कम्प्यूटर शिक्षा का महत्व पर निबंध | कंप्यूटर शिक्षा पर निबंध | Essay on Computer Education In Hindi

कम्प्यूटर शिक्षा का महत्व पर निबंध

कम्प्यूटर शिक्षा का महत्व पर निबंध | कंप्यूटर शिक्षा पर निबंध | Essay on Computer Education In Hindi

यकीनन कंप्यूटर ने दुनिया बदल दी है। यह कहने में अतिश्योक्ति जैसी कोई बात नहीं है कि कंप्यूटर क्रांति का सूत्रपात हो चुका है तथा यह छोटा-सा इलेक्ट्रानिक उपकरण जीवन के लगभग हर क्षेत्र से अभिन्न रूप से जुड़ चुका है। मानव जीवन में कम्प्यूटर का दखल एवं महत्त्व इस तेजी से बढ़ा है कि इसके बिना एक अधूरेपन का एहसास न को सहज और सुविधा सम्पन्न बनाने का भी काम किया है। जिस तरह से कंप्यूटर का मानव जीवन में प्रभाव बढ़ा है एवं जिस प्रकार से कंप्यूटरीकृत प्रणाली ने जीवन के हर क्षेत्र में पांव पसारे हैं, उसे देखते हुए कंप्यूटर शिक्षा का महत्त्व भी बढ़ा है। सच तो यह है कि कंप्यूटर शिक्षा आज के दौर में अनिवार्य हो चुकी है और समय के साथ आगे बढ़ने के लिए कंप्यूटर का प्रारंभिक ज्ञान आवश्यक हो गया है। कंप्यूटर की शिक्षा इसलिए भी आवश्यक हो गई है, क्योंकि इस क्षेत्र में रोजगार के नये अवसर भी सृजित हुए हैं। आने वाले दिनों में कंप्यूटर का महत्त्व और बढ़ेगा तथा इसके साथ ही इसकी शिक्षा और महत्त्वपूर्ण होगी। 

“सच तो यह है कि कंप्यूटर शिक्षा आज के दौर में अनिवार्य हो चुकी है और समय के साथ आगे बढ़ने के लिए कंप्यूटर का प्रारंभिक ज्ञान आवश्यक हो गया है।”

कंप्यूटर एक ऐसा उपकरण है, जो आंकड़ों के भंडारण उनके विश्लेषण तथा अंकों की गणना का काम बहुत ही सटीक ढंग से करता है। इसमें समय की तो बचत होती ही है, गणनाएं एकदम सटीक मिलती हैं। फिलहाल हम मुख्य रूप से सूक्ष्म (माइक्रो) कम्प्यूटर, लघु (मिनी) कंप्यूटर, वृहद् (मेनफ्रेम) कम्प्यूटर तथा महा (सुपर) कम्प्यूटर का प्रयोग कर रहे हैं। जीवन के विविध क्षेत्रों में कंप्यूटर की उपयोगिता बढ़ी है। तीव्र गति से गणना करने, आंकड़ों का विश्लेषण करने तथा मानव मस्तिष्क की भांति तार्किक क्रियाएं करने वाला कंप्यूटर आज हमारे दिन-प्रतिदिन के कार्यों से लेकर जटिल वैज्ञानिक कार्यों एवं अनुसंधानों का एक अनिवार्य अंग बन चुका है। लगभग सात दशकों की अवधि में ही विश्व विशालकाय कंप्यूटरों को छोड़कर व्यक्तिगत कंप्यूटरों (पीसी) के युग में प्रवेश कर चुका है। भारत में कंप्यूटर का प्रयोग वर्ष 1955 के आस-पास शुरू हुआ, किन्तु इस क्षेत्र में तीव्र गति से विकास का कार्य वर्ष 1984 के बाद शुरू हुआ। आज भारत में कंप्यूटर क्षेत्र के विकास की दर 40 प्रतिशत से भी अधिक है तथा भारत कंप्यूटर क्षेत्र में अपनी दक्षता का लोहा वैश्विक स्तर पर मनवा रहा है। भारत में कंप्यूटर उद्योग भी खूब फल-फूल रहा है और इसमें कंप्यूटर शिक्षा के बढ़ते आयामा का विशेष योगदान है। 

कंप्यूटर और इंटरनेट की युगलबंदी ने दरियों को समेटने का काम किया है। सीमाएं सिकुड़ गई हैं तथा ग्लोबल विलज’ अवधारणा सार्थक हो रही है। मानव के लिए यह चमत्कारिक उप साबित हो रहा है। महत्त्वपर्ण गणनाओं एवं आंकड़ों के विश्लप अलावा कप्यटर का उपयोग मौसम, वातावरण, कृषि तथा संबंधी आंकड़ों को जुटाने में काफी लाभकारी साबित हो रहा है। इसके अलावा जहां शिक्षा के क्षेत्र में यह क्रांतिकारी बदलाव लाया है, वहीं टिकटों की घर बैठे बुकिंग से लेकर खरीदारी तक को इसने संभव बनाया है। कार्यालयों में इसका प्रयोग बढ़ा है तथा बैंकिंग आदि के क्षेत्र में इसके प्रयोग से सुविधाएं बढ़ी हैं। संचार के क्षेत्र में तो इसने क्रांति ही ला दी है। माउस की एक क्लिक के साथ आप पलक झपकते सात समुंदर पार अपने किसी परिचित से संपर्क साध सकते हैं। 

“कंप्यूटर शिक्षा हमारी युवा पीढ़ी को आत्मनिर्भर बना रही है। सिर्फ आत्मनिर्भर ही नहीं, उन्हें गतिशील भी बना रही है।” 

कंप्यूटर की बढ़ती उपादेयता एवं विस्तार के कारण वर्तमान युग में इसकी शिक्षा का महत्त्व बेहद बढ़ गया है। शिक्षा के प्रचार प्रसार का भी यह बेजोड़ माध्यम साबित हो रहा है। हमने कंप्यूटर शिक्षा को महत्त्व देना शुरू कर दिया है, क्योंकि हम युग के साथ चलने का हनर जानते हैं। यह अकारण नहीं है कि हमारे देश में प्रांरभिक शिक्षा के स्तर पर कंप्यूटर की जानकारी को तरजीह दी जाने लगी है तथा पाठ्यक्रमों में इसे प्रमुखता से शामिल किया जाने लगा है। अब बच्चों को ‘सी फॉर कैट’ नहीं, ‘सी फॉर कंप्यूटर’ पढाया जाने लगा है। प्रारंभिक विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षकों की नियक्तियां की जाने लगी हैं। धीरे-धीरे किताबों-कॉपियों का स्थान टैबलेट एवं लैपटॉप ने लेना शुरू कर दिया है। 

कंप्यूटर की उपयोगिता को देखते हुए हमने सिर्फ प्रारंभिक शिक्षा के स्तर पर इसे तरजीह देनी नहीं शुरू की है, बल्कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी कंप्यूटर प्रशिक्षण को अहमियत दी है। हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर प्रशिक्षण के क्षेत्र में हमने व्यापक प्रगति की है तथा भारतीय मेधाएं सारी दुनिया में अपने कंप्यूटर ज्ञान के झंडे गाड़ रही हैं। 

हमारे देश के ‘राष्ट्रीय ज्ञान आयोग’ ने भी कंप्यटर शिक्षा के महत्त्व को स्वीकारा है तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटर को विशेष महत्त्व देने में तत्परता दिखाई है। यह अकारण नहीं है कि आयोग ने देश में इलेक्ट्रानिक नेटवर्क स्थापित करने के सुझाव दिए हैं तथा विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों, प्रयोगशालाओं आदि को इस नेटवर्क के दायरे में लाने को आवश्यक बताया है। हम ई-नेटवर्किंग की दिशा में बराबर प्रयासरत हैं। हमारे ये प्रयास कंप्यूटर शिक्षा के महत्त्व से जुड़े हैं। 

कंप्यूटर क्षेत्र में जिस तेजी से तकनीक एवं प्रौद्योगिकी का विकास हुआ है, उसे देखते हुए उच्च शिक्षा के मानक भी बदले हैं। ज्ञान की अवधारणाएं भी परिवर्तित हुई हैं। परंपरागत शैक्षणिक विषयों से इतर कंप्यूटर शिक्षा की महत्ता बढ़ी है और हम ज्ञान के इस नये रुझान पर गंभीरता से केन्द्रित भी हुए हैं। खुशी का विषय यह है कि हमारे नीति नियंता एवं कर्णधार भी देश में कंप्यूटर शिक्षा को प्रोत्साहित करने में लगे हैं तथा इसके लिए साधन भी जुटाए जा रहे हैं। 

कंप्यूटर शिक्षा का महत्त्व इस कदर बढ़ गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं तथा सरकारी एवं गैरसरकारी सेवाओं में कंप्यूटर ज्ञान की अनिवार्यता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। कंप्यूटर तकनीक पर उच्च स्तरीय पुस्तकें प्रकाशित हो रही हैं तथा कंप्यूटर शब्दावली के शब्दकोश प्रकाशित किए जा रहे हैं। सच तो यह है कि कंप्यूटर का ज्ञान एवं इसमें दक्षता वक्त की जरूरत से जुड़ गई है। कंप्यूटर शिक्षा के महत्त्व को ध्यान में रखते हुए ही देश में कंप्यूटर इंजीनियरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। विद्यार्थियों का आकर्षण भी कंप्यूटर शिक्षा की तरफ बढ़ रहा है। देश के विद्यार्थी परंपरागत विषयों में डिग्रियां लेने के बजाय बी.टेक, एम.टेक तथा एमसीए आदि डिग्रियां हासिल करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। कंप्यूटर के क्षेत्र में कैरियर आज के विद्यार्थियों की पहली पसंद बन गया है। नई पीढ़ी का संबंध सीडी और पेनड्राइव से कुछ ज्यादा ही मजबूत होता जा रहा है, जो कि कंप्यूटर शिक्षा के बढ़ते महत्त्व को ही रेखांकित करता है। आज का युवा यह भली-भांति समझ चुका है कि समय के साथ आगे बढ़ने के लिए कंप्यूटर में पारंगत होना तथा इस क्षेत्र में जानकारी रखना अनिवार्य हो चुका है। 

“कंप्यूटर शिक्षा ने सामान्य जनजीवन में भी गतिशीलता को बढ़ाया है। जिन कामों को मनुष्य द्वारा निपटाने में सालों लग जाते थे, उन्हें कंप्यूटर के माध्यम से मिनटों में निपटाया जा रहा हन इसमें गलतियों की भी संभावना नगण्य रहती है तथा कार्य भी गुणवत्तापूर्ण होता है।” 

सैम्युअल स्माइल्स ने कहा है- “शिक्षा का सबसे बड़ा उद्देश्य आत्मनिर्भर बनाना है।” यह बात कंप्यूटर शिक्षा पर भी लागू होती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि कंप्यूटर शिक्षा हमारी युवा पीढ़ी को आत्मनिर्भर बना रही है। सिर्फ आत्मनिर्भर ही नहीं, उन्हें गतिशील भी बना रही है। युवा कंप्यूटर की शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में रोजगार की प्रचुर संभावनाएं हैं। रोजगार के साथ-साथ इस क्षेत्र में व्यवसाय की भी पर्याप्त गुंजाइश है। चूंकि जीवन के हर क्षेत्र में कंप्यूटर का वर्चस्व बढ़ा है, अतएव हर क्षेत्र में इसके जानकारों की भी आवश्यकता बढ़ी है। यही कारण है कि कंप्यूटर के क्षेत्र में शिक्षित युवक को घर बैठकर बेरोजगारी का दंश नहीं झेलना पड़ता है। रोजगार के स्वर्णिम अवसर उसके स्वागत के लिए खड़े रहते हैं और वह सफलता के पायदानों पर ऊपर चढ़ता चला जाता है। जो नौकरी नहीं करना चाहते, वे इस क्षेत्र में अपना व्यवसाय जमा कर अच्छा लाभ कमाते हैं। इस तरह देखें तो कंप्यूटर शिक्षा व्यापक पैमाने पर आज के युवा को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही है, यानी आत्मनिर्भरता का पर्याय बन गई है। 

कंप्यटर शिक्षा ने आज के यवा को न सिर्फ गतिशील बनाया है, बल्कि उसके व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज का युवा कंप्यूटर के जरिये महत्त्वपूर्ण सूचनाओं का संकलन करता है। विदेश के अच्छे शिक्षण संस्थाओं की जानकारी प्राप्त करता है और इनमें से बेहतर का चयन कर आवेदन भी ‘ऑन लाइन’ करता है। वह विदेश में तालीम तो हासिल करता ही है, वहां रहकर अपना भविष्य भी संवारता है। सारी दुनिया में कंप्यूटर में शिक्षित भारतीय नवजवानों की कद्र बढ़ी है। कंप्यूटर शिक्षा ने युवाओं को गतिशीलता प्रदान करते हुए उनके दायरे को बढ़ाने का काम किया है। 

कंप्यूटर शिक्षा ने सामान्य जनजीवन में भी गतिशीलता को बढ़ाया है। जिन कामों को मनुष्य द्वारा निपटाने में सालों लग जाते थे, उन्हें कंप्यूटर के माध्यम से मिनटों में निपटाया जा रहा है। इसमें गलतियों की भी संभावना नगण्य रहती है तथा कार्य भी गुणवत्तापूर्ण होता है। 

उक्त तमाम खूबियों के बावजूद भारत के संदर्भ में कुछ बातें कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में बाधक बन रही हैं। कंप्यूटर प्रचालन विद्युत पर निर्भर करता है। विद्युत पर निर्भरता के कारण इसके पूरे लाभ के लिए विद्युत की उपलब्धता आवश्यक होती है। हमारे देश में बराबर बिजली का संकट बना हुआ है। देश के कुछ राज्य तो बुरी तरह से इस संकट से जूझ रहे हैं। महानगरों में तो स्थिति कुछ ठीक भी है, गांवों का हाल तो बहुत ही बुरा है। आजादी के इतने वर्षों बाद जहां अनेक गांवों का विद्युतीकरण हुआ ही नहीं है, वहीं जिनका हुआ भी है, वहां विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित नहीं है। कितने घंटों तक विद्युत आपर्ति ठप रहेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता। एक कृषि प्रधान देश में गांवों की यह बदहाली कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में बाधक साबित हो रही है और कंप्यूटर शिक्षा का लाभ दूर-दराज के इलाकों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उस तरह से नहीं मिल पा रहा है, जिस तरह मिलना चाहिए। इसके अलावा महंगे कंप्यूटरों के कारण देश का गरीब तबका इसकी शिक्षा का खर्च वहन न कर पाने के कारण इससे वंचित रह जाता है। वह मुख्यधारा से नहीं जुड़ पा रहा है। कंप्यूटर क्रांति के पक्षधर हमारे नीति नियंताओं को कंप्यूटर शिक्षा में बाधक उक्त खामियों को दूर करना होगा, ताकि हम वैश्विक स्तर पर किसी से पीछे न रहें। 

इसमें कोई दो राय नहीं कि पिछले कुछ वर्षों में हमने कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। हमने समय के साथ चलते हुए कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देकर कंप्यूटर युग को सार्थकता प्रदान की है। भारतीय मेधा ने कंप्यूटर क्षेत्र में अपनी धाक विश्व स्तर पर कायम की है। हमने कंप्यूटर शिक्षा के महत्त्व को समझा है और उसके अनुरूप शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव भी किए हैं। हमारी सफलताएं एवं कंप्यूटर के क्षेत्र में हमारा बढ़ता प्रभाव सखद है। हमें कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में इसी तरह आग बढ़ते रहना है। हमारे ये कदम स्वर्णिम भविष्य की ओर हमें ल जायेंगे। 

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