सूचना प्रौद्योगिकी और इंटरनेट पर निबंध |Essay on information technology and internet

सूचना प्रौद्योगिकी और इंटरनेट पर निबंध

सूचना प्रौद्योगिकी और इंटरनेट पर निबंध

आज के इस वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय विकास के दौर में सूचना प्रौद्योगिकी विकसित राष्ट्रों की पहचान तो है ही, विकासशील देशों के लिए भी अपेक्षित विकास हेतु एक शुभ अवसर लेकर आई है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इंटरनेट सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंटरनेट दूरसंचार और उपग्रह प्रौद्योगिकी की सहायता से लाखों कंप्यूटरों का एक ऐसा सूचना तंत्र है, जिसमें एक पूरा पुस्तकालय, रेडियो, दूरदर्शन के ढेरों चैनल, समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं तथा जानकारियों का अंबार लगा है। इसके द्वारा अपने कंप्यूटर के सामने बैठकर की बोर्ड’ एवं ‘माउस’ की सहायता से विश्व भर की जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं। इंटरनेट से सूचनाएं प्राप्त करने के साधनों में ई-मेल, ई-कॉमर्स, टेली कॉन्फ्रेंसिंग, वीडियो आदि प्रमुख हैं। आज हम देख रहे हैं कि हमारे जीवन में सूचना क्रांति महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आई है। आज लगभग सभी प्रबुद्ध लोग इंटरनेट सेवाओं के माध्यम से कृतार्थ हो रहे हैं।

इस इंटरनेट प्रणाली का जन्म अमेरिका में शीत युद्ध के गर्भ से हुआ था। सन 1960 के दशक में सोवियत संघ के परमाणु आक्रमण से चिंतित अमेरिकी सरकार ने एक ऐसी व्यवस्था की संरचना की, जिससे अमेरिकी शक्ति किसी एक जगह पर केंद्रित नहीं रही। अमेरिका के विकेंद्रित इंटरनेट नेटवर्क से यह उम्मीद थी कि वह किसी भी आक्रमण से बचा रहेगा। इस नेटवर्क द्वारा कंप्यूटर शक्ति से संबंधित सभी सूचनाओं को संग्रहित रखा जा सकेगा। 70 के दशक में अमेरिका की रक्षा उन्नत अनुसंधान परियोजना एजेंसी ने अपने प्रयास में सफलता प्राप्त की और इस नेटवर्क का उदय हुआ। इससे कंप्यूटर के बीच बहु संयोजित पैकेज संजालों में सूचनाओं का आदान-प्रदान संभव हो सका। यही अंतर चेटिंग परियोजना परिष्कृत होकर ‘इंटरनेट’ के नाम से जानी जाती है।

अनुसंधान से विकसित प्रोटोकॉल को ‘नियंत्रण प्रोटोकॉल’ और ‘इंटरनेट प्रोटोकॉल’ कहा गया है। इंटरनेट में प्रयुक्त उपकरण भी उल्लेखनीय हैं, जो प्रयोक्ताओं को बहुरंगी सेवाओं का उपयोग करने का अवसर देते हैं। इनमें ई
मेल प्रमुख है। यह इलेक्ट्रो-डाक सर्वाधिक प्रचलित उपकरण है, जो लोगों की टेलीफोन निर्भरता को कम करता है और संवादों का आदान-प्रदान आसान बनाता है। ई-मेल दो तरह के होते हैं-इंटरनेट ई-मेल और इंटरनेट-मेल । तेजी से कम खर्च में डाक भेजने का सर्वोत्तम साधन है-ई-मेल।

हम इंटरनेट को इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं-कंप्यूटर और टेली कम्यूनिकेशन के समन्वय से जिस सूचना प्रौद्योगिकी का विकास हुआ है, उसी को ‘इंटरनेट’ कहते हैं। इंटरनेट के माध्यम से सूचनाएं एकत्र होती हैं और प्राप्त की जा सकती हैं। सन 1993 से इस इंटरनेट पर फिल्मों एवं गानों आदि की सुविधाएं भी उपलब्ध हो गई हैं। इंटरनेट अकेले मल्टी मीडिया का काम कर देता है। इसे तकनीकी भाषा में ‘वर्ल्ड वाइड वेव’ कहते हैं। यह एक उच्च स्तरीय तकनीकी विधि है, जिसकी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति को पूरी तरह से प्रशिक्षित होना पड़ता है।

इंटरनेट की उपलब्धियों पर हम विचार करते हैं तो सबसे पहले व्यावसायिक क्षेत्र पर दृष्टि डालते हैं। इंटरनेट की व्यापकता के कारण इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य के बाजार इस प्रकार के होते हैं-बी.टू, सी.टू, सी.सी., सी.टू बी. । इसके अंतर्गत व्यावसायिक और उपभोक्ता बाजार से संबंधित सारी प्रक्रियाएं हम कंप्यूटर पर पूरी करते हैं। उपभोक्ता अथवा व्यवसायी बिना परिश्रम के अल्पतम समय में व्यापारिक मामले तय कर लेते हैं। अब तो इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेस की भी व्यवस्था प्रचलित हो गई है। सभी प्रशासनिक फैसले भी अब इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटरों पर होंगे और योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए समुचित उपाय की भी जानकारी प्राप्त होगी। ग्राम पंचायतों को भी अब इंटरनेट से जोड़ने पर विचार चल रहा है। इससे ग्रामीण लोग सरलतापूर्वक सूचना प्राप्त कर सकेंगे। विश्व में प्रौद्योगिकीय सुविधाओं का सदुपयोग सभी पारंपरिक दूरियों को खत्म करने के लिए हो रहा है। अब तो व्यक्तिगत लाभ से लेकर जन कल्याण तक की दृष्टि से इंटरनेट एक उपयोगी उपलब्धि के रूप में प्रकट हो रहा है।

इंटरनेट विश्व में सभी समुदायों से संबद्ध मामलों पर विचार-विमर्श के रूप में पूरी दुनिया में सूचना का कारगर प्रसारक बन सकता है। हम इंटरनेट पर दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले अपने मित्रों से बातें कर सकते हैं। विभिन्न दुकानों में बिक रही वस्तुओं को देख सकते हैं और ऑर्डर दे सकते हैं। हम इंटरनेट पर अखबार भी पढ़ सकते हैं। दुनिया से हम सलाह मांग सकते हैं। अपने-अपने विचार पूरी दुनिया के सामने रख सकते हैं। इसके माध्यम से विश्व के किसी भी कोने में कोई भी सूचना तीव्र गति से दी जा सकती है।

एक ओर इंटरनेट से सुविधाएं प्राप्त होती हैं, तो दूसरी ओर कुछ असुविधाएं और नुकसान भी हैं। इंटरनेट से अनपेक्षित और अश्लील सूचनाएं भी प्राप्त होने लगी हैं। इससे विशेष रूप से युवा पीढ़ी को भारी नुकसान है। नई उम्र के लोगों का नैतिक पतन संभावित है। भारत सरकार ने इंटरनेट के कारण होने वाले अपराध को रोकने के लिए अक्टूबर, 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट बनाया है, लेकिन इंटरनेट का बुरा इस्तेमाल बुरे लोग ही करते हैं।

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