प्रतिभा पलायन पर निबंध |Essay on Brain Drain in Hindi

प्रतिभा पलायन पर निबंध

प्रतिभा पलायन पर निबंध |Essay on Brain Drain in Hindi

प्रतिभा पलायन भारत की एक ऐसी गंभीर समस्या है, जो क्षतिकारक और शर्मनाक दोनों ही है। हमारे देश की बेजोड़ प्रतिभाएं दूसरे देश के लिए लाभकारी हो जाती हैं, जबकि हम अपने यहां उन प्रतिभाओं को तैयार करके भी सही समय पर उनका लाभ नहीं ले पाते हैं। हम अपनी प्रतिभाओं का प्रतिपालन एवं संरक्षण सही ढंग से नहीं कर पाते और दोयम दर्ज की प्रतिभाओं से ही संतोष करते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार प्रतिवर्ष भारत से लगभग 10,000 प्रतिभाएं रोजगार के लिए विदेश चली जाती हैं। 

इन प्रतिभाओं का मूल्यांकन न किए जाने के कारण देश के होनहार छात्र यह सोचते हैं कि पढ़ाई-लिखाई समाप्त करने के बाद यहां हमारे लिए गुंजाइश नहीं है। उदाहरण के लिए आई.आई.टी. से तैयार होकर निकले छात्रों में से 25 प्रतिशत छात्र विकसित देशों में प्रवासी जीवन बिताते हैं। अपने देश से चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर आदि क्षेत्रों में काफी मात्रा में प्रतिभा पलायन है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत से 40 प्रतिशत इंजीनियर, 18 प्रतिशत चिकित्सक और 20 प्रतिशत वैज्ञानिक विदेशों की सेवा करते हैं। सबसे अधिक संख्या में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े लोग विदेश जाते हैं। 

विदेश जाना, वहां शिक्षा ग्रहण करना तथा विदेशों में भ्रमण या अस्थायी प्रवास करना बुरा नहीं है। बुरा यह है कि हमारे यहां के प्रतिभा संपन्न लोग विदेशों की नागरिकता हासिल करके वहां जीवन व्यतीत करते हैं, वहीं की संस्कृति में रम जाते हैं और भारतीय मूल के प्रवासी कहलाने में गर्व अनुभव करते हैं। हमारे देश के अनेक महापुरुषों ने विदेशों में शिक्षा ग्रहण की, परंतु उनमें देशानुराग की भावना कम नहीं हुई। विदेश से लौटने पर उनके विचारों में उदासीनता नहीं आई। उनमें देशभक्ति की भावना शाश्वत रही। 

अपने देश के प्रतिभा संपन्न नौजवान अपने उमंग, निष्ठा तथा कर्तव्य पालन की भावना से दूसरे देश का कल्याण सिर्फ इसलिए करें कि अधिक धनोपार्जन हो सके–यह अपने देश के लिए शुभ संकेत नहीं है, लेकिन डॉलर और पौंड का आकर्षण उन्हें विदेश में खींच ले जाता है। यह भी सच है कि भारत में प्रतिभाओं को नौकरी के अभाव में सड़कों पर धूल छानते देखा जा सकता है। इसके लिए यहां के करोड़ों पढ़े-लिखे नौजवानों की बेरोजगारी पूर्णतः जिम्मेदार है। इन प्रतिभाओं से लाभान्वित होने वाले देश भारतीय अप्रवासियों के उद्देश्य से भली-भांति अवगत होते हैं। ऐसे में उनकी आब्रजन नीति से भी प्रतिभा पलायन को काफी बढ़ावा मिलता है। 

वस्तुतः प्रतिभाशाली व्यक्तियों के लिए भारत में अपेक्षित सुविधाएं नहीं हैं। उन्हें वित्तीय सहायता भी सही ढंग से नहीं मिल पाती। शिक्षा के माध्यम से देश भक्ति की भावना का उदय नहीं हो पाता। अस्तु नौजवानों का दिग्भ्रमित होना आश्चर्यजनक नहीं है। भारतीयों की हीन भावना और अपनी संस्कृति से विमुखता भी विदेश पलायन के महत्वपूर्ण कारण हैं। अत: सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि भारतीयों की हीन भावना समाप्त हो और अपनी संस्कृति के प्रति उनमें आकर्षण बढ़े। 

यह गर्व का विषय है कि हमारे देश की प्रतिभाओं की विदेशों में काफी कद्र होती है। लेकिन इससे हमें कोई लाभ नहीं मिल पाता। लाभान्वित तो विदेश होता है। किसी भी क्षेत्र में भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। किसी भी मायने में भारत खनिज संपदा में कमजोर नहीं है। फिर भी भारत के गरीबों के जीवन की तस्वीर ही भारतवर्ष की असली तस्वीर है। लेकिन जो भी हो, प्रतिभा का अनवरत पलायन भारत के हित में नहीं है।

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