राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर पर निबंध : आवश्यकता एवं उपयोग |Essay on National Register of Citizens

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर पर निबंध

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC)पर निबंध : आवश्यकता एवं उपयोग |Essay on National Register of Citizens

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने एक सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए कहा था कि राष्ट्र एक परिवार की तरह होता है तथा उसकी सीमाओं में किसी अन्य देश के नागरिक का अवैध रूप से घुसना राष्ट्र की संप्रभुता का उल्लंघन होता है। भारत के संदर्भो में बात करें तो एनआरसी इस समय वक्त की जरूरत है। ।

विगत कई वर्षों से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर अर्थात एनआरसी चर्चा में है। हाल ही में भारत सरकार द्वारा देशभर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की तथा इसके लिए सितंबर, 2020 तक राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) तैयार करने का फैसला किया है। भारत के प्रत्येक निवासी को एनपीआर में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसका मकसद देश में रहने वाले हर सामान्य निवासी की पहचान का व्यापक डाटाबेस तैयार करना है। इस डाटाबेस में जनसांख्यिकी के साथ-साथ बायोमेट्रिक जानकारियां भी होंगी। इसी डाटाबेस के आधार पर ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिजन’ (एनआरआईसी) को तैयार किया जाएगा। 

एनपीआर के लिए एक सामान्य निवासी उसे माना जाएगा जो उस स्थानीय इलाके में पिछले छह महीने या उससे अधिक समय से रह रहा हो अथवा जो उस इलाके में छह महीने या इससे अधिक समय तक रहने का इरादा रखता हो। विदित हो कि सरकार द्वारा एनपीआर तैयार कराने का फैसला ‘नागरिकता’ (नागरिकों के पंजीयन एवं राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने संबंधी) नियमावली, 2003 के नियम 3 के उपनियम-4 के तहत लिया गया है। इस एनपीआर को तैयार करने की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2020 से शुरू होकर 30 सितंबर, 2020 तक चलेगी। इसमें असम को शामिल नहीं किया गया है। क्यों वहां पहले से ही एनआरसी की प्रक्रिया चल रही है। 

यहां यह जान लेना आवश्यक है कि आखिर एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) है क्या! और इसका क्या औचित्य है? साधारण शब्दों में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens) एक क्लास अटेडेंस रजिस्टर की तरह होता है। क्लास रजिस्टर में कक्षा से संबंधित सभी बच्चों की जानकारी होती है। आपका आईडीकार्ड इस बात का प्रमाण होता है कि आप अमुक कक्षा के छात्र हैं। इसी तरह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में उन सभी भारतीय नागरिकों का नाम होता है जो असम को अपना स्थाई निवास मानते हैं। एनआरसी की शुरुआत सर्वप्रथम 1951 में 1951 की जनगणना, के बाद हुई थी। असम भारत का एक मात्र राज्य है जिसके पास अपना नागरिक रजिस्टर है। ध्यातव्य है कि 31 अगस्त, 2019 को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स की फाइनल लिस्ट जारी की गई। जिसमें 19 लाख लोग सूची में जगह बनाने में असफल रहे। 

अब सवाल यह उठता है कि आखिर एनआरसी की आवश्यकता क्यों पड़ी? गौरतलब है कि 1947 में भारत-पाकिस्तान का बंटवारा होने के बाद बड़ी संख्या में लोग असम से पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) चले गए। लेकिन लोगों के घर-परिवार वहीं रह गए और अवैध तरीके से भारत में लोगों का आना-जाना इसके बाद भी जारी रहा। ऐसे में 1979 में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) और ऑल असम गण संग्राम परिषद (एएजीएसपी) ने असम में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के खिलाफ हिंसक आंदोलन छेड़ दिया। यह आंदोलन छह वर्ष तक जारी रहा। अगस्त, 1985 में भारत सरकार और इन दोनों संगठनों के बीच असम समझौता हुआ जिसके बाद हिंसा पर रोक लगी और असम में नई सरकार का गठन हुआ। इस समझौते का एक अहम भाग यह था कि 1951 की एनआरसी सूची में संशोधन किया जाएगा। 

अब एनआरसी में स्थान न पाने वालों को देश से निष्कासित करने की बात की जा रही है, परंतु एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) को समय से सामयिक न बनाये जाने के कारण आज घुसपैठियों की संख्या 40 लाख बताई जा रही है तथा बताया जा रहा है कि 2040 तक असम में वहां के मूल निवासी अल्पसंख्यक और घुसपैठिये बहुसंख्यक हो जाएंगे जो कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा भी हो सकता है। परंतु अब सुप्रीम कोर्ट के सख्त होने पर फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, जिसमें सरकार घुसपैठियों को एनआरसी में शामिल नहीं करने की बात कह रही है परंतु एनआरसी में असम के सिर्फ ऐसे लोगों को ही भारतीय नागरिक माना जाएगा, जिनके पूर्वजों के नाम 1951 के एनआरसी में या 24 मार्च, 1971 तक के वोटर लिस्ट में मौजूद हों या भारत सरकार द्वारा जारी जरूरी अभिलेख इनके पास हो। यदि 1985 के बाद अब तक सरकार सख्त हुई होती और एनआरसी रिपोर्ट को सामयिक तैयार करती तो शायद आज यह समस्या देखने को नहीं मिलती। 

अब सवाल यह है कि असम के लिए या देशभर में जिन लोगों के नाम एनआरसी में शामिल नहीं हो पाएंगें उनका क्या होगा? क्या उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाएगा या फिर उनके लिए देश में ही कोई व्यवस्था की जाएगी? 31 दिसंबर, 2018 को असम में एनआरसी की | अंतिम सूची जारी होने के बाद भी यह प्रश्न ज्यों का त्यों बना हुआ है। यद्यपि एनआरसी से देश में रह रहे वैध तथा अवैध लोगों की पहचान हो सकेगी, किंतु अवैध प्रवासियों का क्या किया जाए इस प्रश्न का उत्तर ढूँढ़ना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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