हॉकी पर निबंध |Essay on hockey in hindi

Essay on hockey in hindi

हॉकी पर निबंध |Essay on hockey in hindi

कहा जाता है कि जिस प्रकार क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का खेल है और फुटबॉल ब्राजील का, उसी प्रकार एक समय हॉकी को भारत का खेल माना जाता था। लेकिन आजादी मिलने के बाद खेल में राजनीति का प्रवेश हो जाने से भारतीय हॉकी में काफी गिरावट आ गई। फलतः हम हॉकी की अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा में पिछड़ते चले गए। फिर भी हॉकी भारत का एक लोकप्रिय और रोचक खेल है। भारत में इसे ‘राष्ट्रीय खेल’ का दर्जा प्राप्त है। 

हॉकी का खेल दो टीमों के बीच खेला जाता है। प्रत्येक टीम में ग्यारह ग्यारह खिलाड़ी होते हैं-एक गोलकीपर, दो फुलबैक, तीन हाफबैक और पांच सेंटर फॉरवर्ड । गोलकीपर सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से एक विशेष प्रकार के वस्त्र से सुसज्जित रहता है, ताकि उसे किसी प्रकार की चोट न लगे। खिलाड़ियों में एक कप्तान रहता है। खेल में दो निर्णायक होते हैं, जिन्हें ‘रेफरी’ कहा जाता है। हर खिलाड़ी को रेफरी के आदेशों का पालन करना पड़ता है। 

हॉकी मैच प्रारंभ होने के पूर्व दोनों कप्तानों के सामने रेफरी द्वारा सिक्का उछाला जाता है। जो कप्तान टॉस जीतता है, वह मैदान का अपना मनमाना छोर चुनता है और गेंद को पहले स्ट्राइक करता है। प्रत्येक दल के खिलाड़ियों का अपना अलग-अलग परिधान रहता है, जिसे ‘जर्सी’ कहा जाता है। जो टीम ज्यादा गोल करती है, उसकी जीत हो जाती है। 

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर हॉकी मैच का आयोजन किया जाता है। नेहरू कप, आगा खां कप, ध्यानचंद हॉकी तथा बांबे गोल्ड कप आदि राष्ट्रीय स्तर के हॉकी मैच के आयोजन हैं। हॉकी का विश्वकप, ओलंपिक पदक, एशियाड आदि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजन हैं। सन 1936 के ओलंपिक में ध्यानचंद नामक एक ऐसा भारतीय सितारा चमका, जिसे सारी दुनिया ने ‘हॉकी का जादूगर’ कहा था। 1928, 1932, 1936, 1948, 1952, 1964 तथा 1980 के ओलंपिक में हॉकी का स्वर्ण पदक जीतकर हम विश्व के सिरमौर बने। लेकिन सन 1996 में हमें ‘फेयरप्ले अवार्ड’ से ही संतोष करना पड़ा। 

हॉकी का खेल हॉकी और गेंद द्वारा खेला जाता है। इसमें भी किसी टीम के खिलाड़ी द्वारा जब हॉकी से गेंद को गोल की ओर ले जाया जाता है, तो वह क्षण अत्यंत रोमांचक होता है। कई बार दूसरी टीम का खिलाड़ी एक ही शॉट मारकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा देता है। ऐसे में गोल होने पर दर्शकों की तालियों की आवाज गूंजने लगती है। 

अन्य खेलों की तरह हॉकी के खेल में भी खिलाड़ियों का शरीर स्वस्थ एवं सबल बनता है। एक अच्छा खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होता है। किसी भी खेल में खिलाड़ियों को जाति, धर्म, संप्रदाय, भाषा आदि भूलकर प्यार बांटना चाहिए, घृणा नहीं। लेकिन जब-जब भारत-पाक के बीच हॉकी मैच के आयोजन हुए हैं, तब-तब खेल का मैदान युद्ध के मैदान में तब्दील हुआ है। यह खेल भावना के विपरीत है, अतः निंदनीय है। खिलाड़ियों को टूटे हुए राष्ट्रों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का कार्य करना चाहिए। 

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