सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक पर निबंध| सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर निबंध| Essay on ban on single use plastic in Hindi

सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक

सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक | सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर निबंध| essay on ban on single use plastic   in Hindi

केन्द्र सरकार द्वारा कुछ प्रकार के सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध 1 जुलाई से देश भर में लागू कर दिया गया है. हालाँकि उद्योग जगत् की ओर से सरकार पर इस निर्णय को कुछ समय के लिए स्थगित करने के लिए दबाव था. लेकिन हाल ही में केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने स्पष्ट कर दिया था कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने की प्रक्रिया 2018 से ही शुरू हो गई थी और निर्माताओं को इसके लिए पर्याप्त समय दिया जा चुका है, इसलिए फैसले को अब टाला नहीं जा सकता.वैसे भी 12 अगस्त, 2021 को ही इस सम्बन्ध में अधिसूचना जारी कर दी गई थी और इस प्रकार निर्माताओं, भण्डार करने वालों तथा इस्तेमाल करने वाली एजेंसियों को लगभग 1 वर्ष का समय मिल गया था. 

1 जुलाई, 2022 से प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के उत्पादों की सूची निम्नलिखित है- 

सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक

सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध इसलिए बेहद जरूरी था, क्योंकि प्लास्टिक प्रदूषण में इनका बड़ा योगदान रहा है. इस प्रकार के उत्पादों का कचरा सीवेज सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती उत्पन्न करता रहा है और ये उत्पाद जमीन से लेकर पानी तक को भी बुरी तरह प्रदूषित कर रहे हैं. सिंगल यूज प्लास्टिक अकसर नालों के जाम होने का भी बड़ा कारण है, जिससे बाढ़ जैसी गम्भीर समस्या भी पैदा हो जाती है. भारत में प्लास्टिक कचरे की समस्या कितनी गम्भीर है, यह इसी से समझा जा सकता कि वर्ष 2020-21 के दौरान ही देशभर में 4-12 मिलियन टन प्लास्टिक कचरे का उत्पादन हुआ था. कुल प्लास्टिक कचरे में 10 से 35 प्रतिशत तक सिंगल यूज प्लास्टिक होता है. ऑकड़ों पर नजर डालें, तो प्रतिवर्ष करीब 3 किग्रा प्रति व्यक्ति प्लास्टिक कचरा पैदा करता है और सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल प्रति व्यक्ति 0-18 किग्रा होता है, 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2022 तक एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित करने के आह्वान के पश्चात् पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 12 अगस्त, 2021 को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम 2021 जारी किया गया था और 1 जुलाई, 2022 से भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा करते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त भारत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया था. करीब 3 वर्ष पूर्व स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से देश को प्लास्टिक कचरे से मुक्त कराने का अभियान छेड़ने का आह्वान किया था और उसके बाद उन्होंने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से भी देशवासियों से देश को प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने की अपील करते हुए तमाम सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं से आग्रह किया कि वे प्लास्टिक कचरे का निस्तारण करने के लिए आगे आएं. सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ इस अभियान का अहम् कारण यही है कि यदि सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग नहीं रोका गया, तो भू रक्षण का नया स्वरूप सामने आएगा और फिर जमीन की उत्पादकता को वापस प्राप्त करना नामुमकिन होगा. 

सिंगल यूज प्लास्टिक प्रायः प्लास्टिक की ऐसी वस्तुएं होती हैं, जो रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के लिए नहीं जाती बल्कि इन्हें केवल एक बार इस्तेमाल करने के बाद फेंक दिया जाता है. सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं तथा प्रतिबंधित वस्तुओं के निर्माण, आयात, भण्डारण, वितरण, बिक्री व उपयोग की जाँच के लिए विशेष प्रवर्तन दल भी गठित किए गए हैं, प्रतिबंध लागू होने के बाद राज्य सरकारें एक अभियान शुरू कर ऐसी वस्तुओं के निर्माण. वितरण, भण्डारण और बिक्री से जुड़ी इकाइयों को बन्द कराने की पहल करेंगी तथा प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसके तहत् जुर्माना, जेल की सजा या दोनों शामिल है. केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा लोगों की मदद लेने के लिए एक शिकायत निवारण ऐप भी शुरू किया गया है, हालाँकि एफएमसीजी क्षेत्र में पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक इसे विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व (ईपीआर) दिशा-निर्देशों के अन्तर्गत रखा जाएगा, 

सिंगल यूज प्लास्टिक ‘स्वच्छ भारत अभियान’ में सबसे बड़ी बाधा है, इसीलिए प्लास्टिक कचरे की विकराल होती समस्या के मद्देनजर इससे उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय समस्याओं पर कुछ हद तक लगाम कसने के लिए सरकार को इस तरह के प्लास्टिक को प्रतिबंधित करने का निर्णय लेना पड़ा. ‘प्लास्टिक मुक्त भारत’ अभियान से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि सिंगल यूज प्लास्टिक में पॉलीथीन, प्लास्टिक के कप-प्लेट, बोतलें, स्ट्रा, कुछ प्रकार के सैशे इत्यादि पर प्रतिबंध लग जाने से भारत में 14 मिलियन टन प्लास्टिक की खपत कम हो जाएगी, जिससे सालाना प्लास्टिक की खपत में 5-10 प्रतिशत तक की कमी आएगी, लेकिन यह लक्ष्य तभी हासिल हो सकेगा, जब नियमों को सख्ती से लागू कराने के प्रति केन्द्र तथा राज्य सरकारें गम्भीर होंगी और लोगों को भी इस दिशा में जागरूक किया जाएगा. 

सिंगल यूज प्लास्टिक ऐसा प्लास्टिक है, जिसे हम एक बार इस्तेमाल कर कूड़े में फेंक देते हैं, ब्रसेल्स आयोग के सदस्य फ्रांस टिमरमंस के अनुसार प्लास्टिक की थैली सिर्फ 5 सेकण्ड में ही तैयार हो जाती है, लोग जिसका प्रायः 5 मिनट ही इस्तेमाल करते हैं, जिसे गलकर नष्ट होने में 500 वर्ष लग जाते हैं. प्लास्टिक की एक थैली को नष्ट होने में 20 से 1,000 वर्ष तक लग जाते हैं, जबकि एक प्लास्टिक की बोतल को 450 वर्ष, प्लास्टिक कप को 50 वर्ष और प्लास्टिक की परत वाले पेपर कप को नष्ट होने में करीब 30 वर्ष लगते हैं. 

प्रति वर्ष उत्पादित प्लास्टिक कचरे में से सर्वाधिक प्लास्टिक कचरा सिंगल यूज प्लास्टिक का ही होता है और इसका खतरा इसी से समझा जा सकता है कि ऐसे प्लास्टिक में से केवल 20 प्रतिशत प्लास्टिक ही रिसाइकल हो पाता है, करीब 39 प्रतिशत प्लास्टिक को जमीन के अन्दर दबाकर नष्ट किया जाता है, जिससे जमीन की उर्वरक क्षमता प्रभावित होती है और यह जमीन में केंचुए जैसे जमीन को उपजाऊ बनाने वाले जीवों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर देती है. 15 प्रतिशत प्लास्टिक जलाकर नष्ट किया जाता है और प्लास्टिक को जलाने की इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में वातावरण में उत्सर्जित होने वाली हाइड्रो कार्बन, कार्बन मोनोक्साइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें फेफड़ों के कैंसर व हृदय रोगों सहित कई बीमारियों का कारण बनती हैं. प्लास्टिक प्रदूषण से छुटकारा पाने का एकमात्र उपाय यही है कि लोगों को इसके खतरों के प्रति सचेत और जागरूक करते हुए उन्हें हर तरह के प्लास्टिक का उपयोग कम-से-कम करने को प्रेरित किया जाए. 

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