आयुष्मान भारत योजना पर निबंध |Essay on Ayushman Bharat Yojana in Hindi

आयुष्मान भारत योजना पर निबंध

आयुष्मान भारत योजना पर निबंध |Essay on Ayushman Bharat Yojana in Hindiआयुष्मान भारत : राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना 

आयुष्मान का शाब्दिक अर्थ होता है चिरंजीवी। भारत आयुष्मान’ तभी बन पाएगा, जब देश के गरीबों-वंचितों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे में लाया जाए एवं स्वास्थ्य संरक्षण को वरीयता दी जाए। सुखद है कि ऐसा होता दिख रहा है। वार्षिक बजट 2018 19 में तत्कालीन वित्त मंत्री ने ‘आयुष्मान भारत’ नाम से एक फ्लैगशिप योजना लांच की, जिसे ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ (National Health Protection Scheme: NHPS) के तहत अमल में लाए जाने की घोषणा की गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना दनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है। इस योजना का ‘मोदी केयर’ नाम दिया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों को सालाना 5 लाख रुपए के स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) की सुविधा दी जाएगी। यह योजना 2 अक्टूबर, 2018 से लागू हुई। मार्च, 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आयमान भारत योजना को मंजूरी दी गई। योजना के तहत अगले दो वर्षों में 10,500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वर्ष 2019-20 के लिए इस योजना हेतु 6400 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इस योजना के तहत लाभार्थियों की पात्रता वर्ष 2011 की ‘सोशियो-इकोनॉमिक कास्ट सेंसर के आधार पर सुनिश्चित की जायेगी, जिन्हें इस जनगणना के तहत ‘वंचित’ के तौर पर वर्गीकृत किया गया है, उन्हें ही इस योजना का लाभ प्राप्त होगा। 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल, 2018 को आयुष्मान भारत के अंतर्गत पहले स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन हतीसगढ़ के बीजापुर के एक छोटे से गांव जांगला से किया। सरकार का 2018-10 वित्त वर्ष में 18,840 स्वास्थ्य केंद्रों को वेलनेस सेटर में बदलने का लक्ष्य है। 

आयुष्मान भारत स्कीम ट्रस्ट मॉडल या इंश्योरेंस मॉडल की तर्ज पर काम करेगी। यानी इस योजना का लाभ उठाने वाले गरीब मरीजों का बीमा किया जाएगा और फिर गरीब मरीज किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में कैशलेस इलाज करा सकेंगे। प्रतिपूर्ति मोडल (Reimburse Model) को इस योजना से दूर रखा गया है। यानी पहले खुद के खचे से इलाज करवाकर सरकार से पांच लाख रुपए तक की रकम वापस पाने का झंझट इस योजना में नहीं होगा। बीमा पॉलिसी के पहले दिन से सभी शतों को आच्छादित किया जाएगा। लाभार्थी को हर बार अस्पताल में भर्ती होने पर परिवहन भत्ते का भुगतान किया जाएगा। पैनल में शामिल देश के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल से कैशलेस लाभ की अनुमति होगी। लागत नियंत्रित करने के लिए पैकेज दर (सरकार द्वारा अग्रिम रूप से परिभाषित) के आधार पर इलाज के लिए भुगतान होगा। पैकेज दर में इलाज से संबंधित सारी लागत शामिल होगी। लाभार्थियों के लिए यह कैशलेस और पेपरलेस लेन-देन होगा। राज्यों के पास इन दरों में सीमित रूप से संशोधन का लचीलापन होगा। 

इस योजना के तहत केंद्र और राज्यों की फंडिंग का अनुपात 60:40 का होगा। प्रति परिवार प्रीमियम पर अनुमानित खर्च 1000 रुपये से लेकर 1200 रुपये होगा। 2011 के सोशियो-इकोनॉमिक कॉस्ट सेन्सस में ‘वंचित’ के तौर पर वर्गीकृत 10 करोड़ परिवार इस योजना के दायरे में आयेंगे। प्रति परिवार को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का कवरेज मिलेगा। एक बार जब योजना लांच हो जाएगी तो ये परिवार खुद-ब-खुद इसके दायरे में आ जाएंगे। परिवार के आकार पर कोई सीमा नहीं है यानी परिवार में चाहे जितने सदस्य हों, सबको कवरेज मिलेगा। इस तरह 10 करोड़ परिवारों की करीब 50 करोड़ आबादी इस योजना के दायरे में आ जाएगी जो कि देश की कुल आबादी का 40.3 प्रतिशत है। योजना का क्रियान्वयन स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के माध्यम से किया जायेगा। बीमा का प्रीमियम सरकार भरेगी और आम लोगों से इसमें कोई अंशदान नहीं लिया जायेगा। 

पहले से चल रही ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना’ एवं ‘वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना’ को ‘आयुष्मान भारत : राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ में समन्वित किया गया है। इसके साथ ही देशभर में डेढ़ लाख स्वास्थ्य उपकेंद्रों को विकसित करने की सरकार की योजना है जो जरूरी दवाएं और जांच सेवाएं फ्री में मुहैया कराएंगे। इन सेंटरों में गैर-संक्रामक बीमारियों और जच्चा-बच्चा की देखभाल भी होगी। इतना ही नहीं, इन सेंटरों में इलाज के साथ-साथ जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों, मसलन हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज और टेंशन पर नियंत्रण के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सरकार ने इस मद में 1200 करोड़ रुपये का इंतजाम किया है। 

देश में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए 24 जिला अस्पतालों क डकर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल खोले जाएंगे। हर तीन रुसदौर के में एक मेडिकल कॉलेज खोलना प्रस्तावित है। | ज्ञाता है कि अभी देश में प्राइवेट और सरकारी मेडिकल कॉलेजों से हर साल 67 हजार एमबीबीएस और 31 हजार पोस्ट ग्रेजुएट पीजी डॉक्टर निकल रहे हैं। एम्स के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा था कि 130 करोड़ की आबादी वाले देश में इलाज के लिए डॉक्टरों की यह तादाद बहुत कम है। विदित है कि वर्तमान में देश में 479 मेडिकल कॉलेज हैं जो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडेय (MC) से सम्बद्ध हैं। 

आयुष्मान भारत या ‘मोदी-केयर को एनडीए सरकार की सबसे महत्वाकाक्षी योजना माना जा रहा है। धारणाओं के विपरीत, प्रधानमत्रों को स्वास्थ सेवा योजना कोई लोक-लुभावन तरकीब या हवा-हवाई विचार नहीं है। सरकार ने भले ही इसकी घोषणा 2018 के बजट में की है, लेकिन इस योजना की पहल दो वर्ष पूर्व ही हो चुकी थी।

वर्ष 2016 के मध्य में, बहुत सोच-विचार के बाद नौकरशाहों ने एक सुसंगत और नीतिगत खाका तैयार किया। इसमें प्रधानमंत्री को दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा योजना शुरू करने का सुझाव दिया गया था। इस सुझाव के साथ प्रधानमंत्री को यूनिवर्सल एक्सेस एंड क्वालिटी’ नाम के शीर्षक वाली 28 पन्नों की एक रिपोर्ट भी सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सरकार को सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) के आधार पर 10 करोड़ गरीब और वंचित परिवारों को मुफ्त में स्वास्थ्य सुरक्षा मुहैया करानी होगी। दो साल बाद, अब यह प्रस्ताव हकीकत में बदलने जा रहा है। माना जा रहा है कि इस योजना के दायरे में देश के सभी नागरिकों को लाया जायेगा जिसमें 10 करोड़ वंचित परिवारों (एसईसीसी के अनुसार) को इस योजना का लाभ मुफ्त में, जबकि अन्य नागरिकों को भुगतान के आधार पर सुविधा मिलने की उम्मीद है। 

यकीनन राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना ‘आयुष्मान भारत’ एक सुचिंतित एवं व्यापक योजना है, जो कि देश के गरीबों और वंचितों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इससे गरीबों को काफी राहत मिलेगी और उनका समुचित उपचार हो सकेगा। स्वास्थ्य संरक्षण की इस व्यापक पहल से हम उस स्वस्थ भारत की तरफ बढ़ेंगे, जो ‘आयुष्मान’ होगा। 

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