भारत में बाल मजदूरी पर निबंध |Essay on Child Labor in India

भारत में बाल मजदूरी पर निबंध

भारत में बाल मजदूरी पर निबंध |Essay on Child Labor in India

इस समय हमारा देश भारत अनेक समस्याओं से ग्रस्त है, जिनमें से एक समस्या-बाल मजदूरी हमारे समाज के लिए एक कलंक से कम नहीं है। हम अपने को विकासशील कहते हैं और देश में हर स्तर पर विकास हो भी रहा है। आदमी कहां से कहां जा पहुंचा है, परंतु बाल मजदूरी की समस्या कम होने के स्थान पर बढ़ती जा रही है। बाल मजदूरी के पीछे ऐसे क्या कारण हैं, जिससे यह समस्या हमारे समाज के लिए नासूर बन गई है। 

बाल मजदूरी के पीछे अशिक्षा, जनसंख्या वृद्धि, नशा एवं स्वास्थ्य से जुड़ी अनेक प्रकार की समस्याएं हैं। अब सबसे पहले हम अशिक्षा को लेते हैं। अशिक्षा के कारण मां-बाप बच्चों को स्कूल नहीं भेजते। वे समझते हैं कि यही हमारी नियति है। जिस प्रकार हम मजदूरी कर रहे हैं, उसी प्रकार हमारे बच्चों को भी यही काम करना है, अतएव बच्चों के थोड़ा बड़ा होते ही वे उन्हें अपने साथ काम पर लगा लेते हैं। उन्हें विश्वास होता है कि ऐसा करने से उनकी आमदनी बढ़ेगी और उनके परिवार का गुजारा ठीक से हो सकेगा। 

बाल मजदूरी का दूसरा बड़ा कारण जनसंख्या वृद्धि है। वैसे जनसंख्या वृद्धि के पीछे भी अशिक्षा ही मुख्य कारण है। अशिक्षित होने से एक परिवार में कई-कई बच्चे पैदा होते हैं। उनकी शिक्षा तो दूर, मां-बाप उनका पेट भी ठीक ढंग से नहीं भर पाते। ऐसी स्थिति में वे उन्हें भी काम पर लगा देते हैं। तीसरा सबसे बड़ा कारण नशे की प्रवृत्ति है। जब पिता को नशे की लत लग जाती है, तो मजबूरी के कारण उसकी संतान को मजदूरी करनी पड़ती है। 

भारत में बाल मजदूरी के तीन रूप हैं। कुछ बच्चे हलवाइयों की दुकानों, ढाबों एवं संपन्न परिवार के घरों में काम करते हैं। परिवार में काम करने वालों को सुबह से लेकर रात तक काम करना पड़ता है। इनको बर्तन मांजना पड़ता है, खाना बनाना पड़ता है तथा परिवार के लोगों की सेवा करनी पड़ती है। उधर ढाबों या होटलों में काम करने वाले बच्चों के हाथ बर्तन मांजते-मांजते खुरदरे हो जाते हैं। उनको दिन-रात भट्टी के सामने काम करना पड़ता है। 

दूसरे प्रकार के मजदूर वे हैं, जो फैक्ट्रियों में काम करते हैं। इन्हें पंद्रह घंटे काम करना पड़ता है। फैक्ट्रियों में काम करने के कारण इनका स्वास्थ्य चौपट हो जाता है। ये विभिन्न बीमारियों का शिकार होकर असमय ही मौत के मुंह में समा जाते हैं। इनकी औसत आयु बहुत कम होती है। कुछ बाल मजदूर किसी के अधीन कार्य नहीं करते। वे सुबह उठकर सड़कों या कूड़े-कचरे के ढेर से कूड़ा बीनते हैं। यही इनकी रोजी-रोटी का जरिया होता है। 

अब बाल मजदूरी की समस्या का क्या समाधान हो सकता है? इसके लिए तो समाज को जागरूक होना होगा। सरकार को ऐसे कड़े कानून बनाने चाहिए, जिससे बाल मजदूरी पर प्रतिबंध लग सके। वैसे गरीबी दूर किए बिना इसका समाधान नहीं हो सकता और गरीबी तब दूर होगी, जब अशिक्षा समाप्त होगी। अशिक्षा ही सबसे बड़ी जड़ है, जिसके कारण बाल मजदूरों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। इसके अलावा जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाना होगा। शिक्षा को बच्चों का मूल अधिकार मानकर सभी राज्यों में नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करनी होगी। साथ ही शिक्षा प्रणाली को रोचक बनाया जाए। इस प्रकार के प्रबंध किए जाएं, जिससे बच्चों में स्कूल जाने की रुचि पैदा हो। बाल मजदूरी हमारे देश के लिए एक कलंक है, जिसे मिटाना परम आवश्यक है।

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