GATT (general agreement on tariff and trade) पर निबंध

GATT (general agreement on tariff and trade) पर निबंध

GATT (general agreement on tariff and trade) पर निबंध

द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात विश्व व्यापार में एक पक्षीय विकास प्रारंभ हुआ। अमेरिकी प्रभाव बढ़कर डॉलर की स्थिति निरंतर सुदृढ़ हुई। विकासशील और अविकसित राष्ट्रों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। विभिन्न देशों ने एकजुट होकर इस विषय पर सबसे पहले ब्रटेन वुड में सन 1944 में चर्चा की। परिणाम स्वरूप अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन की स्थापना का प्रस्ताव हुआ- 

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना का उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों की अंतर्राष्ट्रीय तरलता की अल्पकालीन समस्याओं का निवारण है। 

अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय पूंजी विनियोग को प्रोत्साहन देना, दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराना तथा सदस्य राष्ट्रों के पुनर्निर्माण और विकास हेतु सहयोग देना है। 

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन का उद्देश्य व्यापार को नियमित करने के लिए उदार व्यापारिक व्यवस्था को विकसित करना है, परंतु यह संगठन आज तक निर्मित नहीं हो पाया है। 

सन 1947 में क्यूबा की राजधानी हवाना में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। विभिन्न राष्ट्रों के पारस्परिक व्यापारिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता हुआ, जिसे ‘गैट’ कहते हैं। जनवरी 1948 से इसे स्थायी अंतर्राष्ट्रीय रूप दिया गया है। गैट का मुख्यालय जेनेवा में है। गैट एक ऐसा अंतर्राष्ट्रीय मंच है, जिसमें विश्व व्यापार के विकास एवं उसमें अवरोधक तत्वों के निराकरण का प्रयास किया जाता है। प्रशुल्क संबंधी प्रभावी कार्य-योजना तैयार की जाती है। लिप्से एवं स्टाइलट के अनुसार युद्धोपरांत विश्व के सर्वाधिक उल्लेखनीय प्राप्तियों में प्रशुल्क और व्यापार विषयक यह समझौता बहुत महत्वपूर्ण है। इसके अंतर्गत सभी देश समय-समय पर मिलते हैं और प्रशुल्कों में कटौती के प्रश्न पर द्विपक्षीय वार्ता करते हैं। 

गैट का मुख्य उद्देश्य प्रशुल्क दरों को न्यूनतम करना तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के विकास में आने वाली कठिनाइयों को दूर करके निम्नलिखित पांच प्रकार के लक्ष्य को प्राप्त करना है- 

सदस्य राष्ट्रों के नागरिकों का जीवन स्तर उन्नत करना। ।

पूर्ण रोजगार की दिशा में अर्थ व्यवस्था को अग्रसर करना। 

वास्तविक आय एवं प्रभावपूर्ण मांग में वृद्धि करना। ।

विश्व में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और उत्पादन को बढ़ावा देना।

विश्व में उपलब्ध संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग करना। 

कोई भी राष्ट्र इसकी सदस्यता ग्रहण कर सकता है। किसी भी नये राष्ट्र को सदस्य बनाने के लिए वर्तमान दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। अब इसके सदस्य राष्ट्रों की संख्या 132 तक जा पहुंची है। 

गैट के मुख्य कार्य एवं संचालन के आधारभूत सिद्धांत इस प्रकार हैं-

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में पक्षपातपूर्ण व्यवहार के समापन तथा प्रशुल्क दरों एवं व्यापारिक प्रतिबंधों से रहित व्यापार व्यवस्था को प्राप्त करना। 

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में मात्रात्मक प्रतिबंधों या आयात कोटा प्रणाली का प्रचलन पूर्णरूपेण अनुचित एवं निंदनीय है। 

सदस्य राष्ट्रों के पारस्परिक विचार-विनिमय एवं हित तथा बाधाओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रशुल्क दरों में कमी करने हेतु नीति अपनानी चाहिए।

यदि दो राष्ट्रों के मध्य प्रशुल्क दरों में कटौती संबंधी कोई समझौता हो जाता है, तो उसके अंतर्गत प्रदत्त समस्त रियायतें अन्य सदस्य राष्ट्रों को स्वतः मिल जाती हैं। इसे सबसे अधिक प्रिय देश का सिद्धांत कहा जाता है। यदि सर्वाधिक प्रिय देश की दरें घटा दी जाती हैं, तो प्राथमिकता में स्वतः कमी आ जाएगी। प्रशुल्क की जो दरें अनुसूची में एक बार सम्मिलित कर ली जाती हैं, उसमें पुनः वृद्धि करना संभव नहीं होता। 

गैट की स्थापना के बाद अब तक कई स्थानों पर इसके अधिवेशन हो चुके हैं। इन अधिवेशनों में कई लक्ष्यों को निर्धारित किया गया है, ताकि विश्व के सभी भागों में कम मूल्यों पर वस्तुएं उपलब्ध हो सकें।

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