चौथी औद्योगिक क्रांति पर निबंध |आकार लेती चौथी औद्योगिक क्रांति और भारत 

चौथी औद्योगिक क्रांति पर निबंध |आकार लेती चौथी औद्योगिक क्रांति और भारत | Essay on Fourth Industrial Revolution

इंसान सदैव से सृजनात्मक प्रवृत्ति का जीव रहा है, उसने तकनीक और बुद्धि के कौशल से लगातार अपनी जीवनशैली में सविधाजनक बदलाव लाने की कोशिश की है। चौपाया जीव से मंगल ग्रह तक इंसानी यात्रा ने यह सिद्ध किया है कि विज्ञान की गति अनवरत है। 

क्रांतियों के संदर्भ में बात करें तो पहली औद्योगिक क्रांति जल व भाप की शक्ति से हुई थी। दूसरी विद्युत ऊर्जा से, तीसरी क्रांति वर्तमान में चल रही इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी जनित है। चौथी औद्योगिक क्रांति में आइटी (Information Technology) एवं विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) को मिलाकर कार्य किया जाएगा। ध्यातव्य है कि अमेरिका और जर्मनी ने 2010 के बाद इस पर कार्य करना शरू किया था। 

विश्व आर्थिक मंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष क्लास श्वाब (Klaus Schwab) ने अपनी पुस्तक ‘द फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्युशन’ में चौथी औद्योगिक क्रांति के बारे में विस्तार से बताया है। 

विश्व आर्थिक फोरम की 2016 में आयोजित वार्षिक बैठक की थीम ‘उद्योग 4.0′ थी, जिसके बाद चतुर्थ औद्योगिक क्रांति का विचार तेजी से दुनिया भर में फैलता गया। ‘उद्योग 4.0’ विश्वभर में एक शक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है और इसे दुनियाभर में अगली औद्योगिक क्रांति कहा जा रहा है। यह मुख्यतः इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of Things : IOT), बाधा रहित इंटरनेट कनेक्टिविटी, तीव्र गति वाली संचार तकनीकियों और 3डी प्रिंटिंग जैसे अनुप्रयोगों पर आधारित है, जिसके अंतर्गत अधिक डिजिटलीकरण तथा उत्पादों, उत्पाद शृंखलाओं तथा व्यापार मॉडल को एक-दूसरे से अधिकाधिक जोड़ने की परिकल्पना की गई है। विश्व आर्थिक मंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष क्लास श्वाब (Klaus Schwab) ने अपनी पुस्तक ‘द फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन’ में चौथी औद्योगिक क्रांति के बारे में विस्तार से बताया है। 

ध्यातव्य है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2018 में विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की बैठक में कहा कि ‘औद्योगिक क्रांति-4.0’ में मानव जीवन के वर्तमान एवं भविष्य को बदलने की क्षमता विद्यमान है। प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में विश्व आर्थिक मंच के ‘सेंटर ऑफ फोर्थ इंडस्ट्रियल रवोल्यूशन’ की शुरुआत के अवसर पर कहा कि सैन फ्रांसिस्को, टोकियो एवं पेइचिंग के बाद यह दुनियाभर में चौथी औद्योगिक क्रांति का समर्पित चौथा केंद्र है। इससे पूर्व भारत के प्रधानमंत्री ने जुलाई, 2018 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शिरकत करते हुए वैश्विक मुद्दों जैसे—प्रौद्योगिकी के महत्त्व, कौशल विकास तथा प्रभावी बहुपक्षीय सहयोग के आधार पर चतुर्थ औद्योगिक क्रांति को मानवता के लिए लाभप्रद बताया था। 

भारत के दृष्टिकोण से देखा जाए तो चतुर्थ औद्योगिक क्रांति भारत में काफी मुफीद साबित हो सकती है। भरत को नई तकनीक को अपनाने हेतु नीतियों में तेजी से सुधार लाना होगा। गौरतलब है कि आईएमएफ (International Monetary Fund : IMF) ने अपनी 2018 की रिपोर्ट में बताया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का वैश्विक वृद्धि में योगदान पिछले एक दशक में में दो गुना हो गया है। भारत की वर्तमान स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि चौथी औद्योगिक क्रांति भारत के लिए लाभप्रद होगी। निम्न बिंदुओं के माध्यम से इसकी उपयोगिता देखी जा सकती है |

1.कृत्रिम बौद्धिकता, मशीन-लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन और बिग डाटा जैसे उभरते क्षेत्र भारत को विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जाने में सक्षम हैं।

2. भारत के परिप्रेक्ष्य में यह न सिर्फ एक औद्योगिक परिवर्तन है बल्कि सामाजिक परिवर्तन भी है। ‘उद्योग 4.0’ में भारत के द्वारा अपरिवर्तनीय रचनात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इससे भारत में कामों में आवश्यक तेजी आएगी और काम-काज बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।

3. डिजिटल इंडिया अभियान ने डेटा को भारत के गांवों तक पहुंचाया है। निकट भविष्य में संचार सघनता, इंटरनेट कवरेज और मोबाइल इंटरनेट सुविधा लेने वालों की तादाद बहुत हद तक बढ़ने की संभावना है जो कि भारत के तकनीकी विकास के दृष्टिकोण से लाभप्रद है।

4. गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत में दूरसंचार के क्षेत्र में लगभग 95% की वृद्धि हुई है और लगभग 60 करोड़ भारतीयों के पास अब मोबाइल फोन की उपलब्धता है।

5. भारत विश्व का ऐसा देश है जहां सर्वाधिक मोबाइल डेटा खपत होती है इसके अलावा भारत एक ऐसा देश है जहां डेटा सबसे कम कीमत पर उपलब्ध है। इस संदर्भ में भारत की डिजिटल अवसंरचना और आधार, यूपीआई, ई-नाम तथा जीईएम सहित उसके इंटरफेस की प्रमुख भूमिका रही है। 

6.स्किल इंडिया मिशन, स्टार्टअप इंडिया और अटल नवाचार अभियान जैसी सरकार की पहलें युवाओं को नई और उभरती प्रौद्योगिकी के लिए तैयार कर रही हैं। 

चौथी औद्योगिक क्रांति के अंतर्गत समकालीन स्वचालन, डाटा एक्सचेंज तथा विनिर्माण प्रौद्योगिकी को समविष्ट किया गया है। यह उन नवाचारों तथा तकनीकियों को प्रदर्शित करता है जो भौतिक तथा जैविक क्षेत्रों की रेखा को धूमिल कर देगी।

7. जल्द ही भारत सरकार ऑप्टिक फाइबर के साथ सभी 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को जोड़ने का काम पूरा कर लेगी। ध्यातव्य है कि 2014 में केवल 59 ग्राम पंचायतें ऑप्टिक फाइबर से जुड़ी थी, जबकि वर्तमान में यह संख्या 1.2 लाख से अधिक पहुंच गई है। 8. कृत्रिम बौद्धिकता में अनुसंधान के लिए वर्ष 2018 से पूर्व एक मजबूत अवसंरचना बनाने के लिए राष्ट्रीय रणनीति तैयार की गई है जिससे नई दिल्ली स्थित नए केंद्र से इस प्रक्रिया को बल मिलेगा।

9. औद्योगिक क्रांति 4.0 और कृत्रिम बौद्धिकता के विस्तार से स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर सुधार होगा और स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च कम होने की संभावना है। इस तरह से भारत में हर तरह से वो भौतिक आधार मौजूद हैं, जो औद्योगिक क्रांति 4.0 को पूरी तरह सफलता की उड़ान भरवाने के लिए काफी है। हर तकनीक एवं नवाचार के उपयोग के साथ-साथ दुरुपयोग की भी संभावना सदैव बनी रहती है। आइए जानते हैं चौथी औद्योगिक क्रांति के रास्ते में आने वाली चुनौतियों के बारे में –

  • कृत्रिम बुद्धि से संबंधित तकनीकियों की जटिलता। 
  • साइबर हमलों के खतरे। 
  • अत्यधिक कृत्रिम बुद्धि के इस्तेमाल से रोजगार के घटते अवसर की आशंका। 
  • वैज्ञानिक यंत्रों पर अत्यधिक निर्भरता। 

चौथी औद्योगिक क्रांति के अंतर्गत समकालीन स्वचालन, डाटा एक्सचेंज तथा विनिर्माण प्रौद्योगिकी को समविष्ट किया गया है। यह उन नवाचारों तथा तकनीकियों को प्रदर्शित करता है जो भौतिक तथा जैविक क्षेत्रों की रेखा को धूमिल कर देगी। अतः यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण न होगा कि आने वाला समय चतुर्थ औद्योगिक क्रांति का होगा एवं भारत विश्व का सिरमौर बनकर उभरेगा। 

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