परीक्षा भवन के अनुभव पर निबंध

Essay on exam day

परीक्षा भवन के अनुभव 

अभी तक मैंने अनेक परीक्षाएं दी हैं। सभी के अनुभव अलग-अलग हैं। विगत दिनों मैंने हजारी बाग आवासीय बालिका उच्च विद्यालय के द्वितीय स्तर की परीक्षा दी है। इसका भी मुझे एक अलग और अद्भुत अनुभव हुआ है, जिसका वर्णन नीचे किया जा रहा है। 

परीक्षा के निश्चित समय से थोड़ा पूर्व हम लोग परीक्षा केंद्र बांकीपुर बालिका उच्च विद्यालय, पटना पहुंच गए। सभी परीक्षार्थी अपने-अपने निर्धारित स्थान पर जा बैठे। मैं जिस कमरे में बैठी थी, वहां लगभग चालीस परीक्षार्थी थे। परीक्षा कक्ष में बैठते ही मेरे मन में अनेक प्रकार के प्रश्न उठने लगे-प्रश्नपत्र कैसा होगा और मैं उसे हल कर पाऊंगी या नहीं आदि। 

मैं इन्हीं विचारों में खोई हुई थी कि घंटी बज गई। हम लोगों को प्रश्नपत्र एवं उत्तर पुस्तिका दे दी गई। मैंने आद्योपांत प्रश्नपत्र पढ़ा। तब जाकर मन की अशांति दूर हुई। प्रश्नपत्र ज्यादा कठिन नहीं था। परीक्षा भवन में बिल्कुल शांति थी। ऐसा लगता था, मानो यहां कोई है ही नहीं। चुप्पी के साथ-साथ इधर-उधर ताकना-झांकना भी बंद था। इस प्रकार मुझे यहां आकर ये पता चला कि परीक्षा कैसी पवित्र होती है। जिस प्रकार पुजारी अपने मंदिर को पवित्र रखता है, उसी प्रकार परीक्षक परीक्षा में शांति एवं ईमानदारी कायम रखकर परीक्षा भवन की पवित्रता बनाए हुए थे। 

प्रश्नपत्र हिंदी का था। ‘किरण’ शब्द के दो पर्यायवाची लिखने थे, लेकिन इसका उत्तर मेरे स्मरण में नहीं आ रहा था। मैंने बहुत ही प्रयास किया, परंतु असफल रही। इतने में परिवीक्षिका महोदया ने आदेशपाल को बुलाया और कहा कि यहां अंशु मैडम को भेज दो। मुझे झट से किरण का एक पर्यायवाची शब्द ‘अंशु’ स्मरण में आ गया। इसी क्रम में मेरे बगल में बैठी एक परीक्षार्थी का प्रवेशपत्र पंखे की हवा से उड़कर मेरे पास आ गया। उस पर परीक्षार्थी का नाम ‘रश्मि’ लिखा हुआ था। इस प्रकार किरण का दूसरा पर्यायवाची शब्द रश्मि मेरे स्मरण में आया। अब मेरी परेशानी कुछ कम हो गई थी। 

लगभग अंतिम समय आ जाने पर मैं उत्तर पुस्तिका की पुनरावृत्ति करने लगी। ऐसे में पता चला कि मुहावरे से संबंधित एक प्रश्न का हल अभी तक नहीं हो पाया है। प्रश्न था—’पेट में चूहे कूदना’ का क्या अर्थ होता है ? इसका अर्थ याद करने की मैं पूरी कोशिश कर रही थी कि इतने में चेतावनी की घंटी बज गई। मैं चिंतित हो उठी। ठीक उसी बीच मैंने दो परिवीक्षिकाओं को आपस में बातें करते सुना। एक ने दूसरी से कहा, “मेरे पेट में चूहा कूद रहा है, इसलिए आज मैं घर न जाकर यहीं तेरा खाना खा लूंगी।” 

बस फिर क्या था? मैंने जल्दी से ‘पेट में चूहे कूदना’ मुहावरे का अर्थ ‘जोर से भूख लगना’ लिख दिया। इस प्रकार मेरे सभी प्रश्न हल हो गए।

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