स्वास्थ्य पर निबंध |Essay on Health in Hindi

स्वास्थ्य पर निबंध

स्वास्थ्य पर निबंध |Essay on Health in Hindi

उपनिषदों में एक अत्यंत सुंदर रूपक है, “शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है, इंद्रियां घोड़े हैं और जीवात्मा इसका रथी है, जो मोक्ष रूपी लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।” इस दृष्टि से लक्ष्य प्राप्ति का प्रमुख साधन है यह शरीर- 

साधन धाम मोक्ष कर द्वारा। 

पाइ न जेहि परलोक सुधारा॥

ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य की-तन-मन के स्वस्थ रहने की उपयोगिता है। इसीलिए विभिन्न शास्त्रों में स्वास्थ्य के बारे में लिखा है 

धर्मार्थकाममोक्षाणां आरोग्यं मूलमुत्तमम्। 

    शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।

उपरोक्त श्लोकों से स्पष्ट है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष साधन ही मानव-जीवन का मूल उद्देश्य है, जिसे मानव स्वस्थ रहकर ही प्राप्त कर सकता है। एक अस्वस्थ व्यक्ति न तो अपना बोझ उठा सकता है और न ही देश का। उसे तो अपना ही जीवन भार स्वरूप लगता है। अस्वस्थ व्यक्ति को छप्पन भोगों से पूर्ण थाली कारतूस की गोली के समान लगती है एवं कश्मीर की वादियों की मनोरम छटा श्मशान सी लगती है। ऐसे मनुष्य को संगीत की मधुर लहरी कर्ण कटु लगती है। पृथ्वी जो वास्तव में स्वर्ग है, उसके लिए नरक बन जाती है। इसीलिए कहा गया है- वीर भोग्या वसुंधरा। 

एक सेठ के लिए ये सभी साधन व्यर्थ हैं। वह न तो रसगुल्ले की मिठास का आनंद ले सकता है और न ही गरम पकौड़ियों का चटपटा स्वाद चख सकता है। दूसरी ओर गरीब आदमी अपने मजबूत शरीर से मेहनत करके दो समय की रोटी और इज्जत कमा सकते हैं। अतः हम यह कह सकते हैं कि स्वास्थ्य अमीरों के लिए वरदान और गरीबों के लिए संपत्ति है। 

सामान्य भाषा में लोग कहते हैं-स्वास्थ्य ही धन है। लेकिन विद्वानों के अनुसार स्वास्थ्य का महत्व धन से भी ज्यादा है। धन श्रेष्ठ है, विद्या श्रेष्ठतर है और स्वास्थ्य श्रेष्ठतम है। विद्या के बिना धन विधुर है और स्वास्थ्य के बिना धन एवं विद्या दोनों ही निष्क्रिय हैं। अतएव हमें हर कीमत पर अपने स्वास्थ्य की रक्षा करनी चाहिए। अब प्रश्न उठता है कि इस अमूल्य संपत्ति की रक्षा कैसे करें? इस संबंध में किसी पाश्चात्य चिंतक का विचार है 

Early to bed and early to rise, 

Makes a man healthy, wealthy and wise.

अर्थात जल्दी सोने और जल्दी जागने से मनुष्य स्वस्थ, संपन्न एवं बुद्धिमान बनता है। इसके अतिरिक्त मनुष्य को स्वास्थ्य की रक्षा हेतु अपने भोजन तथा रहन-सहन पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। 

भोजन सादा एवं पौष्टिक होना चाहिए। गांधी जी अपनी आत्मकथा में लिखते हैं, “जो जीभ के स्वाद में पड़ा, उसका स्वास्थ्य अवश्य नष्ट हुआ।” स्वास्थ्य का व्यायाम के साथ भी गहरा संबंध है। व्यायाम स्वास्थ्य की कुंजी है। अतः व्यायाम को हमें अपने दैनिक जीवन का एक अंग बना लेना चाहिए। प्रातःभ्रमण को सबसे अच्छा व्यायाम माना गया है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के खेल खेलने से भी शरीर स्वस्थ एवं सुगठित होता है। 

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