मिशन इंद्रधनुष योजना पर निबंध |Essay on Mission Indradhanush Scheme

मिशन इंद्रधनुष योजना पर निबंध

मिशन इंद्रधनुष योजना पर निबंध |Essay on Mission Indradhanush Scheme

“यदि टीके से किसी रोग का इलाज संभव है, तो देश के किसी भी बच्चे को टीके का अभाव नहीं होना चाहिए।” नरेंद्र मोदी 

यकीनन मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत भारत सरकार द्वारा एक जन एवं सामाजिक आंदोलन के रूप में की गई है। यह स्वस्थ भारत के निर्माण की वह उम्दा पहल है, जिसका उद्देश्य देश के शत प्रतिशत बच्चों को टीकाकरण के दायरे में लाना है। इसमें कोई दो राय नहीं कि स्वस्थ बच्चे ही बड़े होकर राष्ट्र निर्माण में यथोचित योगदान दे सकते हैं। इसीलिए यह आवश्यक है कि टीकाकरण के माध्यम से उनकी उन बीमारियों से रक्षा की जाए, जो टीका निवारणीय होती हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत की गई है, जो कि सरकार का महत्त्वाकांक्षी मिशन होने के साथ-साथ एक जन एवं सामाजिक आंदोलन भी है। 

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा मिशन इंद्रधनुष का शुभारंभ 25 दिसंबर, 2014 को पहले राष्ट्रीय सुशासन दिवस के अवसर पर किया गया था। इस मिशन के तहत जन्म से लेकर दो साल तक के बच्चों सहित गर्भवती महिलाओं को जिन सात प्रकार की टीका निवारणीय बीमारियों के टीके लगाए जाने हैं, वे हैं—डिप्थीरिया (Diptheria), काली खांसी (Whooping Cough), टिटनेस (Tetanus), पोलियो (Polio), तपेदिक (Tu berculosis), खसरा (Measles) एवं हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B)। मिशन के तहत वर्ष 2020 तक कम से कम 90% बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, इस अभियान के तहत चयनित राज्यों में जापानी इंसेफेलाइटिस एवं हेमोफिलस इंफ्लुएंजा टाइप बी के लिए भी टीके प्रदान किए जाएंगे। 25 दिसंबर, 2014 को शुरू किया गया इस अभियान का पहला चरण अत्यंत सफल रहा। प्रथम चरण के दौरान कुल 9.4 लाख सत्रों का आयोजन किया गया तथा बच्चों सहित गर्भवती महिलाओं को दो करोड़ टीके लगाए गए। 

मिशन इंद्रधनुष के दूसरे चरण का शुभारंभ 7 अक्टूबर, 2015 को किया गया, जबकि इसके तीसरे चरण का शुभारंभ 7 अप्रैल, 2016 को हुआ। मिशन इंद्रधनुष के तीन चरणों में देश के 35 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 497 जिलों को सम्मिलित किया गया। इसका चौथा चरण 7 फरवरी, 2017 से पूर्वोत्तर राज्यों के 68 जिलों में शुरू हुआ तथा 7 अप्रैल, 2017 से 18 अन्य राज्यों के 182 जिलों में इसे शुरू किया गया। अब तक मिशन इंद्रधनुष के विभिन्न चरणों के अंतर्गत संतोषजनक प्रगति देखने को मिली है। टीकाकरण का दायरा बढ़ा है तथा समेकित बाल स्वास्थ्य एवं प्रतिरक्षीकरण सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार कवरेज में 6.7% वार्षिक का विस्तार हुआ है। 

विषय के संदर्भ में यह जान लेना उचित रहेगा कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा ‘गहन मिशन इंद्रधनुष’ (Intensified Mission Indradhanush) कार्य योजना से संबंधित विज्ञप्ति 1 अगस्त, 2017 को जारी की गई, जिसका उद्देश्य सार्वभौमिक प्रतिरक्षण के लक्ष्य को वर्ष 2018 तक प्राप्त करना था। इसका श्रीगणेश प्रधानमंत्री द्वारा अक्टूबर, 2017 में गुजरात में किया गया। अक्टूबर, 2017 और जनवरी, 2018 के बीच हर महीने सघन मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम के तहत सर्वोच्च प्राथमिकता वाले 173 जिलों में निरंतर टीकाकरण का दौर जारी रहा। सघन मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम उन चुने हुए जिलों और शहरी क्षेत्रों में चलाया जाएगा, जहां टीकाकरण कम हुआ है। ये प्राथमिकता वाले क्षेत्र राष्ट्रीय सर्वेक्षण, स्वास्थ्य प्रबंध सूचना प्रणाली डेटा एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तय किए जाएंगे। 

इसके तहत शहरी झुग्गी-झोपड़ियों और उप-केंद्रों में ऐसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां टीकाकरण या तो नहीं हुआ या उसका प्रतिशत बहुत कम है। सघन मिशन इंद्रधनुष टीकाकरण कवरेज में सुधार के लिए अंतरमंत्रालय और अंतर विभगीय समन्वय, कार्रवाई आधारित समीक्षा प्रबंध एवं सघन निगरानी और जवाबदेही | प्रणाली अपनाई जाएगी, ताकि लक्षित क्षेत्रों में प्रभावी टीकाकरण का | लक्ष्य हासिल किया जा सके। इस कार्यक्रम में 11 अन्य मंत्रालय | और विभाग भी अपना समर्थन प्रदान कर रहे हैं। जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले विभिन्न लोगों के जरिए इस कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित किया जाना है। आशा, आंगनबाड़ी वर्कर, राष्ट्रीय शहरी जीविका मिशन के अंतर्गत जिला प्रेरक ओर स्वयं सेवी संगठनों के बेहतर समन्वय एवं प्रभावी कार्यान्वयन के जरिए यह कार्यक्रम चलाया जाएगा। जिला, राज्य और केंद्रीय स्तर पर नियमित अंतराल के दौरान इस मिशन की कड़ी निगरानी की जाएगी। यह कार्यक्रम सरकार द्वारा निरीक्षण, सहायकों की निगरानी और सर्वेक्षण के जरिए चलाया जाएगा। इसकी निगरानी के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। राज्य और जिला स्तरों पर आत्मावलोकन के अंतराल पर आधारित सुधार योजना तैयार की गई है। 90% से अधिक टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करने वाले जिलों के लिए मूल्यांकन और पुरस्कार पद्धति अपनाई गई है। मीडिया प्रबंधन द्वारा जहां जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, वहीं साझीदारों व नागरिक सोसायटी संगठनों आदि के सहयोग से प्रशंसा प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। 2018-19 में इस योजना हेतु 5253.51 करोड़ के बजट का आवंटन किया गया। गौरतलब है कि इस योजना के तहत चार सालों में 3.15 करोड़ से ज्यादा बच्चों का टीकाकरण हो चुका है। 

यकीनन मिशन इंद्रधनुष एवं सघन मिशन इंद्रधनुष बच्चों और महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य के दृष्टिगत एक अच्छी पहल है। समुचित टीकाकरण के अभाव में देश के अनेक बच्चे घातक बीमारियों से ग्रस्त होकर या तो मर जाते हैं अथवा निःशक्त हो जाते हैं। बीमार या | कमजोर बच्चे बड़े होकर राष्ट्र निर्माण में उस तरह योगदान नहीं दे | पाते, जिस तरह एक स्वस्थ व्यक्ति दे सकता है। इससे राष्ट्र की, | समाज की क्षति तो होती ही है, व्यक्तिगत विकास भी प्रभावित होता | है। अब जबकि इस अभियान के कारण शत-प्रतिशत बच्चे टीकाकरण | से आच्छादित होंगे, तो उन्हें अच्छी सेहत की सौगात मिलेगी और वे | बड़े होकर राष्ट्र निर्माण में भरपूर योगदान दे सकेंगे। 

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