शिक्षा और समाज पर निबंध | शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन पर निबंध

शिक्षा और समाज पर निबंध

शिक्षा और समाज पर निबंध | शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन पर निबंध (Education And Social Change) 

सामाजिक परिवर्तन लाने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम शिक्षा है। जडता से चेतना की ओर ले जाने वाली शिक्षा सामाजिक परिवर्तनों का आधार होती है तथा यह समाज को आधुनिक संस्पर्श देती है। सामाजिक परिवर्तन लाने में शिक्षा की भूमिका अत्यंत व्यापक है, इसीलिए इसे सामाजिक परिवर्तन लाने का सर्वाधिक प्रभावपूर्ण साधन माना जाता है। शिक्षा न सिर्फ सामाजिक संरचना में सकारात्मक बदलाव लाती है, बल्कि सामाजिक प्रकार्यों में भी परिवर्तन देखने को मिलते हैं। इन सकारात्मक परिवर्तनों से ही समाज में गतिशीलता आती है और व उन्नति के पथ पर आगे बढ़ता है। यानी शिक्षा ही समाज को उन्नतशील बनाती है। 

“शिक्षित एवं सुसंस्कृत व्यक्ति जब एक समाज से स्थानांतरित होकर किसी दूसरे समाज में जाता है, तो वह उस समाज को भी दिशा-बोध करवाता है तथा उसके विकास में योगदान देता है।” 

शिक्षा अनेक स्तरों से समाज में परिवर्तन लाती है। पहले हम व्यक्तिगत स्तर के परिवर्तनों पर गौर करते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर चरित्र निर्माण में शिक्षा का योगदान अग्रणी है। यदि शिक्षा का अभाव है, तो अच्छी अभिवृत्तियों का विकास नहीं हो पाता। शिक्षा के अभाव में जब अच्छी अभिवत्तियों का विकास नहीं हो पाता, तो अच्छी आदतें भी विकसित नहीं हो पातीं और जब अच्छी आदतें विकसित नहीं हो पातीं तो व्यक्ति का चारित्रिक विकास एवं चरित्र निर्माण नहीं हो पाता। वह पतोनोन्मुख हो जाता है और ऐसा व्यक्ति समाज या राष्ट्र के विकास में सहायक बनने के बजाय समाज का अहित करने लगता है। दूसरी तरफ शिक्षा रूपी ज्ञान और संस्कार मिलने से न सिर्फ अच्छी अभिवत्तियों का विकास शुरू होता है, बल्कि बुरी मामात्तयों का शमन भी होने लगता है। अच्छी अभिवत्तियों के पिकास से अच्छी आदतें विकसित होती हैं, जो कि अच्छे चरित्र के निर्माण में सहायक होती हैं। एक चरित्रवान व्यक्ति जिस समाज में रहता है, उसके उन्नयन के लिए प्रयत्नशील रहकर वह सुखद सामाजिक परिवर्तन लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इतना ही नहीं, शिक्षित एवं सुसंस्कृत व्यक्ति जब एक समाज से स्थानांतरित होकर किसी दूसरे समाज में जाता है, तो वह उस समाज को भी दिशा-बोध करवाता है तथा उसके विकास में योगदान देता है। तभी तो शायर वसीम बरेलवी कहते हैं 

जहां रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा

किसी चिराग का अपना मकां नहीं होता।

शिक्षा व्यक्तियों के विचारों में परिवर्तन लाती है। जब व्यक्तियों के विचारों में परिवर्तन आता है तो समाज में भी परिवर्तन आता है। चूंकि शिक्षा व्यक्ति के विचारों में सकारात्मक परिवर्तन लाती है, अतएव समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन परिलक्षित होते हैं। शिक्षा व्यक्ति को जागरूक बनाती है। जागरूकता बढ़ने से व्यक्ति विभिन्न प्रकार की सामाजिक कुरीतियों यथा-नशाखोरी, अंध-विश्वास, बाल विवाह, दहेज प्रथा, अशिक्षा, अपराध आदि के प्रति सचेत होता है और वह समाज को इनसे मुक्त करवाने को तत्पर भी दिखता है। इस तरह शिक्षित व्यक्ति समाज को समस्याओं से मुक्त बनाने एवं एक अच्छे समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाता है। इस प्रकार समाज में अच्छे परिवर्तन आते हैं, जिनका लाभ समाज और इसके सदस्यों को मिलता है। शिक्षा से व्यक्ति की मानसिक गतिशीलता बढ़ती है। इसका लाभ यह मिलता है कि सामाजिक समस्याओं के प्रति उसके भीतर वह तार्किक दृष्टिकोण विकसित होता है, जो भावनात्मक मार्ग से हटकर होता है। यह तार्किक दृष्टिकोण समस्याओं के समाधान के प्रति एक नवीन दृष्टिकोण विकसित करता है, फिर चाहे वह जनसंख्या वृद्धि की समस्या हो अथवा नशाखोरी की। इस प्रकार, समाज में सकारात्मक एवं सुखद बदलाव तो आते ही हैं बाधाओं को पार करने की सामाजिक क्षमता में भी वृद्धि होती है। कहने का अभिप्राय यह कि शिक्षा ही वह अवयव है जिससे सामाजिक सुधार एवं सामाजिक आन्दोलनों के लिए अभिप्रेरणा मिलती है। इतिहास साक्षी है कि अब तक जितने भी प्रमुख समाज सुधार आन्दोलन एवं सामाजिक पुनर्जागरण भारत में हुए, उनमें बौद्धिक एवं शिक्षित वर्ग की केन्द्रीय भूमिका रही। इन समाज सुधार आन्दोलनों का नेतृत्व सदैव शिक्षित एवं बौद्धिक वर्ग के हाथों में ही रहा। 

सबसे अच्छी बात तो यह है कि शिक्षा सिर्फ सामाजिक परिवर्तन ही नहीं लाती है, बल्कि इन परिवर्तनों के प्रति हमें वह नजरिया भी देती है, जिससे हम इन परिवर्तनों की समीक्षा कर सकें। शिक्षा ही हमें वह दृष्टि देती है, जिनके आधार पर हम तय करते हैं कि कौन-से परिवर्तन वरेण्य हैं और कौन से नहीं। यानी शिक्षा ही हमें वह विवेक प्रदान करती है, जो कि सामाजिक परिवर्तनों की समीक्षा करता है और इसी समीक्षा के आधार पर हम उन परिवर्तनों को तो स्वीकार कर लेते हैं, जो समाज के हित में होते हैं, जबकि उन परिवर्तनों को खारिज कर देते हैं, जो समाज के लिए अहितकर होते हैं। शिक्षा हमें वांछनीय परिवर्तनों को स्वीकारने की दृष्टि ही नहीं देती है, बल्कि इन्हें समाज में लोकप्रिय एवं प्रचलित बनाने का विचार भी शिक्षा ही देती है। 

“शिक्षा है ही सामाजिक परिवर्तन के लिए। यानी शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य ही है सामाजिक परिवर्तन लाकर समाज को आधुनिकता एवं गतिशीलता का संस्पर्श प्रदान करना।” 

समाज एवं सामाजिक परिवर्तनों के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा की सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका यह है कि यह समाज में प्राविधिक संस्कृति (Tech nical Culture) एवं मूल्य संस्कृति (Value Culture) दोनों को अपने-अपने ढंग से सशक्त बनाती है। यह कहना असंगत न होगा कि शिक्षा ने ज्ञान का विस्फोट किया है और इससे प्राविधिक संस्कृति पुष्पित-पल्लवित हुई है। शिक्षा से ही नए आविष्कार, नए शोध अनुसंधान एवं खोजें संभव हुई हैं, जिन्होंने समाज को उपयोगी सौगातें दी हैं। इनसे लोगों का जीवन संवरा है। समाज की गतिशीलता एवं आधुनिकता तो बढ़ी ही है, लोगों में वैज्ञानिक संचेतना बढ़ी है। तकनीक का विस्तार बढ़ा है। इससे समाज में अच्छे परिवर्तन आए हैं तथा गतिशीलता बढ़ी है। समाज का उन्नयन हुआ है। प्राविधिक संस्कृति के साथ-साथ शिक्षा द्वारा मूल्य संस्कृति भी विकसित और पुष्पित होती है। इससे परम्परागत मूल्यों में सकारात्मक विकास होता है। समाज में नया उजाला आता है। 

सारतः यह कहना असंगत न होगा कि शिक्षा है ही सामाजिक परिवर्तन के लिए। यानी शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य ही है सामाजिक परिवर्तन लाकर समाज को आधुनिकता एवं गतिशीलता का संस्पर्श प्रदान करना। शिक्षा कई प्रकार से समाज में परिवर्तन लाती है। यह समाज के लिए हितकारी शाश्वत मूल्यों को संरक्षण प्रदान करती है, नए विचारों के सृजन में सहायक बनकर समाज का कल्याण करती है। यह समाज में जहां नए और उपयोगी विचारों का प्रसार कर उन्ह लोकप्रिय बनाती है, वहीं सामाजिक परिवर्तनों की स्वीकार्यता हेतु अनकल वातावरण का सजन करती है। शैक्षिक प्रगति से जहां नवीन विचार जन्म लेते हैं, वहीं शिक्षा से सामाजिक गतिशीलता आती है। सबसे बड़ी बात यह है कि शिक्षा ही सामाजिक सुधारों का आधार है। शिक्षा जहां सामाजिक परिवर्तनों की समीक्षा का विवेक हमें प्रदान करती है, वहीं सामाजिक परिवर्तनों को स्वीकार करने के लिए हम मानसिक रूप से तैयार भी करती है। सामाजिक परिवर्तन का नल तय करने में भी शिक्षा की अहम भूमिका होती है। सारतः यह कर जा सकता है कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तनों की धुरी है और । समाज को जड़ता से उबार कर उसे जीवंत बनाती है। 

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