आदर्श विद्यार्थी पर निबंध | Essay on Ideal Student in Hindi

Essay on Ideal Student in Hindi

आदर्श विद्यार्थी पर निबंध | Essay on Ideal Student in Hindi

‘विद्यार्थी’ का शाब्दिक अर्थ है-विद्या चाहने वाला, लेकिन सामान्य बोलचाल की भाषा में विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पढ़ने वालों को विद्यार्थी कहा जाता है। यदि विद्यार्थी में ज्ञान प्राप्ति हेतु तीव्र पिपासा हो एवं उसकी प्राप्ति हेतु तन-मन-धन से लगा हो, तो उसे ‘आदर्श विद्यार्थी’ कहते हैं। नीति शास्त्रों में आदर्श विद्यार्थी के पांच लक्षण बताए गए हैं, जो इस प्रकार हैं 

काक चेष्टा वकोध्यानं श्वान निद्रा तथैव च। 

अल्पाहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पंच लक्षणम्॥

अर्थात कम भोजन करना, घर के कार्य एवं सुख से विरक्त रहना, कुत्ते के समान निद्रा लेना, परिश्रम में कौए की तरह चेष्टा करना तथा पढ़ाई में बगुले जैसा ध्यान लगाना-ये आदर्श विद्यार्थी के पांच लक्षण हैं। इन लक्षणों का पालन करने में कष्ट तो होता ही है, लेकिन बिना कष्ट के विद्या नहीं प्राप्त होती। आदर्श विद्यार्थी का एक ही लक्ष्य होता है-ज्ञान की प्राप्ति । आलसी और आराम पसंद व्यक्ति विद्या विधान नहीं प्राप्त कर सकता। इसीलिए कहा गया है- 

सुखार्थिनः कुतो विद्या कुतोविद्यार्थिनः सुखम्। 

सुखार्थी चेत्त्यजेत् विद्या विद्यार्थी चेत्त्यजेत् सुखम्॥

अर्थात सुखार्थी को विद्या कहां और विद्यार्थी को सुख कहां? सुख चाहने वाले को विद्या छोड़ देनी चाहिए और विद्या चाहने वाले को सुख छोड़ देना चाहिए। एक आदर्श विद्यार्थी को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। इसके अलावा उसे विनम्र, आज्ञाकारी और स्वदेश-प्रेमी भी होना चाहिए। 

आदर्श विद्यार्थी में सादा जीवन और उच्च विचार होना चाहिए। वह सादा जीवन व्यतीत कर अपने माता-पिता पर बोझ नहीं बनता, जबकि आजकल के छात्र फैशन से युक्त रहना पसंद करते हैं। पढ़ाई के बजाय वे व्यर्थ की बातों में उलझे रहते हैं। विद्यार्थी को फैशन से दूर रहना चाहिए। इस प्रकार हर विद्यार्थी को यह प्रयास करना चाहिए कि वह आदर्श छात्र बन सके।

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