अग्निपथ योजना पर निबंध | Essay on Agnipath Scheme in Hindi |अग्निपथ योजना सेना की आवश्यकता या सशक्तिकरण 

अग्निपथ योजना पर निबंध

अग्निपथ योजना पर निबंध | Essay on Agnipath Scheme in Hindi  ( सैन्य लेख ) अग्निपथ योजना सेना की आवश्यकता या सशक्तिकरण 

14 जून, 2022 को घोषित अग्निपथ सशस्त्र बलों के लिए एक नई मानव संसाधन प्रबंधन योजना है. इस योजना के तहत् शामिल किए गए उम्मीदवारों को अग्निवीर कहा जाएगा. समकालीन प्रौद्योगिकी (ऑनलाइन स्टार परीक्षा और सम्बन्धित परीक्षण विधियों), औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, एनएसक्यूएफ आदि जैसे मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थानों में विशेष रैलियों और परिसर साक्षात्कार का उपयोग करते हुए, देश के सभी हिस्सों से उम्मीदवारों को अग्निवीर के रूप में नामांकित करने का प्रयास किया जाएगा. अग्निवीर भारतीय सशस्त्र बल में एक अलग रैक बनाएंगे, जो किसी भी मौजूदा रैक से अलग होगा. नामांकन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, प्रत्येक ‘अग्निवर’ को अग्निपथ योजना के सभी नियमों और शर्तों को औपचारिक रूप से स्वीकार करना होगा. 18 वर्ष से कम आयु के कर्मियों के लिए, मौजूदा प्रावधानों के अनुसार नामांकन फॉर्म पर माता-पिता/अभिभावकों द्वारा हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होगी. 

4 वर्ष की अवधि के बाद, सभी अग्निवीर समाज में वापस चले जाएंगे और प्रत्येक अग्निवीर द्वारा प्राप्त कौशल को उसके बायोडाटा का हिस्सा बनाने के लिए एक प्रमाण-पत्र में दर्ज किया जाएगा. हालांकि, भारतीय सशस्त्र बल द्वारा घोषित संगठनात्मक आवश्यकताओं और नीतियों के आधार पर, बाहर निकलने वाले अग्निवीर को भारतीय सशस्त्र बल में नियमित कैडर में नामांकन के लिए आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा इन आवेदनों पर एक केन्द्रीकृत बोर्ड द्वारा पारदर्शी तरीके से विचार किया जाएगा, लेकिन अग्निवीर के विशिष्ट बैच की क्षमता के 25 प्रतिशत से अधिक को भारतीय सशस्त्र बल में नामांकित नहीं किया जाएगा, अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में आगे नामांकन के लिए चुने जाने का कोई विशिष्ट अधिकार नहीं होगा. उनके चयन में केवल सरकार का अनन्य क्षेत्राधिकार होगा. मेडिकल ट्रेडमैन को छोड़कर भारतीय वायु सेना के नियमित कैडर में एयरमैन के रूप में नामांकन केवल उन्हीं कर्मियों के लिए उपलब्ध होगा, जिन्होंने अग्निवीर के रूप में अपनी पेशेवर अवधि पूरी कर ली है. 

अग्निपथ योजना की प्रमुख विशेषताएं  निम्न प्रकार हैं –

योजना के तहत सभी वर्ग के लिए पात्रता अखिल भारतीय है. इसमें किसी विशेष रेजीमेंट की बजाय राष्ट्रीय स्तर पर भर्ती का प्रावधान किया गया है. यह योजना केवल अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मियों के लिए लागू होगी. अग्निवीर बनने के लिए

आयु सीमा 17.5 वर्ष से 21 वर्ष निश्चित की गई है. हालांकि इस वर्ष के लिए आयु सीमा को बढ़ाकर 23 वर्ष किया गया है.

शैक्षणिक योग्यता और शारीरिक मानक भारतीय वायु सेना द्वारा जारी निर्देशात्मक मानकों के अधीन होंगे. फिलहाल योजना के तहत न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं कक्षा निर्धारित की गई है, स्थायी नामांकन की स्थिति में अग्निवीरों की पात्रता सेना के मौजूदा नियमों के अनुसार जाँच की जाएगी.

योजना के तहत् अग्निवीर के रूप में भर्ती किए जाने वाले नौजवानों के प्रत्येक बैच से 25 प्रतिशत सैनिकों को नियमित कैडर की सेवा में लिया जाएगा, जो योग्यता आधारित आकलन पर होगा और उनकी सैन्य सेवाएं न्यूनतम 15 वर्षों के लिए होंगी. यदि अग्निवीर पेशेवर अवधि पूरी होने से पहले ही रिजाइन कर देता है, तो इस स्थिति में केवल उनके द्वारा जमा किया गया कंट्रीब्यूशन ही प्रदान किया जाएगा.यदि अग्निवीर द्वारा सेना की गुप्त जानकारी सार्वजनिक की गई या किसी से साझा की गई, तो ऑफिशल सीक्रेट एक्ट, 1923 के अन्तर्गत अग्निवीर के ऊपर कार्यवाही की जाएगी.

प्रत्येक अग्निवीर को देय वेतन पहले वर्ष ₹30,000 प्रति माह, दूसरे वर्ष 33,000, तीसरे वर्ष 36-5 हजार और चौथे वर्ष ₹40,000 प्रति माह होगा, जो कॉर्पस फंड में 30 प्रतिशत कटौती के पश्चात् क्रमश:₹21,000,23,100,25,550 और 28,000 प्रति माह हाथ में प्राप्त होगा जिसमें सालाना ₹3.500 तक की वृद्धि होगी. इसके अलावा, जोखिम और कठिनाई, पोशाक और यात्रा भत्ते का भुगतान किया जाएगा. इस तरह, अग्निवीर को पहले वर्ष में कुल ₹4.76 लाख का वार्षिक पैकेज प्रदान किया जाएगा, जो बढ़कर चौथे वर्ष में ₹6.92 लाख तक हो जाएगा

प्रत्येक अग्निवीर को अपने मासिक वेतन का 30 प्रतिशत का अग्निवीर कॉर्पस फंड में योगदान देना होगा. सरकार द्वारा भी इसमें समान राशि का योगदान किया जाएगा. कॉर्पस फंड के अलावा अग्निवीरों को सरकार के किसी भी भविष्य निधि में योगदान करने की आवश्यकता नहीं होगी. इससे निर्मित एकमुश्त सेवा निधि पैकेज के तहत् 4 वर्ष पूरे होने के पश्चात् अग्निवीर को ₹ 11.71 लाख की राशि प्रदान की जाएगी, जो आयकर से मुक्त होगी. इसके अलावा अग्निवीरों को ग्रेच्युटी या अन्य किसी भी प्रकार के पेंशन लाभ का कोई अधिकार नहीं होगा.

प्रत्येक अग्निवीर को सेवा निधि पैकेज प्राप्त करने के लिए दो विकल्प प्रदान किए जाएंगे, जिसका उद्देश्य एक तो बैंक गारंटी के माध्यम से स्वरोजगार/ उद्यमिता के लिए वित्तीय ऋण प्रदान करना और दूसरा, बाहर निकलने पर तत्काल/आकस्मिक खर्चों को पूरा करना है, जिसका विवरण भारत सरकार द्वारा अलग से जारी किया जाएगा.

भारतीय सशस्त्र बल में अग्निवीरों के रूप में उनकी पेशेवर अवधि के लिए₹48 लाख का जीवन बीमा कवर प्रदान किया जाएगा.

पेशेवर अवधि के अंत में, अग्निवीरों को एक विस्तृत ‘अग्निवीर कौशल प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा, जिसमें उनकी पेशेवर अवधि के दौरान उनके द्वारा हासिल किए गए कौशल और योग्यता के स्तर पर प्रकाश डाला जाएगा. कार्यकाल पूरा होने के पश्चात् अग्निवीरों के लिए कौशल प्रमाण-पत्र और उच्चतर शिक्षा के लिए क्रेडिट का प्रावधान भी किया गया है. यदि अग्निवीर दसवीं कक्षा पास करके सेना में भर्ती होता है, तो उसको 4 वर्ष की सेवा प्रदान करने के पश्चात् 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा.

पेशेवर अवधि के दौरान अग्निवीर भारतीय सशस्त्र बल के सेवा अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा के साथ सीएसडी प्रावधानों के भी हकदार होंगे, अग्निवीरों को भी रक्षा कार्मिकों और अधिकारियों के समान कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट(सीएसडी) सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, लेकिन एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम, एक्स सर्विसमैन स्टेटस एवं सेना को प्रदान किए जाने वाले अन्य लाभ अग्निवीर को प्रदान नहीं किए जाएंगे.

अग्निवीरों को नामांकित होने पर संगठनात्मक आवश्यकताओं के आधार पर सैन्य प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. युवाओं की गतिशीलता को प्रोत्साहित करने और पहचानने के लिए, अग्निवीरों को पेशेवर अवधि के दौरान विशिष्ट प्रतीक चिन्ह वर्दी प्रदान की जाएगी. भारतीय सेना के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार अग्निवीर सम्मान और पुरस्कार के हकदार होंगे.

अवकाश की अनुमति संगठन की अत्यावश्यकताओं के अधीन होगी. अग्निवीरों को उनकी पेशेवर अवधि के दौरान प्रति वर्ष 30 दिन की वार्षिक छुट्टी और चिकित्सा सलाह के आधार पर चिकित्सा अवकाश प्रदान किया जाएगा.

अग्निवीरों को वित्तीय लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से होने वाली मृत्यु को 3 प्रकार से वर्गीकृत किया गया है. एक्स श्रेणी की मृत्यु जो प्राकृतिक कारणों से हुई है. वाई श्रेणी की मृत्यु उन कारणों से होती है जिन्हें सैन्य सेवा के कारण स्वीकार किया जाता है या पेशेवर अवधि के दौरान प्रशिक्षण सहित कर्तव्यों के प्रदर्शन में दुर्घटनाओं/दुर्घटनाओं के कारण मृत्यु हो जाती है, जेड श्रेणी की मृत्यु इसमें पेशेवर अवधि के दौरान, सीमा पर झड़पों/युद्ध/शांति अभियान/नागरिक शक्ति को सहायता आदि के दौरान आतंकवादियों, असामाजिक तत्वों, दुश्मन द्वारा हिंसा/हमले के कृत्यों के कारण मृत्यु (अथवा युद्ध के लिए संक्रियात्मक तैयारी और प्रशिक्षण के दौरान जिसमें युद्ध प्रशिक्षण/अभ्यास शामिल हैं) या फिर प्राकृतिक आपदाओं/सरकार द्वारा विशेष रूप से अधिसूचित प्रचालनों आदि के कारण आकस्मिक मौतें शामिल हैं.

यदि अग्निवीर की मृत्यु बोनाफाइड ड्यूटी पर पेशेवर अवधि के दौरान वाई या जेड श्रेणी में होती है, तो उसके लाभार्थी को ₹48 लाख का बीमा कवर, ₹44 लाख एकमुश्त अनुग्रह राशि, सेवा निधि घटक सहित चार वर्ष (मृत्यु की तारीख) तक की अवधि के लिए पूर्ण वेतन, व्यक्ति की सेवा निधि में संचित शेष राशि और अग्निवीर कॉर्पस फड से व्याज सहित सरकारी योगदान की धनराशि प्रदान की जाएगी. 

यदि अग्निवीर की मृत्यु पेशेवर अवधि के दौरान ड्यूटी पर नहीं होने या फिर एक्स श्रेणी में होती है, तो उसके लाभार्थी को केवल ₹48 लाख का बीमा कवर, व्यक्ति की सेवा निधि में संचित शेष राशि और अग्निवीर कॉर्पस फंड से व्याज सहित सरकारी योगदान की धनराशि प्रदान की जाएगी.

पेशेवर अवधि के दौरान नियुक्ति की शर्तों के कारण यदि कोई अग्निवीर विकलांग होता है, तो चिकित्सा अधिकारियों द्वारा निर्धारित दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर मुआवजा के रूप में अग्निवीर को सार्वजनिक निधि से विकलांगता के प्रतिशत के आधार पर एकमुश्त अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी. यदि विकलांगता 20 से 49 प्रतिशत के बीच है, तो एकमुश्त अनुग्रह राशि ₹ 15 लाख, यदि विकलांगता 50 से 75 प्रतिशत तक है, तो एकमुश्त अनुग्रह राशि ₹25 लाख, यदि विकलांगता 76 से 100 प्रतिशत तक है, तो एकमुश्त अनुग्रह राशि ₹44 लाख प्रदान की जाएगी. इसके अलावा सेवा निधि घटक सहित 4 वर्षों तक पूर्ण वेतन, अग्निवीर कॉर्पस फंड से ब्याज और सरकारी योगदान सहित व्यक्ति की सेवा निधि निधि में जमा शेष भी प्रदान की जाएगी. 

अग्निपथ योजना की आवश्यकता- भारत अपने सैन्य ढाँचे में ऐसी व्यवस्था करने वाला पहला देश नहीं है, दुनिया के कई देशों में पहले ही ऐसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं. जैसे संयुक्त राज्य अमरीका में सैन्य और सैन्य सेवा शाखा की जरूरतों के आधार पर 6-9 माह या 12 महीने की तैनाती की जाती है, इसे स्वैच्छिक ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ कहा जाता है. इसी तरह, इजरायल, नॉर्वे, उत्तर कोरिया और स्वीडन आदि देशों में ‘अनिवार्य सैनिक सेवा’ प्रणाली लागू है और इसे अनिवार्य ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ कहा जाता है. दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहाँ पर अनिवार्य सैन्य सेवा लागू है. रूस की सेना में भर्ती के लिए कॉन्सक्रिप्ट और कॉन्ट्रैक्टर के हाइब्रिड मॉडल का इस्तेमाल होता है. रूस में 18 से 27 आयु के पुरुषों को सैन्य सेवा अनिवार्य है. यह 1980 तक 2 वर्ष की अवधि के लिए थी, बाद में इसे घटाकर 18 महीने कर दिया गया और 2008 में सेवा की अनिवार्य अवधि को घटाकर 1 वर्ष कर दिया गया था. इजरायल में पुरुषों और महिलाओं दोनों हेतु अनिवार्य सैन्य सेवा आवश्यक है. यहाँ पुरुषों को 32 महीने और महिलाओं को 24 महीने की अनिवार्य सैन्य सेवा करनी होती है. अनिवार्य अवधि के बाद जो सेना में कॅरियर बनाना चाहते हैं, वे स्थायी सेवा में प्रवेश करते हैं और इन सैनिकों को पूरा वेतन मिलता है, लेकिन संविदा अवधि पूरी होने पर ही पेंशन के हकदार होते हैं. बरमूडा की अनिवार्य सैन्य सेवा लॉटरी प्रणाली पर आधारित है, जिसमें पुरुषों को सेना में भर्ती होने के लिए सरकार लॉटरी निकालती है और जिसके नाम लॉटरी खुलती है, उसे बरमूडा रेजिमेंट में अनिवार्यतः 38 महीनों के लिए सैन्य सेवा करनी होती है. ब्राजील में अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत् हर ब्राजीली युवा पुरुष को 18 वर्ष के होते ही सेना में 12 महीने तक मिलिट्री सर्विस करनी होती है. साइप्रस में अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत् सभी ग्रीक साइप्रियट पुरुषों को 24 महीने के लिए अनिवार्यतः सेना में काम करना होता है. ग्रीस में अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत 19 वर्ष के होते ही युवाओं को सैन्य सेवा में भर्ती होना होता है, ईरान में अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत 24 महीने तक सेना की सेवा करनी होती है. सीमा पर तैनाती की स्थिति में अनिवार्य अवधि घटाकर 20 महीने कर दिया जाता है. उत्तर कोरिया में अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत् सेवा 17 की उम्र में शुरु होकर 30 वर्ष की उम्र में खत्म हो जाती है, चीन में अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत् 18 से 22 वर्ष के युवाओं को 24 महीने की सैन्य सेवा अनिवार्य रूप से देनी होती है, हालांकि हांगकांग और मकाऊ जैसे विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों के नागरिकों को सेना से जुड़ने के लिए छूट दी गई है. दक्षिण कोरिया में अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत् 18 से 28 वर्ष के युवाओं को अनिवार्यतः 2 वर्ष तक सेना में रहना होता है, स्विट्जरलैंड में अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत् सभी स्वस्थ पुरुषों को वयस्क होते ही करीब 21 हफ्ते की सैन्य सेवा देनी होती है, जबकि महिलाओं के लिए स्वैच्छिक है. 

भारत के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्थायी सेना है, जिसमें करीब 15.5 लाख कर्मी सक्रिय ड्यूटी पर हैं. इस मामले में भारत चीन से पीछे है, जहाँ करीब 20 लाख सैनिक सक्रिय ड्यूटी पर हैं, जबकि अमरीका में नियमित सेना के सैनिकों की संख्या 4.81 लाख ही है, यदि इसमें आर्मी नेशनल गार्ड और यूएस आर्मी रिजर्व को मिला दिया जाए, तो अमरीकी सेना की संयुक्त घटक क्षमता 10 लाख सैनिकों की है. इसी तरह, रूस के पास 8.50 लाख सक्रिय सेना और 2-50 लाख रिजर्व सेना सहित कुल 13.50 लाख सैनिक हैं. इसके बावजूद यदि सुरक्षा के हिसाब से अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं की बात करें, तो चीन के पास दुनिया में सबसे लम्बी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा है, जिसकी कुल लम्बाई 22,147 किमी है. चीन के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लम्बी भूमि सीमा रूस की है जिसकी कुल लम्बाई 20,241 किमी है. इन दोनों देशों के साथ 14-14 देशों की सीमाएं लगती हैं. इसके बाद तीसरी और चौथी सर्वाधिक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा वाले देश ब्राजील और भारत हैं, भारत के पास अन्तर्राष्ट्रीय थल सीमा 15,106-7 किलोमीटर है, जो 7 देशों से लगती है, जबकि अमरीका की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा भारत से कम है. इस हिसाब से सैन्य साजो-सामान की बजाय भारत का कार्मिक व्यय आनुपातिक रूप से काफी अधिक है. 

अग्निपथ योजना से प्रशिक्षित सशस्त्र बलों का एक आपातकालीन रिजर्व कोश तैयार होगा, जो देश की आकस्मिकताओं के समय प्रयोग किया जा सकेगा. जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध के समय देखा गया है कि जब सैन्य बलों की कमी को पूरा करने के लिए आम युक्रेनी नागरिकों को रूसी सेना से लड़ने के लिए सैन्य आयुध उपलब्ध कराए, तो उनमें सैन्य आयुध चलाने का आवश्यक कौशल नहीं होने के कारण बहुत से आम यूक्रेनी नागरिक बेवजह मारे गए हैं.अग्निपथ योजना से देश में प्रशिक्षित युवाओं का एक रिजर्व स्टॉक तैयार होगा, जो राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की भाँति होगा, लेकिन एनसीसी से बहुत अधिक दक्ष होगा, जिसे सीधे सैन्य कमान या युद्ध के मैदान में भेजा जा सकेगा, जैसे 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में सशस्त्र बलों के साथ एनसीसी ने भी अपना योगदान दिया था.9 सितम्बर, 1965 को प्रकाशित असाधारण राजपत्र के अनुसार सरकार ने एनसीसी अधिकारियों और कैडेट्स (लड़कियों सहित) को 17 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सीनियर डिवीजन में शामिल किया था. कैडेटों को नागरिक सुरक्षा गश्ती, दूत सेवा, अस्पताल की ड्यूटी और लुक आउट सहित नागरिक सुरक्षा चौकियों की देखरेख का काम सौंपा गया था और एनसीसी कैडेटों ने पश्चिमी सीमाओं पर बाँध बनाने में भी मदद की जहाँ युद्ध लड़ा गया था, लेकिन सशस्त्र बलों की भूमिका, आयुध नियंत्रण और सैन्य इंजीनियर सेवाओं आदि में एनसीसी कैडेटों का प्रयोग सम्भव नहीं था, जबकि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त अग्निवीर उक्त सभी भूमिकाएं निर्वाह करने में सक्षम होंगे. 

वर्ष 1989 में भारतीय सेना की औसत उम्र 30 वर्ष थी, जो अब बढ़कर 32 वर्ष हो गई है, जबकि अमरीकी सेना की औसत उम्र 27 वर्ष है. कई समितियों की अनुशंसा और भारतीय सेना की माँग रही है कि सेना की औसत उम्र घटाकर 26 वर्ष करना चाहिए. अरुण सिंह समिति और कारगिल समीक्षा समिति की सिफारिशें भी औसत आयु घटाने की समर्थक रही हैं. कारगिल समीक्षा समिति ने कहा था कि अधिकारी वर्ग से परे सेना के प्रत्येक कर्मी को हर समय जवान और फिट रहना चाहिए, इसलिए 17 वर्ष की रंग सेवा की वर्तमान प्रथा की बजाय रंग सेवा को 7 से 10 वर्ष की अवधि तक कम कर दिया जाए और सेना में सेवा अवधि समाप्ति के बाद उन्हें नियमित पुलिस बलों या एक राष्ट्रीय संरक्षण कोर में शामिल किया जा सकता है. भारतीय सेना ने भी सेना को युवा बनाने और जनशक्ति लागत को बचाने के लिए अग्निपथ के समान वर्ष 2020 में एक भर्ती योजना का प्रस्ताव रखा था, जिसके अनुसार सेना में युवाओं को वर्तमान में 17 वर्ष की बजाय 3 वर्ष हेतु भर्ती करने के लिए ‘टूर ऑफ ड्यूटी योजना’ का प्रस्ताव दिया था, अतः सेना में सुधार की यह योजना काफी समय से लम्बित थी, जिसके लिए उचित समय का इंतजार था, अग्निपथ भर्ती योजना का उद्देश्य सैन्य बलों के ढाँचे को युवा बनाना है, अभी देश के सशस्त्र बलों की औसत आयु प्रोफाइल 32 वर्ष है और अग्निपथ लागू होने से इसमें 4 से 5 वर्ष की कमी आएगी. इससे एक तो सेना की आक्रामक क्षमता बढ़ेगी, क्योंकि अधिक युवा सेना युद्ध भूमि में अधिक जुझारू प्रदर्शन करती है, जैसाकि सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी ब्रिगेडियर आर पी. सिंह का कहना है कि वर्ष 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय यह देखा गया कि जिनकी उम्र 25 वर्ष से कम रही और जिनकी शादी नहीं हुई थी, वे अपने से उम्रदराज एवं विवाहितों की तुलना में जोखिम लेने और जान की बाजी लगाने के लिए कहीं ज्यादा तत्पर थे. दूसरा, समकालीन तकनीकों और रुझान से परिचित युवाओं को सैन्य बलों से जोड़कर उन्हें आवश्यक कौशल प्रदान कर अनुशासित एवं अनुप्रेरित मानव संसाधन में परिणित कर समाज एवं राष्ट्र को लाभान्वित करना है युवा व तकनीक के प्रति जागरूक अग्निवीरों की भर्ती से भारतीय सेना की यह आवश्यकता पूरी होगी वैसे भी विश्व की आधुनिक सशस्त्र सेनाओं में सक्रिय सैन्य सेवा की औसत अवधि 2 से 8 वर्ष तक है. दुनिया की उत्कृष्ट सेना कही जाने वाली इजरायल की सेना में पुरुष सैनिकों की औसत सैन्य सेवा मात्र 32 महीने और महिला सैनिकों की 24 माह की होती है. अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस में भी सैनिकों की औसत सेवा 1 से 10 वर्ष तक ही होती है. 

4 वर्ष की सैन्य सेवा के बाद चयनित अग्निवीरों में से मात्र 25 प्रतिशत को ही सैन्य सेवाओं में नियमित सैन्यकर्मी के रूप में सेवा प्रदान करने का अवसर मिलेगा. शेष 75 प्रतिशत के लिए केन्द्र सरकार/राज्य सरकारों द्वारा सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों को प्राथमिकता दिए जाने की घोषणा की गई है. .

गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि असम राइफल्स सहित अन्य सभी केन्द्रीय सैन्य बलों (सीआरपीएफ.बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी, सीआईएसएफ) की भर्ती में अग्निवीरों को प्राथमिकता मिलेगी. इनके लिए 10 प्रतिशत का कोटा तथा आयु में छूट अलग से मिलेगी.

रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा जहाजरानी मंत्रालय ने घोषणा की है कि 4 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को इन मंत्रालयों के विभिन्न संगठनों में रोजगार दिया जाएगा. 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि अग्निवीरों को उत्तर प्रदेश एवं अन्य सरकारी विभागों में प्राथमिकता के आधार पर रोजगार मिलेगा.

मध्य प्रदेश सरकार पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को प्राथमिकता देगी.

हरियाणा सरकार राज्य सरकार की विभिन्न नौकरियों में अग्निवीरों को प्राथमिकता देगी.

उत्तराखण्ड में पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को प्राथमिकता मिलेगी.

अरुणाचल प्रदेश सरकार पुलिस भर्ती एवं सब्सिडी योजनाओं में अग्निवीरों को प्राथमिकता प्रदान करेगी. कर्नाटक सरकार की पुलिस भर्ती में अग्निवीर प्राथमिकता पाएंगे..

टाटा समूह के अध्यक्ष एन. चन्द्रशेखरन, महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा समूह के अध्यक्ष आनन्द महिन्द्रा, टीवीएस मोटर के प्रबन्ध निदेशक सुदर्शन वेणु, बायोकॉन की संस्थापक अध्यक्ष किरण मजूमदार शॉ, बजाज फिनसर्व के प्रबन्ध निदेशक संजीव बजाज ने मुक्त भाव से यह आशा प्रकट की है. 4 वर्ष के अनुशासित जीवन से प्रेरित अग्निवीर कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक अच्छी मानव पूँजी सिद्ध होंगे. 

कुल मिलाकर अग्निपथ योजना हमारे सशस्त्र बलों में युवा प्रोफाइल को बढ़ाएगी और उनको ‘उत्साह’ व ‘भावना’ के नए संसाधन प्रदान करेगी. इससे तकनीकी रूप से दक्ष सशस्त्र बलों की दशा-दिशा में आमूल-चूल परिवर्तन होगा, 4 वर्ष की सैन्य सेवा करके लौटे युवा राष्ट्र-निर्माण की थाती सिद्ध होंगे, अल्पकालिक सैन्य सेवा की दिशा में आगे बढ़ने का एक बड़ा लाभ यह भी है कि बाहरी व आंतरिक खतरों और प्राकृतिक आपदाओं के समय राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होंगे. 

अग्निपथ एक बढ़िया कदम है और यह माना जाना चाहिए कि कमांडिंग अधिकारियों एवं सेवा प्रमुखों के स्तर पर नियमित समीक्षा एवं उनके सुझावों से इसमें और निखार होगा. उत्कृष्ट नेतृत्व के साथ अग्निपथ का प्रवर्तन सहज ही सम्भव होगा. 

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