ज्ञान ही शक्ति है पर निबंध | Essay on Knowledge is Power in Hindi | विवेक सत्य को खोजता है

ज्ञान ही शक्ति है पर निबंध

ज्ञान ही शक्ति है पर निबंध | Essay on Knowledge is Power in Hindi |ज्ञान ही शक्ति है अथवा विवेक सत्य को खोजता है आईएएस (मुख्य परीक्षा), 2019 

“ज्ञान स्वयं एक शक्ति है।”-फ्रांसिस बेकन 

प्रसिद्ध लेखक बेकन के उक्त कथन में वह महान संदेश निहित है, जो ज्ञान की महत्ता को रेखांकित करता है। निःसंदेह, शक्ति के लिए ज्ञान आवश्यक है। ज्ञान ही वह सीढ़ी है, जो हमें शिखर तक ले जाती है। ज्ञान उत्कर्ष का मार्ग है। यह स्वयं में तो शक्ति है ही, शक्ति के नियंत्रित रचनात्मक एवं सकारात्मक प्रयोग में भी सहायक होता है। क्योंकि ज्ञान से ही विवेक पैदा होता है। इस प्रकार यह शक्ति को सही दिशा प्रदान करता है और जीवन को सुखद बनाता है। ज्ञानरूपी शक्ति हमें जड़ता से उबारती है और हममें हित-अहित के मानवीय गुण विकसित करती है। तभी तो बिना ज्ञान के मनुष्य को पशु तुल्य बताया जाता है। यानी मनुजता का परम् तत्व भी ज्ञान ही है। 

ज्ञान ही हमें जड़ से चेतन बनाता है। यदि मनुष्य के पास ज्ञान रूपी पूंजी एवं शक्ति न हो, तो उसमें और पशु में फर्क करना मुश्किल हो जाए। तभी तो चाणक्य नीति में यह कहा गया है कि भोजन, निद्रा, भय, मैथुन ये मनुष्यों में पशुओं के समान ही होते हैं, किन्तु मनुष्यों में ज्ञान विशेष रूप से अधिक है। ज्ञान रहित मनुष्य पशु के समान होते हैं। ज्ञान से ही हमें श्रेष्ठ संस्कार मिलते हैं। मानवता को समृद्ध और शक्तिशाली बनाने के सूत्र भी इसी से मिलते हे। ज्ञान को सदैव मानवीय हितों से जोड़कर देखा जाता है। ज्ञान का यही गुण भी माना गया है। ज्ञान के इसी गुण को सार्थक बनाने की दृष्टि से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने यह कहा है- “ज्ञान वही सिद्ध है, जिससे मानव का हित होता है। ऐसा ज्ञान निरर्थक है, जो मानव का कल्याण न कर उसके कष्ट को बढ़ाए।” कहने का आशय यह है कि ज्ञान से शक्ति तो अर्जित करिए, किन्तु इस शक्ति की सार्थकता जनहित और लोक-कल्याण में ही है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यदि ज्ञान-रूपी शक्ति का सकारात्मक प्रयोग न किया गया, तो इसके विध्वंसकारी परिणाम सामने आते देर नहीं लगती है। विज्ञान के संदर्भ में इसके अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं। 

“ज्ञान ही हमें जड़ से चेतन बनाता है। यदि मनुष्य के पास ज्ञान रूपी पूंजी एवं शक्ति न हो, तो उसमें और पशु में फर्क करना मुश्किल हो जाए।” 

ज्ञान हमें शक्तिशाली एवं श्रेष्ठ बनाता है। इतिहास साक्षी है कि ज्ञान के बलबूते पर ही अनेक देश और सभ्यताएं अधिक शक्तिशाली कहलाई। ज्ञान की वजह से मनुष्य ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व उन्नति की, ज्ञान से ही वह बर्बर से सभ्य की श्रेणी में आया तथा अनेक आविष्कारों, शोधों, अन्वेषणों, खोजों आदि से मानव समाज को उन्नति के पथ पर ले गया और अनेक उपलब्धियां अर्जित कर ज्ञान | की श्रेष्ठता और शक्ति को स्थापित किया। ज्ञान की शक्ति को सिर्फ | वाह्य स्वरूपों में नहीं देखना चाहिए। यह वह महान शक्ति है, जो कि | हमारी आत्मिक एवं आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक की भूमिका निभाती है तथा आत्मज्ञानी बनाकर उत्कर्ष एवं सद्गति का मार्ग प्रशस्त करती है। हमारी प्राच्य सभ्यता, जिसे आध्यात्मिक सभ्यता भी कहते हैं, अन्तर्मुखी है। यह आत्मा के अभ्युत्थान तथा अन्वेषण से सम्बद्ध है। इसके मूल में ज्ञान से आत्मोद्धार की अवधारणा निहित है। तभी तो कहा गया है-

“कोऽहं कस्त्वं कुत आयातः का ये जननी को मे तातः।” 

यानी शरीर की खुराक अन्न है और आत्मा का भोजन ज्ञान है। जिस प्रकार से अन्न शरीर को शक्तिशाली बनाता है, ठीक उसी प्रकार ज्ञान हमें आत्मिक रूप से शक्तिशाली बनाता है। 

ज्ञान को विवेक की आधारशिला भी माना गया है। यह हमें विवेकी बनाता है। विवेकी व्यक्ति अपने विवेक का प्रयोग कर शक्ति संपन्न बनाता है। मानवीय विकास में ज्ञान और विवेक का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। यदि ये नैसर्गिक तत्व मानव में न होते तो वह पाषाण काल से इस अतिआधुनिक काल में पदार्पण न कर पाता। ज्ञान ने उसे शक्ति दी और इस शक्ति के प्रयोग के सही रास्ते भी दिखाए। ज्ञान रूपी शक्ति का भंडारण करके ही मनुष्य ने असंभव को संभव किया। ऐसे गैरमामूली कारनामे कर दिखाये, जो कभी हमारी कल्पना मात्र के हिस्सा थे। हवाई जहाज से लेकर कंप्यूटर जैसी जनोपयोगी सौगातें ज्ञान की ही तो देन हैं। 

ज्ञान हर स्तर पर हमें शक्तिसंपन्न बनाता है। हमारे विकास में सहायक होता है। वैयक्तिक उन्नयन तभी संभव है जब ज्ञान रूपी पूंजी आपके पास हो। ज्ञान से ही आप विशिष्ट बनते हैं तथा आपका ज्ञान ही आपकी पहचान बनता है। यश और कीर्ति के साथ धन भी आप ज्ञान से ही कमाते हैं तथा जीवन में उन्नति के पथ पर आगे बढ़ते हैं। ज्ञान से ही हम आदरणीय बनते हैं और ज्ञान से ही अमरत्व तक को प्राप्त करते हैं। ।

सामाजिक संदर्भो में भी ज्ञान रूपी शक्ति की विशेष उपादेयता है। ज्ञानी समाज ही श्रेष्ठ समाज कहलाता है। ज्ञान का संचय करके ही समाज शक्तिशाली और सामर्थ्यवान बनता है। ज्ञान से ही समाज विकास के शिखर पर पहंचता है तथा अपनी रचनात्मकता के प्रतिमान स्थापित करता है। जो समाज जितना ही ज्ञानवान होता है, | उसकी उतनी ही प्रगति होती है। वह अपनी सभ्यता एवं शीलता के लिए तो जाना ही जाता है, ज्ञान के भंडार के कारण उसका आकलन कोटि में किया जाता है। ज्ञान से शक्ति तो आती ही है, सुख और समद्धि भी प्राप्त होती है। सामाजिक उत्थान ज्ञान से भी संभव है। जो समाज ज्ञान से दूर रहा, वह कभी असभ्यता एवं बर्बरता के दायरे से बाहर नहीं निकल पाया। 

“वस्तुतः ज्ञान तो ईश्वर का प्रकाश है, अतएव इससे ज्यादा शक्तिशाली और कुछ हो भी नहीं सकता। यह वह प्रकाश है, जो हमारे पथ को प्रशस्त कर हमें प्रगति के द्वार तक ले जाता है, यह वह शक्ति है, जो हमें आगे बढ़ने को प्रेरित करती है तथा हमारे गौरव को बढ़ाती है।” 

राष्ट्रीय संदर्भो में भी ज्ञान रूपी शक्ति के महत्त्व को नकारा नहीं जा सकता। भारत यदि धर्म गुरु कहलाया, जो अपने ज्ञान की ही बदौलत। इतिहास साक्षी है कि जब विश्व के अनेक देश असभ्यता एवं बर्बरता के अंधकार में डूबे थे, तब भारत सभ्यता के शिखर पर था। अनेक देशों ने मानवीय सभ्यता और मूल्यों का ‘क-ख-ग’ भारत से ही सीखा। भारत को यह गौरव और प्रतिष्ठा उसके ज्ञान, धर्म और दर्शन ने ही तो दिलवाई। यदि भारत के पास ज्ञान की शक्ति न होती तो वह धर्मगुरु कैसे कहलाता। अमेरिका को ही देखिए। आज यदि वह दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र है, तो अपने ज्ञान के बलबूते पर ही है। कहने का आशय यह कि ज्ञान के अभाव में किसी भी राष्ट्र की उन्नति नहीं हो सकती। ज्ञान का अभाव किसी भी राष्ट्र की उन्नति में बाधक बन सकता है। अतः राष्ट्रीय उन्नति के लिए ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। ज्ञान ही राष्ट्र को सशक्त बनाकर उसके वैश्विक सम्मान एवं प्रतिष्ठा को बढ़ाता है। यही कारण है कि सच्चे राष्ट्रनायक सदैव अपने देश की जनता को ज्ञानार्जन के लिए प्रेरित करते हैं। जब भी कोई राष्ट्र संक्रमण का शिकार होता है, अज्ञानता के अंधकार से ग्रस्त होता है तथा पतनोन्मुख होता है, तब ज्ञान ही उसे दिशा बोध करवाकर विपरीत परिस्थितियों से उबारता है। ज्ञान वह संबल है, वह शक्ति है, जो हमें प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने और उनसे उबरने की सामर्थ्य देता है और हमें रचनात्मक संस्पर्श देकर नई ऊंचाइयां प्रदान करता है। 

ज्ञान की शक्ति को संभवतः भारत ने जितना समझा-परखा, उतना किसी अन्य देश ने नहीं। यही कारण है कि हमारे धर्मग्रंथों एवं शास्त्रों आदि में ज्ञान मार्ग को श्रेष्ठ बताया गया है और इसे ईश्वर से जोड़कर देखा गया है। वास्तव में ज्ञान ईश्वर का ही तो प्रकाश है। हमारे धर्मग्रंथों में ज्ञान मार्ग की व्याख्या करते हुए कहा गया है कि जब बुद्धिमान पुरुष अपनी बुद्धि से परम-ब्रह्म के स्वरूप का निश्चय कर उसके अव्यक्त स्वरूप में केवल अपने विचारों के बल से अपने मन को स्थिर कर लेते हैं, तो उसे ज्ञान-मार्ग कहते हैं। इस मार्ग में बुद्धि या ज्ञान ही प्रमुख बल होता है और उसी की सहायता से ब्रह्म के वास्तविक स्वरूप को जानने, उनसे संबंधित रहस्य को जानने का प्रयत्न किया जाता है।

गीता में ज्ञान मार्ग को मोक्ष का मार्ग बताया गया है। श्रीकृष्ण कहते हैं—जो व्यक्ति ब्रह्म की उपासना सब इंद्रियों को नियंत्रण में रखते हुए और सर्वत्र समबुद्धि रखते हुए करते हैं, वे सब भूतों के हित में निमग्न लोग मुझे ही पाते हैं। यही मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है। 

ज्ञान मार्ग की दो प्रमुख विशेषताएं हैं—पहली यह कि इसमें ब्रह्म या परमेश्वर को अव्यक्त या निराकार माना जाता है, दूसरी यह कि इसमें बुद्धि ही प्रमुख सहायक है और इसी बुद्धि के बल पर परमेश्वर को या परम सत्य को जानने या उसके संबंध में ज्ञान प्राप्त करने का प्रयत्न किया जाता है। यह परम् ज्ञान ही मोक्ष है। यह कहा जा सकता है कि मोक्ष पूर्ण ज्ञान की वह स्थिति है, जिसमें आत्मा अपने चरम व परम लक्ष्य परमात्मा को प्राप्त कर लेती है। इस तरह हम देखते हैं कि ज्ञान में वह शक्ति है, जो परमात्मा से हमारा मिलन करवा सकती है। स्पष्ट है कि ज्ञान से ज्यादा शक्तिशाली भला और क्या हो सकता है। ज्ञान की शक्ति के दो पहलू हैं। इसके द्वारा हम सांसारिक उन्नति तो करते ही हैं, आध्यात्मिक उत्कर्ष भी प्राप्त करते हैं। 

वस्तुतः ज्ञान तो ईश्वर का प्रकाश है, अतएव इससे ज्यादा शक्तिशाली और कुछ हो भी नहीं सकता। यह वह प्रकाश है, जो हमारे पथ को प्रशस्त कर हमें प्रगति के द्वार तक ले जाता है, यह वह शक्ति है, जो हमें आगे बढ़ने को प्रेरित करती है तथा हमारे गौरव को बढ़ाती है। यह वह पूंजी है, जो हमें शक्ति-संपन्न एवं स्वावलंबी बनाती है। ज्ञान हमें विकारों से दूर रखकर पवित्र बनाने का काम करता है। इसमें वह शक्ति है, जो हमें ईश्वर से मिला सकती है। हमें जीवन में ज्ञान रूपी शक्ति का अधिक से अधिक संचय करना चाहिए। कितना सुंदर है शेक्सपियर का यह कथन- 

“ज्ञान वह पंख है, जिससे हम स्वर्ग की ओर उड़ते हैं।” 

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