व्यायाम पर निबन्ध | Essay on Exercise in Hindi

Essay on Exercise in Hindi

व्यायाम पर निबन्ध | Essay on Exercise in Hindi

बड़े भाग मानुस तन पावा। 

सुरदुर्लभ सद्ग्रंथन गावा॥

अर्थात इस सृष्टि में बड़े भाग्य से ही मनुष्य तन की प्राप्ति होती है। इसके लिए देवता भी लालायित रहते हैं। इसी प्रकार एक अन्य उदाहरण प्रस्तुत है- 

नर तन सम नहिं कविनहुं देही। 

जीव चराचर जाचत जेही॥

अर्थात नर-तन से बढ़कर कोई अन्य शरीर नहीं है। इसकी याचना तो चराचर जगत के सभी जीव करते हैं। ‘रामचरित मानस’ की उक्त पंक्तियों में मानव-शरीर की महत्ता सूर्यवत् स्पष्ट है। लेकिन इसकी उपयोगिता तभी सिद्ध होगी, जब हमारा शरीर स्वस्थ और नीरोग रहे। 

अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन के साथ-साथ नियमित व्यायाम भी आवश्यक है। ऐसे व्यक्ति जो स्वास्थ्य के लिए खूब पुष्टिकर भोजन लेते हैं, लेकिन कभी व्यायाम नहीं करते, उनका शरीर मोटा तथा भद्दा हो जाता है। वे विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं। वे व्यायाम की अपेक्षा दवाओं से शरीर को स्वस्थ रखना चाहते हैं, यह उनकी भूल है। उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए कि दवा किसी व्यायाम से बेहतर नहीं है। इस संबंध में गांधी जी के विचार हैं, “व्यायाम शारीरिक स्वास्थ्य की कुंजी है।” 

शरीर का विशेष रूप से आयाम करने का ही नाम ‘व्यायाम’ है। व्यायाम मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं- पहला, साधारण व्यायाम एवं दूसरा, यौगिक व्यायाम। इन व्यायामों को करने के विशिष्ट तरीके हैं, जिनके लिए समुचित प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। व्यायाम का चुनाव करते समय अपने पेशे और उम्र-दोनों का ख्याल रखना चाहिए। बच्चों के लिए खेलना एक उत्तम व्यायाम है। युवा वर्ग के लिए दंड-बैठक एवं यौगिक क्रियाएं ठीक हैं। प्रात:भ्रमण तो बड़े-बुजुर्गों के लिए मृत-संजीवनी के समान है। नदी या तालाब में तैरना और प्रात:भ्रमण करना सबके लिए सर्वोत्तम व्यायाम माना गया है। व्यायाम हमेशा खुले स्थान एवं स्वच्छ वातावरण में करना चाहिए। 

विद्यार्थियों के लिए व्यायाम अत्यधिक आवश्यक है, क्योंकि अगर शरीर स्वस्थ हो, तो मन भी स्वस्थ रहता है। दिन-रात किताबों से चिपके रहने से विद्यार्थियों का शरीर दुर्बल हो जाता है, आंखें धंस जाती हैं और कमर झुक जाती है। इसीलिए एक बार स्वामी विवेकानंद ने कहा था, “मेरे बच्चो! तुम्हें ‘गीता’ नहीं, फुटबॉल चाहिए। मैं चाहता हूं कि तुम्हारी मांसपेशियां लोहे की हों, नसें फैलाद की हों और दिमाग उस पदार्थ का हो, जिस पदार्थ से आकाश में कौंधने वाली बिजली निर्मित होती है।” । 

इस प्रकार यह पूर्णतः स्पष्ट हो जाता है कि व्यायाम स्वास्थ्य की कुंजी है। व्यायाम करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य होना चाहिए 

व्यायाम विना लोके न स्वास्थ्य लभते पुमान् ।

तस्मात् सदैव कर्तव्यो व्यायामः सकलै जनैः॥

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