत्र पर निबंध |Essay on Newspaper in Hindi

वैज्ञानिक उपलब्धियों ने आज विश्व को एक मंच पर खड़ा कर दिया है। देश-विदेश के किसी कोने में घटने वाली घटनाओं से आज मानव का सीधा संबंध हो गया है। जब सोवियत संघ की सरकार अस्थिर होती है, तो उसका असर भारत पर पड़ता है। अमेरिका पाकिस्तान को सैन्य सामग्री देता है, तो उसका भी प्रभाव भारतीय उपमहाद्वीप पर पड़ता है। भारत के परमाणु परीक्षण पर अमेरिका के कान खड़े हो जाते हैं। पाकिस्तान और चीन के कलेजे पर सांप लोटने लगता है। इन दृष्टियों से स्पष्ट है कि प्रतिदिन देश-विदेश में घटने वाली घटनाओं की जानकारी रखना हर व्यक्ति के लिए आज जरूरी हो गया है। यह जानकारी रेडियो, दूरदर्शन एवं समाचार पत्रों से प्राप्त की जाती है।

रेडियो और दूरदर्शन से घटनाओं की संक्षिप्त जानकारी मिलती है। लेकिन समाचार पत्रों से घटनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। अत: समाचार पत्र की उपादेयता संचार माध्यमों में अद्वितीय है। भारत जैसे विशाल प्रजातांत्रिक देश में तो अखबार की उपादेयता अधिक बढ़ जाती है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के शब्दों में, “राज्य की तीन टांगें-सेना, विधानसभा और अदालतें हैं। उसकी चौथी टांग का नाम अखबार है। जिस राज्य में चौथी टांग टूट गई,वहां उसकी तीन टांगों के सहारे प्रजातंत्र नहीं टिक सकता।”

यूरोप को समाचार पत्र की जन्मभूमि माना जाता है। सबसे पहले अखबार का प्रकाशन हॉलैंड में सन 1526 में हुआ था। इसके बाद कई देशों में इसका प्रसार हुआ। भारत में सर्वप्रथम समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ 1826 में कलकत्ता से प्रकाशित हुआ। समाचार पत्र कई प्रकार के होते हैं; यथा-दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक इत्यादि। आज भारतवर्ष में समाचार पत्रों की बाढ़ आ गई है। विभिन्न भाषाओं को मिलाकर यहां लगभग 28,500 अखबार छपते हैं।

कुछ दैनिक अखबार इस प्रकार हैं-हिंदुस्तान, आज, दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, जनसत्ता, राष्ट्रीय सहारा, पंजाब केसरी, अमर उजाला, गांडीव, प्रभात खबर इत्यादि। समाचार पत्र के प्रकाशन हेतु एक प्रकाशक मंडल होता है। मद्रक, संवाददाता, संपादक आदि इसके महत्वपूर्ण अंग है। अखबार के संवाददाता को आधुनिक युग का नारद माना जाता है। वे घूम-घूमकर खबरें एकत्रित करते हैं। संपादक इन खबरों की उपयोगिता को परखकर प्रकाशित करता है। अतः संपादक का कार्य अत्यंत उत्तरदायित्व पूर्ण होता है। उसकी थोड़ी सी असावधानी से बड़ा अनर्थ हो सकता है।

साधारण तौर पर समाचार पत्रों को राजनीतिक खबरों के परिप्रेक्ष्य में ही देखा जाता है, परंतु इसका क्षेत्र व्यापक है। इससे सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक क्षेत्रों की भी जानकारी मिलती है। अखबारों में बेरोजगार अपना रोजगार ढूंढता है। व्यापारी बाजार भाव पर अपनी नजर रखता है। सिनेमा-प्रेमी सिनेमा का विज्ञापन देखता है। खेल-प्रेमी खेल संबंधी खबरों पर टूट पड़ता है। यात्री रेलगाड़ी की समय-सारिणी देखता है। धार्मिक व्यक्ति अध्यात्म संबंधी लेखों को बहुत चाव से पढ़ता है। अखबार समाज के हर अंग को छूता है। अखबार समाज के भविष्य का दर्पण होता है, जिसे देखकर हम यह अंदाज लगा सकते हैं कि आने वाले दिनों में व्यवस्था कौन सी करवट लेगी।

आधुनिक युग में समाचार पत्रों की ताकत काफी बढ़ गई है। समाचार पत्रों के इशारे पर बड़े-बड़े धनपति, राजनेता एवं पदाधिकारी नाचते हैं। धनपति को डर है कि कहीं अखबार के माध्यम से उसकी काली कमाई की कलई न खुल जाए। बड़े-बड़े पदाधिकारियों एवं राजनेताओं को यह डर है कि कहीं उनकी काली करतूतों को अखबार उजागर न कर दे। परंतु आज के कुछ संवाददाता अखबार की मर्यादा को कलंकित करने पर तुले हुए हैं। वे अपने क्षुद्र स्वार्थों की पूर्ति हेतु भ्रष्ट राजनेताओं, पदाधिकारियों तथा धनपतियों से सांठ-गांठ बनाए रखते हैं और उनके काले कारनामों को उजागर नहीं करते। वे कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार पदाधिकारी या राजनेता से अपना उल्लू सीधा होता न देखकर उनके बारे में उल्टी-सीधी खबरें छापकर उन्हें समाज के सामने लज्जित करते हैं।

वस्तुतः अखबारों को चाहिए कि वे बुराइयों तथा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचारों का सही चित्रण करें और क्षुद्र स्वार्थ पूर्ति से बचकर रहें। अखबार जनता और सरकार के बीच सेतु का कार्य करता है। यह सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी जनता को देता है और इन कार्यों पर हुई जन-प्रतिक्रिया सरकार तक पहुंचाता है। अखबारों की सफलता दो बातों पर निर्भर करती है एक, अखबार निष्पक्ष रहे और दूसरी, अखबार की स्वंतत्रता अक्षुण्ण रहे।

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