हिमतक्षेस और भारत पर निबंध | Essay on Himtakshesa and India

हिमतक्षेस और भारत पर निबंध

हिमतक्षेस और भारत पर निबंध | Essay on Himtakshesa and India

हिमतक्षेस (IndiaOcean RimAssociation forRegional Co-operation-IORARC) ऐसे देशों का संगठन है, जो हिन्द महासागर के तटीय क्षेत्र में स्थित हैं। 

हिमतक्षेस की स्थापना मार्च 1997 में मॉरिशस में की गई थी जिसमें भारत और मॉरिशस की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों के मध्य आर्थिक और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाना था। यह संगठन के सदस्य वही देश हो सकते हैं जिनकी तटीय सीमा हिन्द महासागर से लगती हो। वर्तमान में हिमतक्षेस के 20 सदस्य हैं। उल्लेखनीय है कि कैमरोस को 2012 की मंत्रिपरिषदीय बैठक के दौरान हिमतक्षेस के 20वें सदस्य के रूप में स्वीकार किया गया। साथ ही इसमें छह वार्ताकार देश भी शामिल हैं ये हैं-मिस्र, जापान, चीन, इंग्लैंड तथा फ्रांस। अमरीका को 2012  में छठवें वार्ताकार देश के रूप में शामिल किया गया। 

हिमतक्षेस का मुख्यालय मॉरिशस में स्थापित है और इसकी सर्वोत्तम निर्णय-निर्माण संस्था इसके सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों का सम्मेलन है। हिमतक्षेस के चार्टर में निम्नलिखित उद्देश्यों का उल्लेख किया गया है- 

  1. सदस्य राष्ट्रों तथा हिंद महासागर क्षेत्र में टिकाऊ विकास तथा संतुलित विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना तथा इस क्षेत्र में आर्थिक सहयोग के लिए साझा मंच प्रदान करना। 
  2. आपसी सहमति के आधार पर क्षेत्रीय सहयोग के अन्य क्षेत्रों को चिह्नित करना। 
  3. सदस्य राष्ट्रों के मध्य उद्योग, शैक्षणिक संस्थाओं, नागरिकों के मध्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देना। 
  4. विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों में वैश्विक आर्थिक मामलों पर सदस्य राष्ट्रों के मध्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देना। 

“हिमतक्षेस के मुख्य उद्देश्य हैं, सदस्य राष्ट्रों तथा हिंद महासागर क्षेत्र में टिकाऊ विकास तथा संतुलित विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना तथा इस क्षेत्र में आर्थिक सहयोग के लिए साझा मंच प्रदान करना।” 

आज भूमण्डलीकरण का दौर है ऐसे में विभिन्न राष्ट्र अपने हितों की पूर्ति के लिए क्षेत्रीय एकीकरण व सहयोग को अत्यंत महत्त्व दे रहे हैं। शायद ही विश्व का ऐसा कोई क्षेत्र हो जहां क्षेत्रीय सहयोग के लिए संगठनात्मक प्रयास नहीं किये गये। आसियान, सार्क, अफ्रीकी संघ, यूरोपीय संघ, शंघाई सहयोग संगठन, नाफ्टा आदि की स्थापना अपने-अपने क्षेत्रों में देशों के मध्य आर्थिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक आदि मामलों में सहयोग की दृष्टि से की गई है। इस तरह के क्षेत्रीय संगठनों का प्रमुख लाभ यह है कि क्षेत्रीय स्तर पर स्थित विभिन्न राष्ट्र ऐतिहासिक, भौगोलिक तथा सांस्कृतिक निकटताओं का लाभ उठाकर सहयोग की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। हिमतक्षेस भी इसी प्रकार का क्षेत्रीय सहयोग संगठन है। 

हिमतक्षेस देशों के विदेश मंत्रियों की गुड़गांव में हुई बारहवीं बैठक अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही। इस सम्मेलन के अंत में 21 बिंदुओं पर एक घोषणा-पत्र जारी किया गया, जिसमें आपसी सहयोग के विभिन्न बिन्दुओं पर प्रकाश डाला गया। इस घोषणा पत्र का नाम गुड़गांव घोषणा-पत्र रखा गया है। इसके मुख्य बिन्दु इस प्रकार हैं- 

घोषणा पत्र में रेखांकित किया गया कि हिमतक्षेस हिन्द महासागर क्षेत्र में स्थित राष्ट्रों के लिए एक बहुपक्षीय शीर्ष मंच है। जिसका उद्देश्य है इस क्षेत्र में तथा सदस्य राष्ट्रों में जीवंत विकास तथा संतुलित विकास को बढ़ावा देना।

घोषणा पत्र में हिमतक्षेस की विभिन्न संस्थाओं को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया है।

हिमतक्षेस की 11वीं बैठक नवंबर 2011 में बंगलुरू में संपन्न हुई थी। इस बैठक में क्षेत्रीय सहयोग के जिन प्राथमिकता वाले छह क्षेत्रों को चिह्नित किया गया था वे हैं—समुद्री सुरक्षा तथा समुद्री डकैती, आपदा के खतरों में कमी, व्यापार तथा निवेश को बढ़ाना, मछली उत्पादन का प्रबंधन, शैक्षणिक एवं विज्ञान तकनीकी में सहयोग तथा पर्यटन तथा सांस्कृतिक आदान प्रदान। 

गुड़गांव घोषणा पत्र में हिन्द महासागर के भूसागरिक महत्त्व को रेखांकित किया गया तथा माना गया कि क्षेत्रीय विकास तथा वैश्विक सम्पन्नता के लिए हिन्द महासागर क्षेत्र में शांति व स्थिरता का होना आवश्यक है। इस दृष्टि से घोषणा पत्र में हिमतक्षेस व अन्य क्षेत्रीय संगठनों जैसे अफ्रीकी संघ के मध्य घनिष्ठ सहयोग पर बल दिया गया।

हिन्द महासागर में संचार व व्यापार की सुरक्षा के लिए समुद्री डकैती को समाप्त करने के लिए आपसी सहयोग की आवश्यकता है।

घोषणा पत्र में सदस्य राष्ट्रों द्वारा प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में सहयोग को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया है।

सदस्य राष्ट्रों ने व्यापार के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने और इस क्षेत्र में मुक्त व्यापार की घोषणा का समर्थन किया।

घोषणा पत्र में हिमतक्षेस के सदस्य देशों में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया और सदस्य देशों में संपर्क बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने पर बल दिया गया।

प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग हेतु एक विशेष कोष की स्थापना की गई है। 

“हिन्द महासागर का भारत के लिए विशेष महत्त्व है क्योंकि भारत की सीमाएं तीन ओर से हिन्द महासागर से घिरी हुई हैं। भारत की सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, संचार साधनों तथा महत्त्वपूर्ण खनिज पदार्थों व अन्य संसाधनों की दृष्टि से हिन्द महासागर अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। अतः हिन्द महासागर के तटीय राष्ट्रों में सहयोग बढ़ाने से न केवल इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ाया जा सकेगा वरन् भारत के सुरक्षात्मक और व्यापारिक राष्ट्रीय हितों की पूर्ति हो सकेगी।” 

भारत के संबंध में हिमतक्षेस का महत्त्व-

हिन्द महासागर का भारत के लिए विशेष महत्त्व है क्योंकि भारत की सीमाएं तीन ओर से हिन्द महासागर से घिरी हुई हैं। भारत की सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, संचार साधनों तथा महत्त्वपूर्ण खनिज पदार्थों व अन्य संसाधनों की दृष्टि से हिन्द महासागर अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। अतः हिन्द महासागर के तटीय राष्ट्रों में सहयोग बढ़ाने से न केवल इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ाया जा सकेगा वरन् भारत के सुरक्षात्मक और व्यापारिक राष्ट्रीय हितों की पूर्ति हो सकेगी।

हिन्द महासागर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और संचार की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उल्लेखनीय है कि यह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा समुद्र है। इससे विश्व का आधा जहाजी व्यापार तथा दो-तिहाई तेल का व्यापार होता है।

हिन्द महासागर तटीय क्षेत्र में स्थित देशों में से कई देश तकनीकी आर्थिक विकास तथा मानव क्षमता की दृष्टि से समृद्ध हैं। अतः इस क्षेत्र के देशों में विकास तथा सहयोग की अपार संभावनाए मौजूद हैं। 

हिन्द महासागर सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह क्षेत्र वैश्विक शांति व स्थिरता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए हिन्द महासागर विश्व की प्रमुख शक्तियों अमेरिका, चीन भारत तथा आस्ट्रेलिया के मध्य सामरिक प्रतियोगिता का क्षेत्र है।

हिन्द महासागर सामरिक महत्त्व के महत्त्वपूर्ण खनिज पदार्थों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का भण्डार है। 

यद्यपि हिमतक्षेस महत्त्वपूर्ण संगठन के रूप में उभर रहा है परंतु है इसकी कुछ कमजोरियां भी हैं जैसे-

प्रथम, अभी तक शिखर सम्मेलनों की व्यवस्था नहीं हो सकी है। द्वितीय, क्षेत्रीय सहयोग और एकीकरण के लिए सदस्य देशों में अपेक्षित सुविधाओं का अभाव है और तृतीय, हिमतक्षेस देशों के मध्य आपसी व्यापार उनके अन्य देशों के व्यापार की तुलना में कम है। 

यदि इन कमजोरियों को दूर किया जा सका तो निश्चय है हिमतक्षेस अपने क्षेत्र में समृद्धि, विकास और सम्पन्नता लाने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 

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