हवाला कांड पर निबंध |Essay on Hawala Scandal in Hindi

हवाला कांड पर निबंध

हवाला कांड पर निबंध |Essay on Hawala Scandal in Hindi

आर्य संस्कृति विश्व की सर्वोत्तम संस्कृति है। इस आर्य संस्कृति का मूल ही धर्म है। यह संस्कृति धर्मयुक्त आचरण करने वाले लोगों का सम्मान करती है और धर्म विरोधियों को प्रताड़ित करती है। हिमालय के ऋषियों ने भारत में अपने आदर्शों द्वारा प्राणवायु का संचार किया है। भगवान श्रीकृष्ण की कूटनीति ने अनेक वर्षों तक विदेशी आक्रमणकारी शासकों को भारत भूमि से दूर रहने पर बाध्य किया। अनेक वर्षों की परतंत्रता भी भारतीयों को अपनी संस्कृति से दूर न कर सकी। किंतु स्वतंत्रता के सूर्य ने संस्कृति श्रद्धा से हमें पथभ्रष्ट कर दिया। राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाला सेठ भामा शाह भारत के आकाश में ध्रुव तारे की तरह अपना नाम अमर कर गया, किंतु आज के धन्ना सेठ देशद्रोह के कारण कलंकित हो रहे हैं। 

‘हवाला’ का तात्पर्य अवैध आदान-प्रदान या लेन-देन है। हवाला किए व्यक्ति को अवैधानिक ढंग से धन प्रदान करना ही हवाला का आशय है। हवाला का अर्थ है-विदेशी मुद्रा का विधि विरुद्ध हस्तांतरण। अभिकर्ता इस हवाला कारोबार (लेन-देन) का मुख्य कर्ता होता है। इसी कारण इस कारोबार का नाम हवाला प्रचलित हो गया। हवाला कारोबार विदेशी मुद्रा नियमन अधिनियम ‘फेरा’ तथा अन्य अनेक टैक्स कानून का उल्लंघन करके अपना हित साधता है। अधिकृत अभिकर्ता के द्वारा ही विदेशी मुद्रा फेरा विधि के अंतर्गत प्राप्त की जा सकती है। अधिकृत अभिकर्ता सभी कारोबारियों को पूर्ण लाभ नहीं पहुंचा सकता। यही कारण है कि लोग हवाला कारोबार में लिप्त हैं। 

हवाला कारोबार में लोग कर न देकर अवैधानिक अंतरण करके फेरा विधि का उल्लंघन करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक आवेदन करने वाले अभिकर्ता को विदेशी विनिमय के लिए व्यवहार करने को विदेशी मुद्रा नियमन अधिनियम के अनुसार अधिकृत कर सकता है। अधिकृत व्यापारी रिजर्व बैंक की शर्तों के अनुसार ही कार्य करेगा, जो रिजर्व बैंक द्वारा उसे जारी की गई हो। फेरा के उल्लंघन पर अर्थ दंड एवं सामान्य दंड हो सकते हैं। सामान्य दंड 7 वर्ष तक कारावास तथा अर्थ दंड 5,000 से 25,000 रुपये तक किए जा सकते हैं। 

हवाला कारोबार में तीन पक्ष कार्य करते हैं—एक हवाला कारोबार की इच्छा रखने वाला व्यक्ति, दूसरा अभिकर्ता अर्थात मुद्रा का प्रबंध करने वाला व्यक्ति और तीसरा मुद्रा प्राप्त करने वाला व्यक्ति। 

अधिक मुद्रा प्राप्ति के लिए निर्यात व्यवसाय में लिप्त कंपनियां हवाला कारोबार को सबल बनाती हैं। भारत में हवाला कारोबार ने सत्तर के दशक से विशेष रूप से अपने पांव पसारने शुरू किए। क्योंकि इस काल में खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीयों ने हवाला अभिकर्ता के द्वारा धन अपने परिवार को भारत में भेजना आरंभ कर दिया था। नरसिंह राव सरकार के उदारीकरण ने हवाला लेन देन को हवा दी, जिससे यह शिखर की ओर बढ़ने लगा। प्रतिवर्ष हवाला लेन देन से भारत को 5 अरब डालर की क्षति होती है। भारत की अर्थ व्यवस्था में काले धन का कारोबार आकाश को छू रहा है। इसे हवाला का हमला शक्ति दे रहा है। लोगों को फेरा कानून का उल्लंघन करने में दंड का भय नहीं सताता, क्योंकि विधि रक्षक उन्हें संरक्षण प्रदान करते हैं। 

काली मुद्रा को श्वेत मुद्रा में बदलने का व्यापारियों और राजनेताओं का स्वप्न हवाला कारोबार ने साकार कर दिया है। हवाला भारत के हृदय को नष्ट कर रहा है। सन 1996 में भारत सरकार ने हवाला शस्त्रों का सामना शासन शस्त्रों अर्थात नियमों से किया है। सरकार के इस शस्त्र से अनेक उद्योगपति, राजनेता एवं प्रशासक घायल हो गए थे। उनकी छवि धूमिल हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने सी.बी.आई. के चक्र से हवाला को निस्तेज कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने कहा, “उसकी रुचि इसमें नहीं है कि आरोप क्या है, किसके विरुद्ध है और वह कितना गंभीर है। उसकी रुचि इसमें है कि जो भी आरोप है और जिसके विरुद्ध है, उसकी पूर्ण जांच हो तथा उसमें विधि मापदंडों का प्रयोग हो।” फिर सी.बी.आई. ने हवाला को नष्ट करने के लिए चक्रव्यूह रचा।

सी.बी.आई. ने अशफाक हुसैन लोन एवं शहाबुद्दीन गौरी को 25 मार्च, 1991 को गिरफ्तार कर लिया। जांच के बाद उन्हें हवाला का आरोपी सिद्ध कर दिया। शहाबुद्दीन गौरी जे.एन.यू. का शोधार्थी था। वह जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट को हवाला धन पहुंचाने का कार्य करता था। उसे अप्रैल, 1991 में गिरफ्तार किया गया। मूलचंद (हवाला सम्राट), मुहम्मद शाहिद, रईस अहमद, शंभुनाथ शर्मा, किशोर ज्वैलर्स एवं जैन बंधुओं तक जाने का मार्ग शहाबुद्दीन गौरी की सूचना से मिला। सी.बी.आई. के डी.आई.जी. ओ.पी. शर्मा द्वारा जे.के. जैन, एस.के. जैन एवं बी.आर. जैन की छानबीन करके छापा मारा गया। ऐसे में 68 करोड़ रुपये के अवैधानिक लेन-देन का सूत्र मिला। 15 लाख के इंदिरा विकास पत्र, दो डायरियां, 2 लाख डॉलर तथा 50 लाख रुपये जे.के. जैन से प्राप्त हुए। 3 मई, 1991 को एस.के. जैन के यहां से 90 लाख रुपये एवं दो डायरियां प्राप्त हुईं। इसी दौरान विजय रामाराव सी.बी.आई. के निदेशक बनकर आए। 

राम जेठमलानी ने 1 अगस्त, 1993 को जैन बंधुओं को दंड दिलाने के लिए प्रधानमंत्री तथा वित्तमंत्री को पत्र भेजे। अक्टूबर, 1993 को ‘कालचक्र’ के संपादक विनीत नारायण, प्रशांत भूषण (वकील) तथा कामिनी जायसवाल (वकील) ने उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका प्रस्तुत कर दी। 1 जनवरी, 1994 को सी.बी.आई. ने डायरियों के अनुसार 36 राजनेताओं से पूछताछ की। विशेष न्यायाधीश गुप्ता के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी एवं शरद यादव ने संसद की सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया। अनेक राजनेताओं ने डायरियों में नाम होने के कारण अपने पद त्याग दिए। तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने कहा, “कानून अपना कार्य करेगा।” अनेक राजनेताओं को न्यायालय से जमानत लेनी पड़ी। हवाला के आरोप में शासक-प्रशासक फंस गए। हवाला का शिकंजा उन पर कसता चला गया। 

जैन की डायरी के अनुसार हवाला का हलाहल पीने वालों में अग्रणी थे-अधिकतम धन लेने वाले राजनेता (19 करोड़), उद्योगपति (10.5 करोड़) तथा प्रशासक (90 लाख)। 

हवाला के तरकस से विषैले बाण आतंकवादियों द्वारा अधिक चलाए गए। पाकिस्तान हवाला धन को भारत में हवा दे रहा था। हवाला कांड एक अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र है। यह कोई साधारण मामला नहीं है। हवाला शासकों तथा प्रशासकों को क्रय करके भारत की संस्कृति को नष्ट करना चाहता है। हमें अपने मूल्यों को पुन: स्थापित करना चाहिए, ताकि हमारा देश स्वच्छ और स्वतंत्र बन सके।

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