मनरेगा योजना पर निबंध | मनरेगा के दस वर्ष 

मनरेगा योजना पर निबंध

मनरेगा योजना पर निबंध | मनरेगा के दस वर्ष 

भारत एक ग्राम प्रधान देश है और देश के इस परिवेश को ध्यान में रखकर हमारे यहां ग्रामीण विकास की परियोजनाएं संचालित की जाती हैं। मनरेगा भी एक ऐसी ही योजना है, जिसे ग्रामीण विकास को गति प्रदान करने एवं गरीबी को प्रभावी तरीके से दूर करने के उद्देश्य से शुरू किया गया। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसे लाभोन्मुख बनाने के लिए जहां इसमें प्रतिवर्ष 100 दिन की रोजगार गारंटी शामिल की गई, वहीं ‘न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948’ के प्रावधान भी शामिल किए गए। सुखद यह है कि मनरेगा ने 2 फरवरी, 2016 को अपने 10 वर्ष पूरे किए। ऐसे में ‘नरेगा’ से ‘मनरेगा’ हुई इस योजना के 10 वर्षों के सफर का मूल्यांकन करना समीचीन रहेगा।

दस वर्ष पूर्व मनरेगा की शुरुआत ‘नरेगा’ के रूप में हुई थी। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) को 5 सितंबर, 2005 को अधिसूचित कर इसके क्रियान्वयन का शुभारंभ 2 फरवरी, 2006 को अनंतपुर जिले (आंध्र प्रदेश) से देश के 200 चयनित जिलों में किया गया था। इसे 2007-08 में 130 अन्य जिलों में तथा 1 अप्रैल, 2008 से देश के शेष जिलों में विस्तारित करने के बाद 2 अक्टूबर, 2009 से इसका नामकरण ‘महात्मा गांधी नरेगा’ (मनरेगा) किया गया। 

इस प्रकार 2 फरवरी, 2016 को मनरेगा के प्रारंभ के 10. वर्ष पूर्ण हो गए हैं। विगत 10 वर्षों में मनरेगा की प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार रही हैं 

(i) कुल 3,13,844.55 करोड़ रु. का व्यय जिसमें 71 प्रतिशत राशि मनरेगा श्रमिकों को मजदूरी के रूप में दी गई।

(ii) कुल 1,980.01 करोड़ मानव दिवसों का सृजन।

(iii) कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की गतिविधियों में 65 प्रतिशत से अधिक कार्यों के साथ ग्रामों में स्थायी परिसंपत्तियों का सृजन। (iv) ग्रामीण जनता को आवश्यक रोजगार उपलब्धता के साथ ग्रामों का समग्र विकास। 

मनरेगा के तहत अब तक सभी श्रमिकों में महिलाएं अब | बढ़कर 57 प्रतिशत, अनुसूचित जाति लगभग 20 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति लगभग 17 प्रतिशत हैं। उल्लेखनीय है कि मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को आजीविका सुरक्षा उपलब्ध कराने हेतु उसके इच्छुक वयस्क सदस्य को प्रत्येक वित्त वर्ष में न्यूनतम 100 कार्य दिवसों का अकुशल श्रम रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इसके लाभार्थियों में न्यूनतम एक-तिहाई महिलाएं होने का भी प्रावधान किया गया है। इसके उद्देश्यों में सूखा, निर्वनीकरण और मृदा अपक्षरण के कारणों को दूर करते हुए सतत विकास को बढ़ावा देना भी शामिल है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय इस योजना का नोडल मंत्रालय है। इस योजना में धन को पारदर्शी एवं समयबद्ध रूप से संबंधित एजेंसियों और लाभार्थियों को उपलब्ध कराने हेतु अब ‘इलेक्ट्रॉनिक निधि प्रबंधन प्रणाली’ का उपयोग प्रारंभ कर दिया गया है। संघीय बजट 2019-20 में मनरेगा हेतु कुल 60,000 करोड़ रु. का आवंटन किया गया। 

इसमें कोई दो राय नहीं कि बीते 10 वर्षों में मनरेगा ने रोजगार के महाअभियान के रूप में अपनी उपयोगिता को तो सिद्ध किया ही है. ग्रामीण सशक्तीकरण को भी बल दिया है। इस योजना ने देश के मजदूरों का सम्मान भी बढ़ाया है। कल तक जो मजदूर असम्मानित स्थितियों से गुजरते हुए काम के लिए दूर-दूर तक पलायन करते थे या मानव तस्करों द्वारा जाल में फंसाए जाते थे, उन्हें अब गांव में ही ससम्मान काम मिल रहा है। दुनिया की यह सबसे बड़ी रोजगार योजना गांवों में बदलाव की वाहक बनी है। गांवों की सूरत मनरेगा के 10 वर्षों में बदली है। इस योजना के जरिए देश भर में श्रम का प्रकाश फैला है तथा श्रम शक्ति के बिंब हमें दिखने लगे हैं। जहां तक काम के अधिकार का सवाल है, तो इस योजना से विश्व फलक पर भारत की अलग पहचान बनी है। भारत कानूनी तौर पर रोजगार के अधिकार को मान्यता देने वाला पहला देश बन गया है। इस प्रकार हमने मनरेगा के जरिए काम के अधिकार (Right to Work) को सार्थकता प्रदान की है। 

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