गाँधी जयंती पर निबंध |Essay on Gandhi Jyanti in Hindi

गाँधी जयंती निबंध

गाँधी जयंती निबंध |Essay on Gandhi Jyanti in Hindi

महान व्यक्तियों का जन्मदिन ही उनकी ‘जयंती’ कहलाता है; यथा-25 मई बुद्ध जयंती, 13 अप्रैल महावीर जयंती, 14 अप्रैल अंबेडकर जयंती और 2 अक्टूबर गांधी जयंती इत्यादि। महान व्यक्तियों की जयंती अत्यंत धूमधाम से मनाई जाती है। इसके पीछे यह प्रमुख उद्देश्य होता है कि उनके महान कार्यों एवं गुणों को जन-जन तक पहुंचाया जाए। 

2 अक्टूबर हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिन है। इसीलिए देश भर में ‘गांधी जयंती’ एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाई जाती है। इस दिन शिक्षण संस्थाओं एवं सरकारी कार्यालयों में सार्वजनिक छुट्टी रहती है। स्कूल-कॉलेज के छात्रों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं। गांव एवं शहर के गली-मुहल्लों विशेषकर हरिजन बस्तियों की साफ-सफाई की जाती है। दरिद्र नारायण के बीच भोजन तथा वस्त्र आदि बांटे जाते हैं। चरखों पर सूत काता जाता है एवं भजन आदि गाए जाते हैं।

गांधी जयंती विद्यालयों तथा सरकारी संस्थाओं में बहुत धूमधाम के साथ मनाई जाती है। इस अवसर पर सभा का आयोजन किया जाता है। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि द्वारा गांधी जी की मूर्ति अथवा प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाता है। उसके बाद श्रद्धालुओं द्वारा बारी-बारी से उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की जाती है। स्थानीय कलाकारों द्वारा गांधी जी के प्रिय भजन ‘ईश्वर अल्लाह तेरे नाम, सबको सन्मति दे भगवान’ तथा ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये, जे पीर परायी जाने रे, पर दुःखे उपकार करे जो मन अभिमान न आने रे’ गाए जाते हैं। 

आज हिंसा और अशांति से त्रस्त इस विश्व में गांधीवाद के सहारे ही शांति लाई जा सकती है। गांधीवाद की बुनियाद पर ही दक्षिण अफ्रीका को आजादी मिली। दक्षिण अफ्रीका के नेता नेल्सन मंडेला का कहना है, “जब जब मुझमें आत्मबल की कमी महसूस होती है, तब-तब मैं दिल्ली स्थित बापू की समाधि के समीप बैठकर इसे पुनः प्राप्त कर लेता हूं।” 

इस प्रकार गांधी जी संपूर्ण विश्व के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। आज भी हमारे समाज में गांधीवादी विचारों की काफी मान्यता है। लोग गांधीवाद को अपनाकर अपने चित्त में शांति प्राप्त करते हैं। गांधीवाद वह औषधि है, जिसके सेवन से समाज में सुख-शांति व्याप्त होती है। गांधीवाद के सामने हिटलरवाद शर्मिंदा हो जाता है यह हम दिन-प्रतिदिन देख रहे हैं। 

गांधी जयंती पर आज विशेष रूप से विचारणीय है कि स्वतंत्र भारत का जो स्वप्न गांधी जी ने जैसा देखा था, क्या वैसा ही है उनका भारत । क्या इस देश से जाति प्रथा समाप्त हुई है? क्या हम एक-दूसरे के धर्म और उसकी विचारधारा का आदर करते हैं? क्या अहिंसा और शांति के प्रति हम सब निष्ठावान हैं ? क्या हममें यह संकल्प है कि जो भी होगा, हम बांटकर खाएंगे, किसी भी मूल्य पर अपनी अस्मिता की गरिमा को सदा बनाए रखेंगे और उन्हें नहीं भूलेंगे, जिनके बलिदान से हमें आजादी मिली है? सही संदर्भो में हम समझ गए हैं इसका अर्थ कि कोई एक गाल पर मारे, तो उसके सामने दूसरा गाल कर दो? 

आज हमारे देश में सर्वत्र अराजकता है। भाई-भाई एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं। आतंकवादी और अलगाववादी शक्तियां देश को खंडित करने पर तुली हुई हैं। ऐसे में जगह-जगह गांधी जयंती मनाकर जनमानस के बीच गांधीवाद का प्रचार करके इन समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है।

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