न्यू इंडिया पर निबंध | Essay on New India

न्यू इंडिया पर निबंध

न्यू इंडिया पर निबंध | Essay on New India

‘न्यू इंडिया’ यानी एक खुशनुमा और सशक्त ‘नया भारत’, एक ऐसा भारत जो दनिया के देशों के लिए एक आदर्श हो और यह नया भारत उनके लिए प्रेरणाप्रद हो। इस भारत में संगतियाँ ही संगतियाँ होंगी, विसंगतियों का कोई स्थान नहीं होगा। इस नए भारत के सभी निवासी साक्षर होंगे, सम्पन्न होंगे, सशक्त होंगे, स्वस्थ और सबल होंगे। यह नया भारत गरीबी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से मुक्त होगा। यहाँ का किसान खुशहाल होगा और कर्ज में डूबने के कारण उसे आत्महत्या नहीं करनी होगी। यह नया भारत ‘ज्ञान भारत’ होगा, ‘ध्यान भारत’ और ‘योग भारत’ होगा। यह अपराधमुक्त सुरक्षित और संरक्षित भारत होगा। ‘न्यू इंडिया’ के तहत एक ऐसे ही सुनहरे भारत की परिकल्पना की गई है और इसके लिए दीर्घावधि दृष्टि (vision) प्रस्तुत की चुकी है। 

जिस ‘न्यू इंडिया’ की बातें हम आज कर रहे हैं, उसकी पृष्ठभूमि तैयार करने में जिन तीन विभूतियों की अग्रणी भूमिका रही हैं, वे हैं स्वामी विवेकानंद, सरदार वल्लभ भाई पटेल एवं क्रांतिकारी भगत सिंह। स्वामी विवेकानंद नवजागरण के प्रतीक थे। उन्होंने नए भारत के लिए देश के युवकों का आह्वान किया तथा उन्हें राष्ट्रनिर्माण और देश को शक्तिशाली बनाने की प्रेरणा प्रदान की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने भारतीय युवकों को विश्व-विजय का मूल मंत्र दिया और बताया कि विश्व विजयी कैसे हुआ जा सकता है। सरदार वल्लभ भाई पटेल भी भारत के नव-निर्माण के पक्षधर थे। आजादी के बाद वह न सिर्फ नवीन भारत के निर्माता बने, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि भी तैयार की। क्रांतिकारी भगत सिंह ने भी नए भारत के निर्माण का स्वप्न देखा था और इसके लिये युवकों को प्रेरित किया था। 

जिस नए भारत की पृष्ठभूमि हमारे महापुरुषों ने तैयार की थी, वह अब एक ‘न्यू इंडिया’ के रूप में सामने आई है, जो कि नए युग की शुरूआत होगी। सरकार ने आने वाले 15 वर्षों में नए भारत के निर्माण के लिए दीर्घावधि दृष्टि (vision) डॉक्यूमेंट की शुरूआत की है। इस पन्द्रह वर्षीय विजन डॉक्यूमेंट (2017-2018 से 2031 2032) के तहत 7 सालों (2017-18 से 2013-24 तक) का रणनीतिक और 3 सालों (2017-18 से 2019-20 तक) का एक्शन एजेंडा नीति आयोग द्वारा पेश किया गया है। 

इस 15 वर्षीय भारत नव निर्माण योजना का प्रमुख उद्देश्य भारत को वर्ष 2031-32 तक समृद्ध, शिक्षित, स्वस्थ, सुरक्षित और भ्रष्टाचार से मुक्त बनाना है। इस नए भारत का निर्माण करना है, जो हर स्तर पर नूतन और अभिनव दिखाई दे तथा जहाँ का किसान खुशहाल हो, युवा के पास रोजगार हो तथा नारियाँ सशक्त हों। इसके तहत डिजिटल और कैशलेस भारत के निर्माण पर भी जोर दिया गया है। इस नए भारत की राह देश के गांवों से होकर गुजरेगी। इस प्रकार आयोजना (Planning) के एक नए युग का सूत्रपात भी होगा। 

सरकार का यह 15 वर्षीय विजन दस्तावेज भारत की काया पलटने का प्रयास है। यदि यह प्रयास सफल रहता है, तो भारत विकासशील देश नहीं कहलाएगा, बल्कि यह विकसित देशों की श्रेणी में आ जाएगा। इसके तहत अगले 15 वर्षों में देश के हर घर में शौचालय, एलपीजी, बिजली, डिजिटल कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। भारत में हर नागरिक को आर्थिक रूप से इतना सक्षम बनाया जाएगा, कि वह अपने लिए कम-से-कम एक दुपहिया वाहन खरीद सके। यह भी लक्ष्य है कि आम भारतीय नागरिक को इन 15 वर्षों में एयरकंडीशनर और आराम की दूसरी वस्तुएँ उपभोग के लिए उपलब्ध हो जाएं। इसके तहत भारत को अधिकाधिक साक्षर बनाते हुए साक्षरता को 100 प्रतिशत तक पहुँचाना है। स्वास्थ्य सेवाओं में इजाफा कर भारत को स्वस्थ और सबल बनाना है। ‘न्यू इंडिया’ के तहत जहाँ सड़क, रेलवे, समुद्र और हवाई मार्ग का विस्तृत जाल बिछाया जाना है, वहीं ‘स्वच्छ भारत’ के अंतर्गत शहरों, कस्बों और गांवों को साफ-सुथरा बनाया जाना है। इसके तहत पर्यावरण यानी पर्यावरणीय स्वच्छता पर भी विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया गया है, ताकि लोगों को साफ हवा और पानी मिल सके। 

न्यू इंडिया का रास्ता गाँवों से होकर जाता है। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि न्यू इंडिया का सपना साकार करने के लिए देश के किसान को मजबूत या सशक्त (Empower) करना जरूरी है। इसके लिए किसानों की आय दोगुनी करनी होगी, उसे कम ब्याज पर कर्ज देना होगा, ताकि वह साहूकारों के चंगुल में न फँसे। गाँवों को ‘डिजिटल गाँवों’ में तब्दील किया जाना है, तो उत्पाद केन्द्रित नीति के बजाय ‘आय केन्द्रित नीति’ को प्रोत्साहन दिया जाना है, ताकि किसान की आय में इजाफा हो सके। गाँवों का डिजिटलाइजेशन करने के लिए सरकार देश की सभी पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ रही है। हेल्थ और एजुकेशन सेक्टरों को भी डिजिटल करने पर जोर दिया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए जहाँ सरकार द्वारा ऑर्गनिक खेती पर जोर दिया जा रहा है, वहीं देश की 500 कृषि मंडियों को ‘इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट’ से जोड़ा गया है। ‘किसान संपदा योजना’ तथा ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ आदि योजनाओं से भी किसानों की स्थिति में सुधार लाने की कोशिशें की जा रही हैं। हर बूंद पर ज्यादा फसल पाने की दृष्टि से जहाँ ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ कारगर सिद्ध हो रही है, वहीं ‘कॉम्पोस्ट खाद’ पर जोर दिया गया है। कृषि क्षेत्र में महिलाओं की अच्छी संख्या को देखते हुए उनके लिए वेटिनरी और एनिमल फीड प्रशिक्षण पर जोर दिया जाना है। गाँवों की तस्वीर बदलने को प्रतिबद्ध प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि गाँवों में हर साल ऐसे प्रोग्राम आयोजित किए जाने चाहिए, जिनसे जो लोग गाँव छोड़कर शहरों में बस गए हैं, वे वापस गाँव आ सकें। यकीनन ‘न्यू इंडिया’ के तहत भारत के गाँवों की काया इस तरह पलटी जानी है कि इन पर गर्व किया जा सके। 

न्यू इंडिया का 15 वर्षीय विजन दस्तावेज बदलाव का वाहक है। यह भारत को बदलने की व्यापक दृष्टि है। डगर थोड़ी मुश्किल जरूर है, मगर असंभव नहीं। यही वह डगर है, जो भारत को विकासशील देश की श्रेणी से बाहर निकाल कर उसे विकसित देश की श्रेणी में ले जा सकती है। यह भारत के लिए गर्व और गौरव की बात होगी। तभी तो ‘न्यू इंडिया’ का सपना हमें सोने नहीं दे रहा है। 

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