जवाहर रोजगार योजना पर निबंध | Essay on Jawahar Rojgar Yojna in Hindi

जवाहर रोजगार योजना पर निबंध

जवाहर रोजगार योजना पर निबंध | Essay on Jawahar Rojgar Yojna in Hindi

भारत में विशेष रूप से युवा वर्ग अर्थात शिक्षितों की बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है। इस बेरोजगारी के कारण कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। आजीविका के अभाव में बेरोजगार युवक कई प्रकार के आपराधिक कार्यों में लिप्त हो रहे हैं। इन सभी स्थितियों को देखते हुए देश में बेरोजगारी दूर करने का एक महत्वपूर्ण उपाय जवाहर रोजगार योजना है। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार आज 30 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सरकार का लक्ष्य रहा कि देश और समाज के उत्थान के लिए गरीबी दूर की जाए। इसके लिए अनेक उपाय किए गए। देश के आर्थिक विकास हेतु अनेक योजनाएं बनाई गईं। पंचवर्षीय योजनाओं का मूल उद्देश्य देश का आर्थिक विकास ही रहा है। दरिद्रता दूर करने का पहला उपाय पंचवर्षीय योजना द्वारा शुरू किया गया। प्रत्येक पंचवर्षीय योजना में गरीबी दूर करने के कार्यक्रम पर व्यय निर्धारित किए गए हैं। 

आज समूचे विकास पर व्यय किए जाने के लिए जो राशि निर्धारित की जाती है, उसमें से एक तिहाई भाग गरीबी उन्मूलन पर खर्च किया जा रहा है। इसलिए सन 1988-1989 में समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रम बनाया गया। छठी ग्रामीण योजना में इस कार्यक्रम को अधिक विकसित किया गया। सातवीं योजना को गरीबी दूर करने का मुख्य लक्ष्य बनाया गया। इसका उद्देश्य था कि इस योजना के पूरा होने पर 25000 ग्रामीण परिवारों को लाभ मिलेंगे। लेकिन गरीबी दूर करने के लिए जिन हाथों में धन दिया गया, वह उन तक पहुंच ही नहीं सका, जिसके लिए दिया गया था। बिचौलियों ने बीच में ही उड़ा दिया। 

ऐसी स्थिति में यह विचार किया गया कि गरीबों और ग्रामीण लोगों को दी जाने वाली सहायता उन तक सही ढंग से कैसे पहुंचाई जाए। इसके लिए हमारे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 28 अप्रैल, 1989 को जवाहर रोजगार योजना की घोषणा की। यह वर्ष भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जन्म शताब्दी का वर्ष था। नेहरू जी की स्मृति बनाए रखने के लिए यह योजना ऐतिहासिक महत्व रखती है। इसका उद्देश्य है कि प्रत्येक वर्ष गरीब परिवार के लिए कम से कम एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इस योजना का प्रारंभ 2100 करोड़ रुपये से किया गया। 

प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 28 अप्रैल, 1989 को संसद के दोनों सदनों के समक्ष जवाहर रोजगार योजना की घोषणा की। उन्होंने कहा, “ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे सारे रोजगार कार्यक्रम अब जवाहर रोजगार योजना के अंतर्गत होंगे। केंद्र सरकार इसके लिए 80 प्रतिशत व्यय भार वहन करेगी। इस योजना के तहत 30 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए होगा। 3000 से 4000 जनसंख्या वाली ग्राम पंचायतों को प्रतिवर्ष 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है-ग्रामीण पंचायतों के हाथों में पर्याप्त धनराशि देना, जिससे पंचायतें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार रोजगार योजना बना सकें और उन पर धन व्यय कर सकें।” 

उन्होंने आगे कहा, “गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले भारत के 440 लाख परिवारों को देश के कोने-कोने तक इस योजना का लाभ पहुंचाया जाएगा। इस प्रकार का वित्तीय ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसमें गरीबी रेखा के नीचे जीने वाले राज्यों की जनसंख्या के अनुपात में धनराशि आवंटित की जाएगी। प्रत्येक राज्य यह राशि जिलों को सौंपेगा। जिला उस राशि का आवंटन पिछड़ेपन के अनुसार पंचायतों के प्रखंड के माध्यम से देगा। इस राशि को सीधे पंचायतों तक सौंपने का कारण यह है कि इससे बिचौलियों द्वारा बाधा उत्पन्न की जाने वाली दिक्कतें समाप्त हो जाएंगी। पहले की योजना में बिचौलियों के कारण इन राशियों का काफी बंदर-बांट हुआ था।” 

प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा, “जवाहर योजना के कारण अब पूरी राशि ग्रामीणों को उपलब्ध होगी। अगर पंच या सरपंच इस राशि का उचित व्यय नहीं करेंगे, तो ग्रामीण जनता अगले चुनाव में उन्हें सबक सिखाएगी। कांग्रेस शासित राज्यों ने इस योजना को लागू कर दिया है। इस योजना के लागू होने पर 150 से अधिक दिन रोजगार प्राप्त हो सकेगा।” 

वस्तुतः जवाहर रोजगार योजना एक ऐतिहासिक कदम है। इससे नेहरू जी के सपनों का नया भारत उदित होगा। देश में फैली बेरोजगारी और गरीबी पर निश्चित रूप से नियंत्रण पाया जा सकेगा। यह एक ठोस योजना है, जिसका इतना लाभ मिलेगा, जितने लाभ के लिए यह योजना बनाई गई है। 

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