ईद पर निबंध | Essay on Eid in Hindi

ईद पर निबंध

ईद पर निबंध | Essay on Eid in Hindi

ईद मुसलमानों का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। मुसलमानों के बारह महीनों में एक महीने का नाम रमजान है। रमजान का महीना बड़ा पवित्र माना जाता है। जिस प्रकार हिंदू लोग नौ दिन उपवास रखकर मां दुर्गा का ध्यान करते हैं, उसी प्रकार मुसलमान भाई भी 30 दिन का रोजा रखकर अपने खुदा का ध्यान करते हैं। जब 30 दिन का रोजा पूरा हो जाता है, तब अगले महीने शव्वाल में नये चांद को देखकर ईद का पर्व मनाया जाता है। इस प्रकार रोजे की समाप्ति की खुशी में ईद मनाई जाती है। इस पर्व का नाम ‘ईद-उल-फितर’ भी है। 

ईद के दिन बच्चे, जवान और बूढ़े-सभी मुसलमान भाई नये-नये कपड़े पहनकर मस्जिद के प्रांगण या खुले मैदान (ईदगाह) में सामूहिक रूप से नमाज अदा करते हैं। यह दृश्य अत्यंत आकर्षक होता है। 

‘ईदगाह’ नामक कहानी में प्रेमचंद ने इस दृश्य का बड़ा ही सजीव चित्रण किया है-‘लाखों सिर एक साथ सिजदे में झुकते हैं तथा एक साथ घुटनों के बल बैठ जाते हैं। कई बार यही क्रिया होती है, जैसे बिजली की लाखों बत्तियां एक साथ प्रदीप्त हों और एक साथ बुझ जाएं।’ नमाज समाप्त होने पर सभी लोग एक-दूसरे से गले मिलते हैं और ‘ईद मुबारक’ कहते हैं। 

इस दिन मुसलमान भाई अपने सगे-संबंधियों तथा पड़ोसियों को दावत पर बुलाते हैं या खुद उनके घर जाते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी से मिलता है, तो ‘ईद मुबारक’ कहकर अपना प्रेम प्रकट करता है। ईद के दिन मुसलमान भाई अपने मेहमानों के समक्ष सेवइयां प्रस्तुत करते हैं। इसके बाद वे लोग एक-दूसरे के अंग एवं वस्त्र पर इत्र लगाते हैं। इत्र लगाने की शुरुआत मुसलमानों के आखिरी पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब ने की थी। जैसे इत्र से सुगंध फैलती है, वैसे ही ईद यह संदेश देती है कि हम भी अपने अच्छे व्यवहार से समाज में सुगंध फैलाएं। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को धन, कपड़ा एवं भोजन बांटते हैं। ईद हमें मिल-जुलकर रहना सिखाती है।

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