त्योहारों का महत्व पर निबंध-Essay on Importance of Festivals

त्योहारों का महत्व पर निबंध

त्योहारों का महत्व पर निबंध-Essay on Importance of Festivals

त्योहार सांस्कृतिक चेतना तथा मानव की उन्नत भावनाओं के प्रतीक हैं। ये जन-जीवन में जागृति के प्रेरक और आस्था के द्योतक हैं। त्योहार समष्टिगत जीवन में राष्ट्र की आशा, आकांक्षा, उत्साह एवं उमंगों के प्रदाता हैं। ये राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता भी प्रदर्शित करते हैं। यह त्योहारों की ही प्रतापी प्रथा है, जिसने भारतवर्ष को मानव भूमि से देव भूमि बना दिया। 

मानव जीवन में अनेक त्योहारों का आगमन होता रहता है। इनमें से कुछ त्योहार ऐसे हैं, जिनकी सृष्टि प्रकृति के आधार पर हुई है। कुछ त्योहारों का आधार अतीत के उन महापुरुषों का जीवन है, जिनसे समाज का अधिक हित हुआ है अथवा जिन्होंने अपने अलौकिक कार्यों से संसार को चमत्कृत कर दिया है। कुछ त्योहार सांस्कृतिक तथा कुछ त्योहार विशुद्ध धार्मिक होते हैं। कुछ त्योहार ऐसे भी हैं, जिन्हें हम राजनैतिक कह सकते हैं। 

प्रत्येक जाति एवं देश के अपने त्योहार होते हैं। ये त्योहार उस जाति एवं देश की जीवंतता के ज्वलंत प्रमाण होते हैं। अतः कोई भी जाति एवं राष्ट्र अपना सांस्कृतिक गौरव और पारंपरिक महत्व बनाए रखने के लिए इन त्योहारों को मनाना अपना पावन कर्तव्य समझता है। जो व्यक्ति, जाति या राष्ट्र सोत्साह अपने पर्वो अथवा उत्सवों को नहीं मनाता, वह जीवित होते हुए भी मृत के समान है। ऐसे व्यक्ति या जाति का कोई इतिहास नहीं होता- 

जो त्योहार अपने मनाते नहीं हैं, 

कभी सर-बुलंदी वो पाते नहीं हैं।

किसी भी समाज के तीज-त्योहार उसके लिए आनंद के प्रेरणास्रोत हैं। इन तीज-त्योहारों के अपने आदर्श हैं। प्रेम, एकता, त्याग, दान, दया तथा सेवा के आदर्श ही प्रत्येक त्योहार के प्राण होते हैं। इन्हीं आदर्शों से प्रेरित होकर वह समाज उन्नत और समृद्ध होता है। यही कारण है कि हम अपने त्योहारों को बड़े उल्लास से मनाते हैं। भारतीय जन जीवन में त्योहारों का बहुत महत्व है। इनके बिना हमारा जीवन नीरस है। त्योहार जीवन में परिवर्तन तथा उल्लास लेकर आते हैं। मानव जीवन पग-पग पर संघर्षशील तथा पीड़ा युक्त है। इस तनाव और पीड़ा को भुलाने के लिए त्योहारों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। 

प्रत्येक राष्ट्र में त्योहारों का अत्यंत महत्व है। भारत में सर्वाधिक त्योहार मनाए जाते हैं। भारत त्योहारों का देश है-यह कथन अनुचित भी नहीं है। यहां विभिन्न जाति एवं धर्म के लोग निवास करते हैं। प्रत्येक धर्म के लोग नित्य अपना-अपना उत्सव मनाते रहते हैं। इसका कारण यह है कि भारतवर्ष एक विशाल क्षेत्र, दीर्घकालीन परंपरा वाला, अध्यात्म प्रधान, अपनी संस्कृति से युक्त, ऋतु परंपरा तथा आदर्श नायकों के कर्तृत्व वाला देश है। 

भारत में दो प्रकार के त्योहार मनाए जाते हैं-धार्मिक तथा राष्ट्रीय। प्रथम वर्ग के त्योहार हमारी पौराणिक संस्कृति को प्रकट करते हैं; यथा-होली, दुर्गा पूजा, रक्षाबंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, ईद, क्रिसमस, बैसाखी आदि। दूसरे वर्ग में वे त्योहार आते हैं, जो राजनैतिक दृष्टिकोण से समृद्ध हैं तथा हमारी बौद्धिक चेतना को जागृत करते हैं; यथा-गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, शिक्षक दिवस, पर्यावरण दिवस, खेल दिवस आदि। कुछ त्योहार प्रांत विशेष में मनाए जाते हैं; यथा—बिहु, पोंगल, ओणम, लोहड़ी आदि। 

ये समस्त त्योहार भारतीय जन-जीवन में उमंग और उत्साह भरते हैं तथा जीवन को सुखमय बनाते हैं। ये त्योहार जीवन की नीरसता समाप्त करके हमारे अंदर देश-संस्कृति के प्रति लगाव और प्रेम उत्पन्न करते हैं। राजनैतिक महापुरुषों के जन्म दिवस हमें उनके आदर्शों का पालन करने की प्रेरणा देते हैं, ताकि हमारा देश उन्नति कर सके। आज भौतिकतावादी युग में त्योहारों का महत्व अधिक से अधिक बढ़ता जा रहा है।

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