श्रम का महत्व पर निबंध| Essay on Importance of Labour in Hindi

श्रम का महत्व पर निबन्ध

श्रम का महत्व पर निबन्ध | Essay on Importance of Labour in Hindi

आदिम युग के मानव ने जब पहले-पहल इस पृथ्वी पर कदम रखा था, तब उसके पास न तो रहने के लिए मकान थे, न आवागमन के साधन थे और न ही पहनने के लिए वस्त्र थे। आदमी जंगली जानवरों की भांति अपना जीवन यापन करता था। पहाड़ों की कंदराएं उसके घर थे और पेड़ों की छाल वस्त्र। तब से आज तक मानव विकास की अनेक सीढ़ियों को चढ़ता हुआ इस वैज्ञानिक युग में आ गया। अब तो मानव के पास रहने के लिए गगनचुंबी अट्टालिकाएं, आवागमन के लिए हवा से बातें करते वाहन और सर्दी-गर्मी से बचाव के लिए विभिन्न वस्त्र हैं। मानव की ये सभी उपलब्धियां कठोर परिश्रम की ही देन हैं। 

सच ही कहा गया है-परिश्रम का फल मीठा होता है। संत विनोबा भावे कहते थे, “परिश्रम ही हमारा देवता है।” जिस प्रकार देवता प्रसन्न होकर वरदान देते हैं, उसी प्रकार श्रम की पूजा से भी अनेक उपलब्धियां हस्तगत हो जाती हैं। आदिकवि कालिदास पहले महामूर्ख थे, लेकिन अध्ययन में कठोर श्रम करके संस्कृत के महापंडित बन गए। जे.आर.डी. टाटा प्रारंभ में एक निर्धन शरणार्थी की तरह बिहार आए थे, लेकिन कठोर श्रम की बदौलत आज टाटा परिवार की गिनती विश्व के अग्रगण्य पूंजीपतियों में की जाती है। गामा प्रारंभ में रुग्ण शरीर के स्वामी थे, लेकिन संयमित जीवन, दृढ़ निश्चय और कठोर व्यायाम के कारण वे विश्वविख्यात पहलवान बन गए। 

वर्तमान युग प्रतिस्पर्धा का है। इसमें आए अंतराल के कारण पिछड़ जाने पर भी सफलता की मंजिल कोसों दूर चली जाती है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, आई.ए.एस., आई.पी.एस. आदि प्रतियोगी परीक्षाओं में अब प्राप्तांक की गणना दशमलव के अंकों में की जाती है। अतएव सफलता के लिए कठोर श्रम के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है। परिश्रम का महत्व दर्शाने वाले एक वैदिक मंत्र का सरलार्थ है, “जो परिश्रम करता है, इंद्र उसी की सहायता करते हैं।” महात्मा सुकरात का कहना है, “सबसे अच्छा मनुष्य वह है, जो अपनी प्रगति के लिए अधिक श्रम करता है।” सारांशतः श्रम ही सफलता की कुंजी है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

18 − one =